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बिलासपुर में बर्ड फ्लू, 47 हजार पक्षी-अंडे नष्ट किए कानन पेंडारी जू 7 दिनों के लिए बंद

By Dinesh chourasiya

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में कोनी स्थित पोल्ट्री फार्म में बर्ड-फ्लू वायरस मिला है। यहां 5 हजार मुर्गियां की मौत के बाद 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाली 22 हजार से ज्यादा पक्षी और 25 हजार अंडे नष्ट किए गए।

वायरस फैलने के बाद प्रशासन की 2 अलग-अलग लापरवाही सामने आई है। एक तरफ खमतराई इलाके में मरी मुर्गियां फेंकी मिली। दूसरी तरफ मुर्गियों की मौत के बाद भी चूजों और अंडों की सप्लाई संभाग भर में जारी रही।

वहीं, एहतियात के तौर पर 25 मार्च से 7 दिन के लिए कानन पेंडारी जू बंद कर दिया है। निगम की टीम ने चिकन अंडे की दुकाने बंद करवाई है, लेकिन लोग मनमानी फिर दुकानें खोल ले रहे हैं।

पूरे संभाग में हुई अंडे चुजों की सप्लाई

पशु चिकित्सा विभाग के संयुक्त संचालक जीएसएस तंवर ने बातचीत में बताया कि पूरे संभाग में सप्लाई हुई है। बिलासपुर जिले में 14 मार्च को 6 यूनिट सप्लाई हुई थी। 14 मार्च के बाद दूसरे जिलों में सप्लाई जारी रही। राज्य भर से इसके डाटा मंगाए जाएंगे।

मरी हुई मुर्गियों को लेकर जीएसएस तंवर ने कहा कि जिस यूनिट ने मरी हुई मुर्गी फेंकी उसके मालिक को ढूंढना मश्किल है।

6 दिन बाद सैंपल भेजे गए

सरकारी पोल्ट्री फार्म में 17 मार्च से पहले ही मुर्गे-मुर्गियों की मौत शुरू हो गई थी। इसके बावजूद पूरे संभाग में मुर्गे-मुर्गियों और चूजों की सप्लाई लगातार चलती रही। जब बड़ी संख्या में मौतें हुईं, तब करीब 6 दिन बाद सैंपल जांच के लिए भेजे गए।

जांच रिपोर्ट में बर्ड फ्लू की पुष्टि के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ। सरकारी पोल्ट्री फार्म में 5 हजार से अधिक मुर्गियां, 22 हजार से ज्यादा पक्षी और 25 हजार से अधिक अंडे नष्ट किए गए।

प्रशासन ने दावा किया कि संक्रमण नियंत्रण में है, सभी जरूरी सावधानियां बरती जा रही हैं। एहतियान के तौर पर कानन पेंडारी जूलॉजिकल पार्क को 25 मार्च से 7 दिनों के लिए बंद कर दिया गया है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग की 14 सदस्यीय टीमों ने देवनंदन नगर क्षेत्र में डोर-टू-डोर सर्वे कर रही है।

परिसर में सैनिटाइजेशन किया जा रहा है और सभी पक्षियों की निगरानी बढ़ा दी गई है। इस दौरान बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक रहेगी।

शुरुआती 100 मुर्गों की मौत को किया गया नजरअंदाज

दरअसल शहर से लगे कोनी स्थित कुक्कुट पालन परिसर में बर्ड फ्लू का संक्रमण फैलने के बाद  तब पता चला कि यहां मुर्गे-मुर्गियों की मौत का सिलसिला 16 मार्च से पहले शुरु हो गया था।

शुरुआत में करीब 100 मुर्गों की मौत हुई, तब यहां के जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों ने इसे नजरअंदाज किया। इस दौरान हमेशा की तरह यहां से पूरे संभाग भर में सप्लाई का सिलसिला जारी रहा। इस बीच लगातार मौतों का आंकड़ा बढ़ने लगा।

मौसम परिवर्तन मानकर बरती लापरवाही

शुरुआती दौर में अधिकारियों ने पक्षियों की मौत को मौसम परिवर्तन मान लिया था। बिना जांच बड़ी संख्या में पक्षियों को दफना दिया गया। इससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ा। हालांकि लापरवाही के कारण ही संक्रमण तेजी से फैलने की आशंका जताई जा रही है।

खुले में फेंके गए मरे हुए मुर्गे

मुर्गे-मुर्गियों की मौत और संक्रमण की पुष्टि के बाद जिले के अलग-अलग इलाकों में मरे हुए पक्षियों को फेंके जाने की जानकारी सामने आने लगी है। शहर से लगे खमतराई क्षेत्र में ड्रीम सिटी कॉलोनी के पास बोरियों में भरी मरी हुई मुर्गियों को नाली में फेंका गया है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने मरे हुए पक्षियों को सुरक्षित तरीके से दफनाने का दावा किया था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें खुले में फेंक दिया गया। इससे इलाके में बदबू फैल रही है और संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है।

2 दिन में हजारों पक्षी और अंडे नष्ट

जब अधिकारियों ने जिला प्रशासन को इसकी जानकारी दी, तब संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए व्यापक स्तर पर कार्रवाई शुरू की गई। करीब 5 हजार मुर्गियों को दफनाया गया, 5 हजार बटेरों को नष्ट किया गया और 600 बतखों को भी एहतियातन दफनाया गया।

इसके अलावा 17 हजार चूजे और 20 हजार अंडे नष्ट किए गए। हैचरी में रखी दवाइयों समेत करीब 13 लाख रुपए की सामग्री भी नष्ट कर दी गई। मंगलवार और बुधवार तक कुल 22,808 पक्षियों, 25,896 अंडों के साथ ही 79 क्विंटल दाने नष्ट किए जा चुके हैं।

चिकन और अंडा दुकानें बंद

बर्ड फ्लू की पुष्टि के बाद शहर में एहतियातन कड़े कदम उठाए गए हैं। दुकानदारों ने चिकन और अंडे की दुकानें बंद कर दी गई है, वहीं प्रशासन की टीम ने भी संबंधित दुकानों को बंद कराने की कार्रवाई की।

प्रशासन ने क्षेत्र को सर्विलांस में रखते हुए निर्देश जारी किए हैं कि किसी भी पक्षी की मौत होने पर तुरंत विभाग को सूचना दी जाए। कोनी स्थित कुक्कुट पालन केंद्र के एक किलोमीटर के दायरे में सभी पक्षियों को नष्ट कराया गया है।

इसके अलावा 1 से 10 किलोमीटर के दायरे में पक्षियों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्रशासन का दावा है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

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