छत्तीसगढ़

भिलाई IIT कैंपस में आवारा कुत्तों की आतंक: निगम ने 9 कुत्ते पकड़े, नसबंदी के बाद 4 मरे, एक लापता शिकायत पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनिका गांधी तक पहुंची तो लापता कुत्ते की तलाश में जुटा भिलाई निगम

By Dinesh chourasiya

हमेशा नए शोध और आविष्कार के लिए चर्चित में रहने वाला भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भिलाई (आईआईटी) इस बार आवारा कुत्तों को लेकर चर्चा में है। आईआईटी कैंपस में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसी को लेकर आईआईटी प्रबंधन ने भिलाई नगर निगम से आग्रह किया था कि कुत्तों की नसबंदी करके इन्हें यहीं वापस छोड़ दिया जाए। इसके बाद निगम की टीम आई और कैंपस में घूम रहे 9 कुत्तों को पकड़कर अपने साथ ले गई।

नसबंदी के बाद इनमें से 8 कुत्तों को टीम वापस छोड़ तो गई, लेकिन इनमें से 4 कुत्ते मर गए। जबकि एक कुत्ता कहां गया, इसकी कोई जानकारी नहीं है। आईआईटी प्रबंधन ने उस कुत्ते के बारे में पूछा तो निगम इसका कोई जवाब नहीं दे पाया। अब मामला दिल्ली तक पहुंच गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने इसकी पूरी जानकारी मांगी है। इसके बाद निगम के अफसरों में अफरा-तफरी मच गई और निगम का अमला अब उस लापता कुत्ते की तलाश में जुट गया है।

पेटा से भी की गई है शिकायत

कुत्तों के मरने की शिकायत जिला प्रशासन, पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी, पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनीमल्स (पेटा), पीएफए पीपल फॉर एनीमल और एनीमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया में की गई है।
विंग कमांडर डॉ. जयेश चंद्रा एस पाय, आईआईटी रजिस्ट्रार

नसबंदी करने वाले डॉक्टर को किया सस्पेंड

नसबंदी के बाद कुछ कुत्तों की मौत होने की खबर मिली है। इसके बाद हमने प्राथमिक जांच करवाई है और नसबंदी करने वाले डॉ. हेमंत बेलचंदन को सस्पेंड कर दिया है। एक कुत्ता भाग गया था। उसकी तलाश की जा रही है।
– डॉ. धर्मवीर चंद्राकर

हमने कुत्तों की नसबंदी की थी। नसबंदी के बाद कुछ कुत्ते मर जाते हैं। नसबंदी के बाद कुत्तों की दो से तीन दिन देखभाल की जाती है। उसके बाद छोड़ा जाता है, लेकिन 31 मई को ठेका खत्म हो रहा था, इसलिए उसी दिन छोड़ दिया।
– डॉ. हेमंत बेलचंदन, ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर

चार कुत्ते मरणासन्न अवस्था में लाए थे, तुरंत मर गए

नगर निगम भिलाई ने कुत्तों की नसंबदी का ठेका डॉ. धर्मवीर चंद्राकर को दिया था। उन्होंने इस काम के लिए डॉ. हेमंत बेलचंदन को नियुक्त किया है जो कुत्तों की नसबंदी करते थे। 31 मई को ठेका खत्म होने वाला था, इसलिए 31 मई की शाम ही इन कुत्तों को नसबंदी के बाद आईआईटी कैंपस में छोड़ दिया गया। नियम के अनुसार कुत्तों को नसबंदी के बाद दो से तीन दिन आब्जर्वेशन में रखा जाता है, क्योंकि इन्फेक्शन का खतरा रहता है। निगम की टीम जब नसबंदी के बाद जब आठ कुत्तों को लेकर आईआईटी कैंपस पहुंची तो उनमें से चार पहले ही मरणासन्न अवस्था में थे।

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