भिलाई जामुल अपहरण कांड में पुलिस कस्टडी से भागा बालात्कारी आरोपी, लापरवाही बरतने वाले तीन आरक्षक को एसएसपी ने किया लाइन अटैच
By Dinesh chourasiya

जामुल थाना क्षेत्र में तांत्रिक और बलात्कार का आरोपी पुलिस कस्टडी से 21 नवंबर को फरार हो गया था। दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए एक प्रधान आरक्षक और दो आरक्षक को लाइन अटैच कर दिया है। तीनों ही पुलिस कर्मी जामुल थाना में पदस्थ हैं। लाइन अटैच होने वाले पुलिसकर्मियों में प्रधान आरक्षक दिनेश कुमार, आरक्षक रत्नेश कुमार शुक्ला और आरक्षक चेतराम गुरूंग शामिल हैं।

आरोपियों के पीछे बस्तर तक गई थी पुलिस बताया जा रहा है कि तांत्रिक हेमंत अग्रवाल को पकड़ने के लिए पुलिस ने दो दिनों तक बस्तर, कोंडागांव, दंतेवाड़ा और रायपुर तक पीछा किया, लेकिन थाने पहुंचते ही वह तीन पुलिसकर्मियों को चकमा देकर भाग निकला। इस बड़ी लापरवाही पर एसएसपी ने तीनों आरक्षकों को लाइन अटैच कर दिया है।







भिलाई-3 थाने में विधिवत नहीं दी थी जानकारी बताया जा रहा है कि आरोपी हेमंत अग्रवाल को जामुल पुलिस ने भिलाई–3 थाने लाकर रखा था, लेकिन न तो यहां के स्टाफ को इसकी विधिवत जानकारी दी गई और न ही रोजनामचा में कोई प्रविष्टि दर्ज की गई। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उसे थाने के बाहर ही बैठा दिया था। इसी दौरान हेमंत मौका पाकर वहां से फरार हो गया। किसी भी तरह की लिखा-पढ़ी भी नहीं की गई थी। प्राथमिक जांच में तैनात पुलिस कर्मियों की लापरवाही सामने आने पर एसएसपी ने तीनों पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया।
मारपीट, अपहरण और दुष्कर्म के मामले में है आरोपी आरोपी हेमंत अग्रवाल पर भिलाई कुरुद की एक युवती का अपहरण, मारपीट और दुष्कर्म का आरोप है। 19 नवंबर की सुबह वह कुरुद इलाके से युवती को जबरन साथ ले गया था। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने जांच शुरू की और दो दिन तक लगातार पीछा करने के बाद शुक्रवार को आरोपी को पकड़ा गया था। इस दौरान पुलिस ने युवती को भी बरामद किया। कोर्ट में युवती का बयान दर्ज कराया गया, जिसके आधार पर आरोपी पर गंभीर धाराएं बढ़ाई गई थी। लेकिन आरोपी पुलिस कस्टडी से फरार हो गया था।
पीड़िता ने पुलिसकर्मियों पर लगाया था आरोपियों की मदद का आरोप बता दें कि इस पूरे मामले में पुलिस की कार्यशैली पर शुरू से ही सवाल खड़े हो रहे हैं। पीड़िता के अनुसार उसे जबरन उठाकर ले जाने के बाद भी उस पर अपहरण का मामला दर्ज नहीं किया गया। पुलिस उन्हें पति-पत्नी बताती रही, जबकि युवती और उसके परिजनों ने पुलिस को बार-बार बताया कि उसने जबरदस्ती शादी है। एसएसपी के हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने कार्यवाही शुरू की। लेकिन बाद में आरोपी पुलिस कस्टडी से भागने में कामयाब हो गया। पीड़िता ने पहले ही दो पुलिस कर्मियों पर आरोपी की मदद करने का आरोप लगाया था।








