
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 लागू, अब लाल और पीले डिब्बे से होगा अलग-अलग कचरा संग्रहण
जिला पंचायत सीईओ सुनील चंद्रवंशी ने नागरिकों से घरों में 4 डस्टबिन रखने और गीला, सूखा, सैनिटरी व ई-कचरे का पृथक्करण सुनिश्चित करने की अपील की












रितेश कुमार क्राइम रिपोर्टर (पत्रकार)
बालोद, 08 जुलाई 2026
सुप्रीम कोर्ट एवं राज्य कार्यालय के निर्देशों के परिपालन में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के अनुरूप ट्रायसाइकिल में लाल डिब्बा सेनेटरी पैड, डाइपर के लिए एवं पीला डिब्बा इलेक्ट्रॉनिक कचरे के लिए संशोधित किया गया है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील चंद्रवंशी ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने घरों में कम से कम 04 प्रकार के डस्टबिन का उपयोग करें तथा गीला, सूखा, सैनिटरी एवं घरेलू जोखिमयुक्त कचरे को अलग-अलग संग्रहित कर स्वच्छता कर्मियों को सौंपें। कचरे का पृथक्करण न केवल स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाता है बल्कि पुनर्चक्रण, संसाधन संरक्षण एवं पर्यावरण सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।

जिला पंचायत के अतिरिक्त कार्यपालन अधिकारी ने बताया कि ग्राम स्तर पर कचरा संग्रहण एवं परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से ग्राम पंचायत द्वारा पुराने एवं अनुपयोगी हो चुके ट्राइसाइकिल वाहन का संशोधन (मॉडिफिकेशन) कर उसे पुनः उपयोग योग्य बनाया गया है। यह पहल संसाधनों के संरक्षण, लागत में कमी तथा पर्यावरण अनुकूल अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ग्राम पंचायत द्वारा संशोधित ट्राइसाइकिल में गीला कचरा, सूखा कचरा, घरेलू जोखिमयुक्त तथा सैनिटरी अपशिष्ट के पृथक संग्रहण हेतु अलग-अलग खंड विकसित किए गए हैं। वाहन पर नागरिकों को कचरा पृथक्करण के प्रति जागरूक करने वाले संदेश एवं स्वच्छता संबंधी नारे भी प्रदर्शित किए गए हैं, जिससे घर-घर कचरा संग्रहण के दौरान जनजागरूकता का कार्य भी किया जा रहा है।
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के अनुसार स्रोत स्तर पर कचरे का पृथक्करण, पृथक संग्रहण, परिवहन एवं वैज्ञानिक प्रबंधन अनिवार्य किया गया है। इसी क्रम में ग्राम पंचायत द्वारा पुराने ट्राइसाइकिल का पुनः उपयोग करते हुए कम लागत में एक प्रभावी कचरा संग्रहण वाहन तैयार किया गया है। इससे पंचायत को नए वाहन की खरीद पर होने वाले व्यय से बचत होगी तथा उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा। संशोधित ट्राइसाइकिल के माध्यम से स्वच्छता कर्मचारी नियमित रूप से घर-घर जाकर पृथक कचरा संग्रहित करेंगे। संग्रहित गीले कचरे का प्रसंस्करण कम्पोस्टिंग अथवा अन्य वैज्ञानिक विधियों से किया जाएगा, जबकि सूखे कचरे को प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट अथवा पुनर्चक्रण केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा। सैनिटरी एवं घरेलू जोखिमयुक्त अपशिष्ट का भी नियमानुसार पृथक प्रबंधन किया जाएगा।





