
फर्जी ई-चालान लिंक से रहें सावधान, परिवहन विभाग ने जारी की साइबर एडवाइजरी
व्हाट्सएप और एसएमएस पर आने वाले संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें, ई-चालान की जांच और भुगतान केवल आधिकारिक वेबसाइट व 'एम-परिवहन' ऐप से करें












रितेश कुमार क्राइम रिपोर्टर (पत्रकार)
बालोद, 08 जुलाई 2026
राज्य में साइबर क्राइम से संबंधित सामने आ रहे विभिन्न मामलों को देखते हुए परिवहन विभाग द्वारा आम नागरिकों और वाहन स्वामियों के लिए विशेष सतर्कता निर्देश जारी किए गए हैं। जिला परिवहन अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में साइबर अपराधियों और ठगों द्वारा फर्जी ई-चालान के नाम पर एसएमएस और व्हाट्सएप के जरिए लोगों को ठगी का शिकार बनाया जा रहा है। ठगों द्वारा फर्जी मैसेज भेजकर यह डराया जाता है कि आपकी गाड़ी का चालान कटा है और तुरंत भुगतान करें, अन्यथा वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। संदेशों में ’ई-चालान डाट एक्स वाय जेड’ या ’क्लिक पे डाट लाइव’ जैसे नकली लिंक संलग्न होते हैं। इन लिंक्स को क्लिक करते ही फर्जी वेबसाइटें खुल जाती हैं, जो नागरिकों से बैंक डिटेल, कार्ड नंबर और ओटीपी मांगकर उनके खाते से राशि आहरित कर लेती हैं। उन्होंने बताया कि कई बार ठगों द्वारा एपीके फाइल डाउनलोड कराकर नागरिकों का मोबाइल हैक कर लिया जाता है। इसके पश्चात् इसी एपीके फाइल के माध्यम से संबंधित व्यक्ति के मोबाइल से अन्य लोगों को भी एसएमएस और व्हाट्सएप के जरिए फर्जी लिंक भेजे जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि विभाग द्वारा कभी भी एसएमएस या व्हाट्सएप पर सीधे भुगतान के लिए लिंक नहीं भेजा जाता है और न ही ’तुरंत भुगतान करें वरना कार्रवाई होगी’ जैसी धमकी भरे संदेश प्रसारित किए जाते हैं। ऐसे संदेशों के प्रति सतर्कता ही असली सुरक्षा है।
परिवहन विभाग द्वारा समस्त नागरिकों एवं वाहन स्वामियों को सूचित किया गया है कि वे किसी भी अजनबी अथवा अज्ञात व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक पर क्लिक न करें। अपने बैंक खाते से संबंधित अत्यंत गोपनीय जानकारियां जैसे ओटीपी, सीवीवी और यूपीआई पिन किसी से भी साझा न करें। ई-चालान चेक करने या ऑनलाइन चालान का सुरक्षित भुगतान करने के लिए केवल परिवहन विभाग की आधिकारिक विभागीय वेबसाइट https://103.195.218.159/challan अथवा ’एम-परिवहन’ ऐप का ही इस्तेमाल करें। इसके साथ ही किसी भी प्रकार का संदिग्ध मैसेज प्राप्त होने या साइबर ठगी की आशंका होने पर तत्काल राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें अथवा साइबर क्राइम की आधिकारिक वेबसाइट पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।





