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तिरुपति लड्डू विवाद:सुप्रीम कोर्ट का निर्देश- SIT बनाएं, इसमें CBI और आंध्र पुलिस के 2-2, FSSAI का एक अधिकारी होगा

By Dinesh chourasiya

आंध्र प्रदेश के श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर (तिरुपति मंदिर) के प्रसादम (लड्डुओं) में जानवरों की चर्बी मामले पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इसमें शीर्ष कोर्ट ने जांच के लिए राज्य सरकार को एक स्वतंत्र कमेटी (SIT) बनाने को कहा। इसमें CBI और राज्य पुलिस के 2-2 और फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) का एक अधिकारी रहेगा।

इससे पहले, 1 अक्टूबर को आंध्र पुलिस ने मामले की SIT जांच रोक दी थी। DGP ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई चल रही है। कोर्ट के निर्देश के मुताबिक ये तय किया जाएगा कि SIT जांच को आगे बढ़ाना है या नहीं।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच तिरुपति मंदिर के लड्डुओं में मिलावट मामले की सुनवाई कर रही है।

केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, राज्य सरकार की तरफ से मुकुल रोहतगी, तिरुपति मंदिर की तरफ से सिद्धार्थ लूथरा और कपिल सिब्बल तिरुपति तिरुमाला देवस्थानम (TTD) के पूर्व चेयरमैन वाईवी सुब्बारेड्डी की तरफ से कपिल सिब्बल ने पैरवी की।

कोर्ट रूम LIVE:

  • सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता- मैंने इस मुद्दे की जांच की है और अगर आरोपों में कोई सच्चाई है तो यह बिलकुल मंजूर नहीं है। देशभर में उनके भक्त हैं। फूड सेफ्टी एक्ट भी लागू है। मैंने मौजूदा SIT के खिलाफ कुछ भी दायर नहीं किया है, लेकिन केंद्र सरकार के सीनियर अधिकारी को इसकी निगरानी दी जाए। इससे विश्वास पैदा होगा।
  • जस्टिस गवई- इसमें कोई शक या संदेह नहीं है। मैंने अखबारों में पढ़ा है कि सीएम ने बयान दिया है कि इस तरह की जांच के बारे में कोई जांच नहीं है।
  • सिद्धार्थ लूथरा: जांच अधिकारी के बयान को भी गलत ढंग से रखा गया।
  • मुकुल रोहतगी: मैं राज्य सरकार की तरफ से हूं और SIT से ही जांच करवाने की अपील करता हूं। कोर्ट की पसंद के किसी भी अधिकारी को जोड़ा जा सकता है। SIT के खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया जा सकता। सरकार ने भावनाओं को ध्यान में रखते हुए FIR की है। हम अखबारों पर भरोसा नहीं करते।
  • कपिल सिब्बल : कल एक और बयान दिया गया, अगर कोर्ट इसकी स्वतंत्र जांच करवाता है तो यह बेहतर होगा। अगर बयान नहीं दिया होता तो यह अलग बात होती।
  • मुकुल रोहतगी : मीडिया रिपोर्ट जुलाई की है। ऐसा नहीं है कि सीएम ने रिपोर्ट आने से पहले कुछ कहा हो। जो दिखाया गया है वह मामले सेसे हटकर है। यह 100 दिन पूरे होने पर हुआ था।
  • सिद्धार्थ लूथरा: अब हमें पता चला कि घी मेन सप्लायर ने दिया ही नहीं था। लैब रिपोर्ट भी सामने आ गई है। TDP ने एक रिट लगाई थी।
  • जस्टिस विश्वनाथन : हमारे पास 5 याचिकाएं हैं। कोर्ट एक एमिकस क्यूरी अपॉइंट कर सकती है।
  • मुकुल रोहतगी : अगर हमारे स्टेटस में कोई परेशानी है, तो हम हलफनामा दायर कर सकते हैं। इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि चर्बी का इस्तेमाल हुआ था।
  • कपिल सिब्बल : कौन सी रिपोर्ट में यह लिखा है। वह वनस्पति वसा है, एनिमल फैट नहीं है। कोर्ट को स्वतंत्र जांच के आदेश देने चाहिए।

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