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भिलाई अभिषेक मिश्रा हत्याकांड अपडेट हाईकोर्ट के फैसले से दुखी अभिषेक मिश्रा के पिता आईपी मिश्रा का बयान कहां हम इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में देगे चुनौती जानिए क्या है पूरा अभिषेक मिश्रा हत्याकांड की कहानी। फैसला आने में क्यों लग गए 8 साल

By Dinesh chourasiya

 

 

आरोपियों की ओर से उच्च न्यायालय में प्रकरण की पैरवी करने वाली अधिवक्ता उमा भारती साहू ने बताया कि यह पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर टिका हुआ था। अभियोजन पक्ष सुनवाई के दौरान घटना की कड़ियों को जोड़ नहीं पाया था। हाईकोर्ट ने फैसले में कहा कि केवल मोबाइल में बातचीत के आधार पर किसी को दोषी नहीं माना जाता सकता है। इसके अलावा परिस्थितिजन्य साक्ष्यों में भी हत्या का उद्देश्य स्पष्ट नहीं होता है। इसकी वजह से उच्च न्यायालय ने विकास जैन और अजीत सिंह को बरी कर दिया।

दुर्ग जिले के बहुचर्चित अभिषेक मिश्रा हत्याकांड के दो आरोपियों को हाईकोर्ट ने बरी कर दिया है। मामले में किम्सी के पति विकास जैन और चाचा अजीत सिंह ने हाई कोर्ट में अपील की थी। चीफ जस्टिस रमेश िसन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की बेंच ने दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया है।

​साथ ही किम्सी को बरी करने के खिलाफ अभिषेक के पिता आईपी मिश्रा की याचिका को भी खारिज कर दिया है। 5 दिसंबर 2023 को इस मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद चीफ जस्टिस की डबल बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस पर सोमवार को आदेश जारी कर दिया गया। बता दें कि यह मर्डर मिस्ट्री अपने समय की सबसे चर्चित हत्याकांड रहा। मामले में संदेह का लाभ देते हुए कोर्ट ने किम्सी को पहले ही बरी कर दिया था, लेकिन उसके पति विकास और चाचा अजीत को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। इस पर दोनों पक्ष ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। 10 नवंबर 2015 की शाम शंकराचार्य इंजीनियरिंग कॉलेज के चेयरमैन आईपी मिश्रा के इकलौते बेटे अभिषेक का अपहरण हुआ था। पुलिस ने जांच शुरू की। इस दौरान कॉल डिटेल्स खंगाले गए।

पुलिस ने भिलाई के सेक्टर-10 में रहने वाले विकास जैन को हिरासत में लिया। पुलिस की चार्जशीट के अनुसार, घटना के करीब 45 दिन बाद किम्सी काम्बोज (जैन) के चाचा अजीत सिंह के स्मृति नगर निवास के बगीचे में अभिषेक की सड़ी-गली लाश बरामद हुई थी। किम्सी के पति विकास जैन ने अपने चाचा ससुर अजीत सिंह के साथ लाश को दफना कर ऊपर फूल गोभी की सब्जियां उगा दी थीं। पुलिस ने लाश के पास हाथ का कड़ा, अंगूठी और लॉकेट देखकर अभिषेक की लाश होने की पुष्टि की थी। डीएनए टेस्ट भी कराया गया था। जिसके बाद आरोपी गिरफ्तार किए गए थे। ^हमारे लिए बहुत दुखद और अप्रत्याशित फैसला है। हमें देश की न्याय व्यवस्था पर भरोसा है। हम न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। विश्वास है ​शीर्ष कोर्ट से बेटे के हत्यारों को सजा अवश्य मिलेगी। आईपी मिश्रा, अभिषेक के पिता एवं शंकराचार्य ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स के चेयरमैन

मामले में अभिषेक के कॉलेज में पूर्व में जॉब करने वाली किम्सी, उसके चाचा अजीत और पति विकास जैन को गिरफ्तार किया गया था। जांच पूरी होने के बाद दुर्ग कोर्ट में चार्जशीट पेश की गई।

पुलिस की जांच में पता चला था कि किम्सी, अभिषेक के कॉलेज में काम करती थी। इसी दौरान दोनों करीब आए थे। 2013 में किम्सी ने विकास से शादी कर ली और कॉलेज की नौकरी छोड़ दी थी, लेकिन अभिषेक चाहता था कि उनका रिश्ता कायम रहे। वह लगातार किम्सी पर इसके लिए दबाव डाल रहा था। परेशान किम्सी ने पति विकास को इसकी जानकारी दी। इसके बाद किम्सी, पति विकास और किम्सी के चाचा अजीत सिंह ने हत्या की साजिश रची। अभिषेक को 9 नवंबर 2015 को चौहान टाउन स्थित घर पर बुलाया। घर पहुंचने पर किम्सी और अभिषेक के बीच विवाद हुआ। पहले से मौजूद विकास और अजीत ने अभिषेक के सिर पर पीछे से रॉड से वार किया, जिससे वह कमरे में गिर गया। फिर अभिषेक को किम्सी के चाचा अजीत ने भिलाई के स्मृति नगर ले जाकर 6 फीट गहरे गड्ढे में दफना दिया था।

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