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भिलाई में बीएसपी ठेका श्रमिक की मौत पर हंगामा:ठेकेदार ने बताया हार्ट अटैक, परिजनों कहा दुर्घटना से गई जान

By Dinesh chourasiya

मरचुरी के सामने बैठकर हंगामा करते परिजन - Dainik Bhaskar

स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल के भिलाई स्टील प्लांट में 25 अगस्त रविवार की सुबह एक ठेका मजदूर की मौत हो गई। ठेकेदार और मेन मेडिकल पोस्ट के डॉक्टरों ने मौत का कारण आर्ट अटैक बताया, लेकिन परिजनों ने कहा श्रमिक की मौत दुर्घटना से हुई है। उन्होंने मुआवजे की मांग को लेकर जमकर हंगामा किया। इसकी वजह से सोमवार को पीएम नहीं हो पाया।

परिवार वालों से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि राम नारायण चौधरी (59 साल) भिलाई इस्पात संयंत्र में ठेका कर्मचारी था। वो एएसटी पावर नाम की कंपनी के अंडर में काम कर रहा था। रविवार की सुबह ड्यूटी के दौरान वो अचानक बेहोश हो गया। उसे तुरंत मेन मेडिकल पोस्ट में इलाज के लिए ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने उसे ब्रॉड डेड घोषित कर दिया।

राम नारायण चौधरी

इसके बाद एएसटी पावर के एचआर मैनेजर टी सुधाकर और सुपरवाइजर सूरज कुमार के बीच परिजनों की बात हुई। उन्होंने परिजनों को ढाई लाख रुपए मुआवजा के रूप में दिया। इसके बाद सोमवार 26 अगस्त को रामनारायण का शव सेक्टर 9 हॉस्पिटल से परिजनो को सौप दिया गया। वहां से शव को वो लोग सुपेला अस्पताल पोस्ट मार्टम के लिए लेकर आए।

पुलिस वालों को घेरकर अपनी मांग रखते मोहल्ले के लोग

पोस्टमार्टम के दौरान पुलिस जब शव का पंचनामा कर रही थी तो परिजनों ने देखा की शव के पीठ और हाथ में जलने जैसा काला सा बड़ा निशान है। इस पर उन लोगों ने आरोप लगाया कि राम नारायण की मौत हार्ट अटैक से नहीं हुई, बल्कि काम के दौरान दुर्घटना से हुई है। परिजनो ने मामले की जांच और तीन सदस्यीय डॉक्टरों की टीम से पोस्ट मार्टम कराने की मांग को लेकर मरचुरी के सामने ही प्रदर्शन किया। यह विवाद सोमवार शाम तक चलता रहा और पोस्टमार्टम नहीं हो सका।

25 लाख रुपए और पढ़ाई के खर्च पर बनी सहमति

परिजनों ने पुलिस से मांग की कि यदि राम नारायण चौधरी की मौत एक्सीडेंट से हुई तो ठेका कंपनी उन्हें 25 लाख रुपए की एफडी और बेटी की बढ़ाई का पूरा खर्च उठाएगी। इसके बाद कंपनी के मैनेजर ने मांग को मानते हुए लिखकर दिया। अब सभी को पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने का इंतजार है कि मौत का कारण अटैक आता है या एक्सीडेंट। यदि मौत का कारण अटैक आता तो कंपनी परिजनों को समझौते के मुताबिक कोई रकम नहीं देगी।

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