CRIME

CG में पिता की मौत के बाद अंतिम-संस्कार के लिए नही थे पैसे दिव्यांग बच्चे के पास पैसा छत्तीसगढ़ पुलिस ने दी मुखाग्नि

By Dinesh chourasiya

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में पिता की मौत के बाद बच्चों के पास अंतिम संस्कार के लिए भी पैसे नहीं थे। दिव्यांग बेटा-बेटी अस्पताल में ही शव छोड़कर जा रहे थे। इसकी सूचना जूटमिल थाना पुलिस मिली तो वो मौके पर पहुंच गई। इसके बाद उन्होंने शव का दाह संस्कार किया।

रायगढ़ में रहने वाले विनय प्रकाश जायसवाल की तबीयत खराब थी। इसके चलते उन्हें सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस दौरान उनके बेटा और बेटी साथ में थे। बच्चों की मां का पहले ही निधन हो चुका है। इलाज के दौरान विनय ने भी रविवार को दम तोड़ दिया।

जूटमिल पुलिस ने हिन्दू प्रथा के अनुसार कयाघाट मुक्ति धाम में शव का अंतिम संस्कार कराया।

अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस को दी सूचना

विनय की मौत के बाद उनके बेटा-बेटी पिता का शव अस्पताल में छोड़कर जा रहे थे। इसकी सूचना अस्पताल प्रबंधन ने जूटमिल थाना पुलिस को दी। थाना प्रभारी मोहन भारद्वाज ने बच्चों को रोकने के लिए कहा और टीम के साथ अस्पताल पहुंचे। वहां से शव को कयाघाट मुक्ति धाम ले गए और अंतिम संस्कार किया।

2 साल से रायगढ़ में रह रहे थे

विनय प्रकाश जायसवाल (54) मूलतः दिल्ली के गांधीनगर के रहने वाले थे। दिल्ली से आकर पहले रायपुर में कुछ व्यवसाय कर रहे थे। इस बीच व्यापार में नुकसान होने से बेटा संस्कार प्रकाश (22) और बेटी सुपर्णा प्रकाश (20) के साथ करीब 2 साल पहले रायगढ़ रहने के लिए आ गए थे। अचानक से उनकी तबीयत बिगड़ गई।

बेटा-बेटी हैं दिव्यांग

पुलिस ने बताया कि, विनय के दोनों बच्चे दिव्यांग हैं और चलने में सक्षम नहीं है। बेटी को बोलने में भी समस्या है। पिता के बीमार होने के बाद से घर की माली स्थिति खराब हो गई थी। किसी तरह घर चल रहा था। बेटा चलने में बिल्कुल अक्षम है, इसके चलते पुलिस मुक्ति धाम में बेटी को साथ लेकर आई।

दिल्ली जाने की व्यवस्था

थाना प्रभारी मोहन भारद्वाज ने बताया कि, दिल्ली से विनय जायसवाल के परिचित उन्हें देखने रायगढ़ पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि, बच्चे उनके बेटे के साथ पढ़ते थे। इसलिए जान पहचान है। इसके बाद पुलिस ने आर्थिक मदद कर बच्चों को परिचितों के साथ दिल्ली जाने की व्यवस्था की।

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