
छत्तीसगढ़ में फिर लौटेगी कड़ाके की ठंड, रातें ठंडी होंगी:3 दिन 3 डिग्री तक गिरेगा रात का पारा,
By Dinesh chourasiya
छत्तीसगढ़ में मौसम फिलहाल ड्राई बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटों में न्यूनतम तापमान में कोई खास बदलाव नहीं होगा। हालांकि इसके बाद अगले तीन दिनों में रात के तापमान में 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है, जिससे रात में हल्की ठंड महसूस होने की संभावना है। वहीं, अगले पांच दिनों तक दिन के तापमान में किसी बड़े बदलाव के आसार नहीं हैं।
पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के एक-दो स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी दर्ज की गई। रायपुर समेत कई शहरों में दिन का तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है। बिलासपुर, अंबिकापुर और पेंड्रा रोड सहित कई शहरों में तापमान सामान्य से करीब 4 डिग्री सेल्सियस तक अधिक रिकॉर्ड किया गया।







बीते 24 घंटों में प्रदेश में सबसे अधिकतम तापमान 31.5 डिग्री सेल्सियस जगदलपुर में दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 12.6 डिग्री सेल्सियस दुर्ग में रिकॉर्ड हुआ।
बच्चों पर पड़ रहा ठंड का असर
कड़ाके की ठंड का असर बच्चों की सेहत पर भी पड़ रहा है। बीते एक महीने में रायपुर के अंबेडकर समेत निजी अस्पतालों में हाइपोथर्मिया के 400 से ज्यादा मामले सामने आ रहे थे। बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में जल्दी ठंडा होता है।




नवजातों की मांसपेशियां कम विकसित होती हैं, जिससे वे ठंड सहन नहीं कर पाते। वहीं, सीजेरियन डिलीवरी से जन्मे शिशुओं में हाइपोथर्मिया का खतरा और बढ़ जाता है।
क्या है हाइपोथर्मिया?
हाइपोथर्मिया एक लाइफ थ्रेटनिंग इमरजेंसी स्थिति है। इसमें शरीर का सामान्य तापमान 98.6 फॉरेनहाइट (37 डिग्री सेल्सियस) से नीचे चला जाता है। तापमान गिरने पर शरीर सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता और धीरे-धीरे उसके अहम अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है।
पीडियाट्रिशियन डॉ. आकाश लालवानी के अनुसार, ठंड के मौसम में शरीर हवा या पानी के संपर्क में आकर तेजी से अपनी गर्मी खो देता है। शरीर की लगभग 90 फीसदी गर्मी त्वचा और सांस के जरिए बाहर निकलती है। ठंडी हवा या नमी के संपर्क में आने पर यह प्रक्रिया और तेज हो जाती है।
अगर कोई व्यक्ति ठंडे पानी में है, तो उसका शरीर हवा की तुलना में 25 गुना तेजी से अपनी गर्मी खोता है, जिससे हाइपोथर्मिया का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में समय पर इलाज न मिले तो यह जानलेवा साबित हो सकता है।




