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पुरूर में चला विशेष बाल संरक्षण एवं जागरूकता अभियान, बाल श्रम और बाल अपराध के प्रति लोगों को किया जागरूक

जिला बाल संरक्षण इकाई और चाइल्ड हेल्पलाइन टीम ने झुग्गी-झोपड़ी, बाजार, बस स्टैंड व वार्डों में किया निरीक्षण, बच्चों की सुरक्षा और पुनर्वास पर दिया जोर

रितेश कुमार क्राइम रिपोर्टर (पत्रकार)

बालोद, 07 अगस्त 2026। कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देशानुसार महिला एवं बाल विकास विभाग तथा जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में जिले में बच्चों के संरक्षण एवं उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में जिला बाल संरक्षण इकाई एवं चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम द्वारा गुरूर विकासखंड के ग्राम पुरूर में विशेष जागरूकता एवं बाल संरक्षण अभियान संचालित किया गया।

अभियान का उद्देश्य सड़क जैसी परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों की पहचान कर उन्हें आवश्यक संरक्षण उपलब्ध कराना तथा बाल श्रम एवं भिक्षावृत्ति जैसी परिस्थितियों से बच्चों को बाहर निकालकर उनके सुरक्षित पुनर्वास की दिशा में कार्य करना है। अभियान के दौरान टीम ने पुरूर के विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचकर बच्चों की स्थिति का जायजा लिया और लोगों को बाल अधिकारों, बाल श्रम तथा बाल अपराध से संबंधित प्रावधानों की जानकारी दी।

 

झुग्गी-झोपड़ी, बाजार और बस स्टैंड सहित विभिन्न स्थानों पर पहुंची टीम

 

अभियान के दौरान जिला बाल संरक्षण इकाई और चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम द्वारा झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों, बाजार चौक, बस स्टैंड तथा विभिन्न वार्डों में निरीक्षण एवं जागरूकता गतिविधियां संचालित की गईं। इस दौरान सड़क पर रहने, घूमने अथवा भिक्षावृत्ति जैसी परिस्थितियों में पाए जाने वाले बच्चों के संबंध में जानकारी जुटाई गई तथा जरूरतमंद बच्चों के संरक्षण और पुनर्वास के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई।

 

टीम ने लोगों को बाल श्रम के दुष्परिणामों और बच्चों को शिक्षा एवं सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने की आवश्यकता के संबंध में भी जागरूक किया। विशेष रूप से कम उम्र के बच्चों को मजदूरी अथवा भिक्षावृत्ति जैसी परिस्थितियों से बचाने के लिए प्रशासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी गई।

 

घुमंतू परिवार को बच्चों की बेहतर देखरेख और शिक्षा के लिए किया प्रेरित

 

अभियान के दौरान टीम को एक घुमंतू परिवार मिला, जो मूल रूप से गोंदिया, महाराष्ट्र का निवासी बताया गया। परिवार द्वारा पिछले पांच दिनों से पुरूर में रहना बताया गया। टीम ने परिवार से बातचीत कर उन्हें अपने गृह ग्राम लौटने तथा वहीं रहकर जीवन-यापन करने के साथ-साथ बच्चों की बेहतर देखरेख, सुरक्षा एवं शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया।

 

टीम द्वारा परिवार को बच्चों के अधिकारों और उनके सुरक्षित भविष्य के महत्व के संबंध में भी जानकारी दी गई। साथ ही बच्चों को शिक्षा से जोड़ने और उन्हें किसी भी प्रकार के शोषण या असुरक्षित परिस्थिति से बचाने के लिए आवश्यक समझाइश दी गई।

 

बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और पुनर्वास अभियान का प्रमुख उद्देश्य

 

अभियान का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में बच्चों के अधिकारों का संरक्षण, उनकी शिक्षा, सुरक्षा एवं समग्र विकास सुनिश्चित करना है। ऐसे बच्चों की पहचान की जा रही है, जो कम उम्र में बाल मजदूरी या भिक्षावृत्ति जैसी परिस्थितियों में रहने के लिए विवश हैं। ऐसे बच्चों को आवश्यकतानुसार रेस्क्यू कर संरक्षण एवं पुनर्वास की प्रक्रिया से जोड़ा जा रहा है।

 

अभियान के माध्यम से आम नागरिकों को भी बाल अपराध, बाल श्रम और बच्चों के अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। लोगों से अपील की जा रही है कि यदि उनके आसपास कोई बच्चा असुरक्षित परिस्थिति में रह रहा हो, बाल श्रम कर रहा हो या किसी प्रकार के शोषण का शिकार हो, तो इसकी सूचना संबंधित विभाग या चाइल्ड हेल्पलाइन को दी जाए।

 

जिला प्रशासन एवं महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए इस प्रकार के जागरूकता एवं संरक्षण अभियानों को निरंतर जारी रखने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि जिले में प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण, शिक्षा और विकास का अवसर मिल सके।

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