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दुर्ग में रिद्धि-सिद्धि बिल्डर्स पर  धोखाधड़ी के मामले में FIR दर्ज पार्टनरों पर धोखाधड़ी का आरोप, कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज, 

By Dinesh chourasiya

दुर्ग में फ्लैट दिलाने के नाम पर ठगी का मामला अब आपराधिक जांच के दायरे में आ गया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी राहुल सोरी के आदेश पर सिटी कोतवाली थाने दुर्ग में रिद्धि-सिद्धि बिल्डर्स के पार्टनरों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है।

आरोप है कि साल 2011 में निवेशकों से करीब 24.50 लाख रुपए लेकर फ्लैट देने का वादा किया गया था। 15 साल बाद भी न तो फ्लैट मिला और न ही पूरी रकम वापस की गई। इस दौरान ब्याज का भुगतान भी बीच में रोका गया। कोर्ट के निर्देश के बाद 23 मार्च 2026 को FIR दर्ज की गई है।

पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 34 सहित भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस मामले में रूपेश जैन, विश्वास गुप्ता, मनीष शर्मा, सजल जैन, अमृता खंडेलवाल और कांतिलाल बोथरा (सभी दुर्ग निवासी) समेत अन्य को आरोपी बनाया गया।

12% ब्याज के भरोसे निवेश

पीड़ित पदम जैन, रेणु जैन, रूपाली जैन और आरती जैन का कहना है कि रिद्धि-सिद्धि बिल्डर्स ने पुलगांव नाला क्षेत्र में प्रोजेक्ट दिखाकर उन्हें निवेश के लिए तैयार किया। आरोप है कि निवेशकों को भरोसा दिलाया गया था कि फ्लैट तैयार होने तक 12% ब्याज दिया जाएगा।

शुरुआत में साल 2018 तक ब्याज भुगतान हुआ, जिससे निवेशकों का विश्वास बढ़ा। बाद में अचानक भुगतान बंद हो गया और फ्लैट निर्माण कार्य ठप पड़ गया। निवेशकों को लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा।

पीड़ितों का दावा है कि निवेश की गई राशि अब लगभग 1.25 करोड़ से 1.50 करोड़ रुपए हो चुकी है। आरोप है कि बिल्डर्स ने फ्लैट न देने के साथ जमीन आपस में बांटकर अपने नाम कर ली और निवेशकों के पैसे का व्यक्तिगत उपयोग किया।

पार्टनरशिप फर्म में गड़बड़ी और दस्तावेजों में हेराफेरी

जांच में पता चला कि रिद्धि-सिद्धि बिल्डर्स अपंजीकृत फर्म थी, बावजूद इसके कॉलोनाइजर लाइसेंस हासिल किया गया। आरोप है कि एक पार्टनर ने खुद को प्रोपराइटर दिखाकर दस्तावेजों में हेराफेरी की और सरकारी अनुमति प्राप्त की।

पीड़ितों ने आरोप लगाया कि पूरा मामला सुनियोजित साजिश के तहत किया गया और कूटरचित दस्तावेजों से निवेशकों को गुमराह किया गया।

शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं

पीड़ितों का कहना है कि 2023 से लगातार पुलिस थाना, पुलिस अधीक्षक, कलेक्टर और अन्य अधिकारियों को शिकायत दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि आरोपियों के राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव के कारण मामला दबाया गया।

न्यायालय में परिवाद और FIR

आखिरकार 2026 में न्यायालय में धारा 156(3) के तहत परिवाद पेश किया, जिसके बाद कोर्ट ने FIR दर्ज करने का आदेश दिया। 7 मार्च 2026 को कोर्ट आदेश जारी होने के बावजूद FIR दर्ज करने में करीब 15 दिन लग गए।

नाराज पीड़ित रितेश जैन ने प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायत भेजी। शिकायत में कहा गया कि थाना प्रभारी ने “SP से सलाह” का हवाला देकर FIR टाल दी।

आरोपी बोला- जमीन माता के नाम थी

आरोपी कांतिलाल बोथरा ने सभी आरोप खारिज किए। उनका कहना है कि जमीन उनकी माता के नाम थी, उनके निधन के बाद उनका नाम दर्ज हुआ। उन्होंने दावा किया कि रितेश जैन को पूरा पैसा वापस किया गया और आरोप निराधार हैं।

SSP बोले- मामले की जांच जारी

एसएसपी विजय अग्रवाल ने कहा कि मामला मूल रूप से सिविल प्रकृति का था, इसलिए पुलिस सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकती। न्यायालय के आदेश के बाद FIR दर्ज की गई और अब जांच जारी है।

हाई-प्रोफाइल कनेक्शन

कुछ आरोपियों के नाम पहले भी चर्चा में रहे हैं। एक आरोपी के घर पर शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय की रेड हुई। एक अन्य आरोपी बीजेपी के व्यापारिक संगठनों से जुड़ा और एक आरोपी प्रदेश के राइस मिलर संगठन से जुड़ा बताया गया।

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