Uncategorized

भिलाई में अंतिम दिन कथा सुनने आए भक्तों का लगा हूजूम रात 2 बजे से लाइन खड़े थे भक्त 

By Dinesh chourasiya

भिलाई में चल रही शिव महापुराण कथा का आज अंतिम दिन रहा। अंतिम दिन भी यहां अव्यवस्था देखने को मिली। यहां सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात बाउंसर, पुलिस कर्मियों और एलआईबी के लोगों ने भक्तों को कई घंटे तक लाइन में खड़ा रखा और पंडाल के अंदर नहीं जाने दिया। इससे लोगों में काफी रोष देखने को मिला।

आपको बता दें कि भिलाई सिविक सेंटर एरिया में भाजपा नेता दया सिंह के द्वारा शिव महापुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथाव्यास के रूप में अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा सिहोर वाले आए हैं। उनको सुनने के लिए हर दिन यहां हजारों की संख्या में भक्त पहुंच रहे हैं। इतनी बड़ी संख्या में भक्त आने के अनुमान के बाद भी आयोजक और पुलिस प्रशासन द्वारा सही तरीके से व्यवस्था नहीं की गई थी।

महिला पुरुषों की एक लाइन होने से लाइन हो गई काफी लंबी

सबसे बड़ी अव्यवस्था कथा के अंतिम दिन 31 जुलाई को देखने को मिली। अन्य दिनों में कथा सुबह 11 बजे से लेकर शाम को 4 बजे तक थी, लेकिन अंतिम दिन कथा का समय सुबह 8 से 11 बजे तक किया गया था। पंडाल में सामान्य लोगों के अलावा वीवीआईपी और वीआईपी लोगों के बैठने की व्यवस्था थी। इसके लिए लोगों को वीआईपी और वीवीआईपी पास अलग से दिए गए थे।

पंडाल में अधिक भीड़ ना हो इसके चलते भक्त रात दो बजे से वहां पहुंचना शुरू कर दिए थे। जब लोग अपना अपना पास लेकर वहां पहुंचे तो नंदी द्वार से तो उन्हें पास देखकर अंदर जाने दिया गया, लेकिन अंदर पंडाल से पहले गेट पर ही एलआईबी और स्थानी पुलिस सहित बाउंसरों की टीम खड़ी थी। उन्होंने सभी भक्तों को अंदर जाने से रोक दिया। भक्तों ने कहा भी की वो पहले आए हैं तो उन्हें अंदर बैठकर इंतजार करने दो, लेकिन उनकी किसी ने नहीं सुनी।

वीवीआईपी को दिखाती माहिला रात तीन बजे से लगी थी लाइन में

सभी भक्तों को रात दो बजे से लेकर साढ़े 5 बजे तक इसलिए रोका गया क्योंकि आयोजक के भाई ने यह निर्देश दिया था कि जबतक वो वहां ना आएं किसी को अंदर नहीं जाने दिया जाए। जब वो साढ़े पांच बजे वहां पहुंचे तो भक्तों को अंदर जाने दिया। इस दौरान आगे बैठने और जल्दी के चलते धक्का मुक्की भी देखने को मिली।

बुजुर्ग से लेकर बच्चे तक खड़े रहे लाइन में

आयोजक की मनमानी के चलते पंडित प्रदीप मिश्रा के भक्तों को तीन से चार घंटे लाइन में बेवजह खड़े रहना पड़ा। यहां खड़े लोगों से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि जब उनके पास पास है और वो इसीलिए इतना पहले आए हैं कि पंडाल में आगे बैठने मिलेगा तो उन्हें अंदर क्यों नहीं जाने दिया गया। खड़े रहने से अच्छा पंडाल के अंदर बैठकर पंडित जी का इंतजार करना होता। आयोजक की मनमानी के चलते बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ा।

महिला पुरुषों की नहीं बनाई अलग-अलग लाइन

लाइन में खड़े भक्तों का कहना था कि पुलिस के जवानों को चाहिए था कि पहले तो वो लाइन नहीं लगाते और अगल लगवाए भी तो महिला और पुरुषों की अलग-अलग लाइन बनवाते। यहां एक ही लाइन बनाकर उसमें महिला, बच्चे, बुजुर्ग, युवती, युवकों और पुरुषों को खड़ा खड़ा करा दिया गया। लाइन लंबी होने से पूरे समय लोग एक दूसरे को धक्का मारते रहे। जब वो पंडाल के अंदर गए तो राहत की सांस ली।

Related Articles

Back to top button