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दुर्ग में सांसद विजय बघेल के समर्थक ने लगाई फांसी:उपसरपंच रहते जहां मंदिर बनवाया, वहीं मिली लाश; एक दिन पहले खरीदी थी रस्सी

By Dinesh chourasiya

 

 दुर्ग जिले में सांसद विजय बघेल के समर्थक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। 20 साल पहले ग्राम सेलूद में तारेंद्र बंछोर ने उपसरपंच रहते हुए शिव मंदिर बनवाया था, वहीं आज उसकी लाश मिली है। मामला उतई थाना क्षेत्र का है।

बताया जा रहा है, तारेंद्र ने एक दिन पहले हार्डवेयर शॉप से रस्सी खरीदी थी। वह पड़ोस में बर्सी कार्यक्रम में भी शामिल हुआ था। तब तक वह नॉर्मल था। आज फांसी लगाने से पहले उसने अपना मोबाइल अनलॉक कर दिया था, ताकि घर वाले परेशान न हों।

तारेंद्र भाजपा का सक्रिय कार्यकर्ता था। वर्तमान में स्कूल समिति का अध्यक्ष था। बताया जा रहा है वह लंबे समय से पेट से जुड़ी बीमारी से परेशान था,उसे निमोनिया हो गया था। फिलहाल, पुलिस को अभी तक कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। सूचना मिलते ही सांसद विजय बघेल भी ग्राम सेलूद पहुंचे।

मंदिर के आंगन में लगे चंपा के पेड़ पर तारेंद्र की लाश लटकी थी।
सांसद विजय बघेल अंतिम संस्कार में शामिल हुए।

उपसरपंच रहते बनवाया था मंदिर

जानकारी के मुताबिक, साल 2005 में तारेंद्र बंछोर सेलूद गांव में उपसरपंच बना था। तभी उसने बाजार चौक स्थित चारबांधा तालाब के पास शिव मंदिर बनवाया था। बताया जा रहा है, जिस चंपा के पेड़ में आज उसकी लाश मिली है, वह पेड़ भी उसने ही लगाया था।

ग्रामीणों ने दिखी लाश

ग्रामीणों ने मंगलवार (16 जून) सुबह मंदिर परिसर में तारेंद्र बंछोर का शव देखा तो तुरंत थाने में सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। शव को पोस्टमॉर्टम कराने के बाद परिवार वालों को सौंप दिया गया है।

पेट से जुड़ी बिमारी थी

बताया जा रहा है कि कुछ दिनों पहले तारेंद्र बंछोर की तबीयत खराब हुई थी, जिसके बाद उसे हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया था। वह पेट से जुड़ी बीमारी से परेशान था। इलाज के बाद स्वास्थ्य में सुधार होने पर घर लौट आया था।

हालांकि, अभी तक सुसाइड की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। वर्तमान में तारेंद्र सेलूद स्थित शासकीय कन्या विद्यालय समिति का अध्यक्ष और सरस्वती शिशु मंदिर का अध्यक्ष था।

जांच में जुटी पुलिस

उतई पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस रिश्तेदारों और ग्रामीणों से पूछताछ कर अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही घटना के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।

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