छत्तीसगढ़

भिलाई 6 दिन बाद मिला 13 साल का शाजिद:बोल और सुन नहीं सकता, स्टेशन के पास घूम रहा था, पुलिस ने किया रेस्क्यू

By Dinesh chourasiya

बेटे की तलाश में परिजनों ने रात-दिन एक कर दिया था। बच्चे के मिलने केबाद अब उन्होंने राहत की सांस ली है।

भिलाई में 6 दिन से लापता 3 साल का शाजिद मिल गया है। वो भिलाई नगर स्टेशन के पास घूम रहा था। उधर, इस बात की जानकारी जैसे ही पुलिस को लगी, पुलिस मौके पर पहुंची और उसका रेस्क्यू कर लिया गया है। मामला सुपेला थाना क्षेत्र का है।

शाजिद बोल और सुन नहीं सकता है। पुलिस उसे अपने साथ थाने लेकर आई है। पुलिस ने बताया है कि वो उसे साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट के पास ले जाएगी। उसके सामने ही बच्चे से पूछताछ की जाएगी की वो इतने दिन कहां रहा, किसके साथ गया था और कैसे गया था

वहीं बच्चे के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। फरीद नगर निवासी उसके माता-पिता उसे तलाश कर रहे थे। शाजिद 25 जुलाई से घर नहीं लौटा था। अब शाजिद के मिलने के बाद उन्होंने राहत की सांस ली है।

नाश्ता करने के बाद घूमने जाता था

शाजिद की मां सुमय्या का कहना था कि उनका बेटा हर दिन सुबह नाश्ता करने के बाद घर से बाहर घूमने जाता था। इसके बाद दोपहर 12-1 बजे तक लौट आता था। 25 जुलाई की सुबह भी वो उठा। नाश्ता किया और सुबह 10.30 बजे घूमने के लिए निकला। उसके बाद से वो आज तक वापस नहीं लौटा था

6 दिनों से घर वाले उसे खोज-खोजकर परेशान थे। माता पिता और बड़ा भाई सब काम छोड़कर उसकी तलाश में लगे थे। मां ने बताया कि उसने ब्लैक कलर का लोवर और पिंक कलर की शर्ट पहनी थी। घर वालों ने आशंका जताई है कि कोई उसे बहला फुसलाकर अपने साथ ले गया है।

शाजिद न तो बोल पाता है, और न ही सुन पाता है..
शाजिद की मां ने बताया कि, उनका बेटा बोल और सुन नहीं पाता। इसलिए उसका कोई दोस्त नहीं था। वो अपने बड़े भाई और दो बहनों के साथ ही खेलता था। 25 जुलाई की सुबह उसने अपने बड़े भाई को इशारों में बस करके बोला था, लेकिन वो समझ नहीं पाया कि वो कहना क्या चाहता है।

ट्रेन को देखकर खुशी से चिल्लाने लगता था शाजिद
परिजनों का कहना है कि शाजिद घूमने का काफी शौकीन था। जब भी वो उसे लेकर कहीं जाते वो काफी खुश होता था। ट्रेन में घूमना उसे काफी पसंद था। ट्रेन को देखते ही वो खुशी से चिल्लाने लगता था। इसलिए ऐसी आशंका जताई जा रही है कि वो कहीं ट्रेन में बैठकर न चला गया हो।
पिता के साथ हर सप्ताह जाता था घूमने
शाजिद घूमने का इतना शौकीन था उसके पिता फारुख उसे हर सप्ताह दुर्ग शनिचरी बाजार घुमाने ले जाते थे। घरवालों को आशंका थी की वो वहां न गया हो। उन्होंने पूरे दुर्ग में पता कराया, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला था। शाजिद की मां ने लोगों से गुहार लगाई थी कि उसका बेटा किसी को भी कहीं दिखे तो वो उन्हें सूचित करें। घरवालों ने इसके लिए 20 हजार रुपए का इनाम भी रखा है।

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