भिलाई में बीएसपी का निजीकरण और रिटेंशन-स्कीम, अनशन पर बैठे विधायक देवेंद्र यादव:बीएसपी प्रबंधन के खिलाफ 2 दिन अन्न त्यागा; आज अनशन का अंतिम दिन
By Dinesh chourasiya

भिलाई स्थित मैत्रीबाग का निजीकरण किया जाएगा। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) प्रबंधन द्वारा लिए इस निर्णय के खिलाफ विधायक देवेंद्र यादव दो दिनों के सत्याग्रह अनशन पर बैठ गए हैं।
शनिवार (20 दिसंबर) की सुबह से बैठे विधायक देवेंद्र पूरी रात सिविक सेंटर में बने पंडाल में ही रहे। उन्होंने कहा कि बीएसपी प्रबंधन के तुगलकी फरमान से हम जनता के छत को नहीं छिनने देंगे।







विधायक देवेंद्र यादव उपवास पर हैं और उनके साथ बड़ी संख्या में शहरवासी रातभर सिविक सेंटर में डटे रहें। सत्याग्रह स्थल पर पूर्व विधायक, महापौर, पूर्व महापौर, पार्षद और कई संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए।

निजीकरण समेत अन्य मुद्दों पर कर रहे सत्याग्रह
विधायक देवेंद्र यादव ने बीएसपी के निजीकरण, रिटेंशन स्कीम, न्यूनतम वेतन, टाउनशिप लीज, मैत्रीबाग और सेक्टर-9 अस्पताल के निजीकरण जैसे मुद्दों को लेकर यह आंदोलन शुरू किया है।




उन्होंने कहा कि यह सत्याग्रह सिर्फ कर्मचारियों के लिए नहीं, बल्कि पूरे भिलाई शहर और यहां के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए है। इसी कारण बीएसपी की ट्रेड यूनियनों के साथ-साथ सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि भी आंदोलन में शामिल हुए।

रिटेंशन स्कीम को खत्म करने का प्रयास
देवेंद्र यादव ने कहा कि बीएसपी प्रबंधन द्वारा रिटेंशन स्कीम को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है। ये तुगलकी फरमान है। सेक्टर-9 अस्पताल, मैत्रीबाग को निजीकरण करने का प्रयास किया जा रहा है। ये सारे महत्वपूर्ण विषय हैं। आम लोगों से जुड़े इन विषयों को लेकर हम दो दिनों के सत्याग्रह पर बैठे हुए हैं।
समस्याओं का हल नहीं कर पा रही डबल इंजन की सरकार
विधायक ने आगे कहा कि प्रदेश में बीजेपी की डबल इंजन सरकार के नेता समस्याओं का हल नहीं निकाल पा रहा है। हमने उनको कहा कि वो हमारे आंदोलन में शामिल हों या फिर वो आंदोलन करें हम उनके मंच पर जाएंगे।
बीएसपी मैनेजमेंट चाहती है कि बसाहट खत्म हो। हम लोगों के छत को नहीं छिनने नहीं देंगे। बीएसपी प्रबंधन और जिला प्रशासन को को इन सब मुद्दों पर स्थानीय निवासियों से बात करनी चाहिए।
कर्मचारियों की हो रही अनदेखी
विधायक देवेंद्र यादव ने कहा कि बीएसपी कर्मचारियों, अधिकारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों के अधिकारों की लगातार अनदेखी हो रही है। कर्मचारियों पर दबाव बढ़ रहा है और न्यूनतम वेतन जैसी बुनियादी मांगें भी पूरी नहीं हो रही हैं।
केंद्र सरकार की नीतियों के कारण सेल और बीएसपी प्रबंधन भी दबाव में है, जिसका असर सीधे कर्मचारियों और शहर की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।




