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ऊँ नमः शिवाय से गूंज रहे छत्तीसगढ़ के शिवालय; इस बार कई दुर्लभ संयोग

By Dinesh chourasiya

छत्तीसगढ़ में भी महा शिवरात्रि का पर्व पूरी श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया जा रहा है। अलग-अलग जिलों में सुबह से ही शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ी है। ऊँ नमः शिवाय से मंदिर गूंज रहे हैं। रायपुर, दुर्ग, गरियाबंद, बिलासपुर, सरगुजा समेत सभी जिलों में भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए मंदिरों में लंबी कतार लगी है।

महा शिवरात्रि पर इस बार कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। महा शिवरात्रि के दिन चतुर्दशी तिथि के साथ त्रयोदशी भी है। इसलिए शुभ मुहूर्त में पूजन करने से भक्तों पर भगवान शिव की विशेष कृपा होगी। महा शिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा करने का भी विधान है।

दुर्ग के शिवालय में भगवान भोलेनाथ की विशेष पूजा-अर्चना।

दुर्ग में शिवालयों में लगी भक्तों की भीड़

दुर्ग में शिवनाथ नदी तट के शिवालयों में सुबह 4 बजे से श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। शिवालयों में पंचाक्षरी मंत्र, महामृत्युंजय जाप और हर-हर महादेव के जयकारे के साथ शंख और घंटे की गूंज से शहर में माहौल भक्तिमय हो गया है।

दुर्ग में शिवनाथ नदी तट के शिवालयों में सुबह 4 बजे से श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया।

गरियाबंद के भूतेश्वर नाथ महादेव मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना

गरियाबंद में स्थित विश्व के सबसे विशालतम शिवलिंग भूतेश्वर नाथ महादेव में आज पूजा-अर्चना के लिए सुबह से भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है। ये पहला मौका होगा जब गरियाबंद से भूतेश्वरनाथ तक उज्जैन की तर्ज पर बाबा की शाही पालकी निकलेगी।

भगवान की बारात भी निकाली जाएगी। युवाओं की टोली भूत-पिशाच की पोशाक पहन उसी दृश्य को जीवंत करेगी। मान्यता है कि जब भगवान भोलेनाथ की शादी हुई थी, तो भूत-पिशाच उनकी ओर से बाराती बनकर माता पार्वती को लाने गए थे।

गरियाबंद का भूतेश्वर नाथ महादेव मंदिर।

कवर्धा के प्राचीन भोरमदेव मंदिर में भी जलाभिषेक

छत्तीसगढ़ के खजुराहो के नाम से प्रसिद्ध प्राचीन भोरमदेव मंदिर में महा शिवरात्रि के मौके पर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने भक्त सुबह से पहुंच रहे हैं। भोरमदेव मंदिर के पुजारी आशीष पाठक ने बताया कि भोरमदेव मंदिर ट्रस्ट ने 51 किलो लड्डू का भोग चढ़ाया है, साथ ही जिस तरह से भगवान भोलेनाथ का उनके विवाह के दिन श्रृंगार हुआ था, उसी तरह आज भी उन्हें सजाया गया है।

इस बार महा शिवरात्रि पर ग्रह 5 राशियों में होंगे। चंद्र और मंगल एक साथ मकर राशि में होंगे। यह संयोग लक्ष्मी नामक योग बना रहा है। चंद्र और गुरु के प्रबल होने से शुभ स्थितियां बन रही हैं। आज शुक्र प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि भी मनाई जा रही है।

महा शिवरात्रि पर 4 प्रहर के पूजन का शुभ मुहूर्त

  • प्रथम प्रहर पूजन मुहूर्त- 8 मार्च को रात में 6 बजकर 25 मिनट से 9 बजकर 28 मिनट तक।
  • द्वितीय प्रहर पूजन मुहूर्त- 8 मार्च को रात में 9 बजकर 28 मिनट से 12 बजकर 31 मिनट तक।
  • तृतीय प्रहर पूजन मुहूर्त- रात में 12 बजकर 31 मिनट से 3 बजकर 34 मिनट तक (8-9 मार्च मध्यरात्रि)।
  • चतुर्थ प्रहर पूजन मुहूर्त- मध्य रात्रि 3 बजकर 34 मिनट से अगले दिन सुबह 6 बजकर 37 मिनट तक।
  • महा शिवरात्रि पारण मुहूर्त- अगले दिन 9 मार्च को सुबह 6 बजकर 38 मिनट से 6 बजकर 17 मिनट तक।
  • निशीथ काल पूजन मुहूर्त- मध्यरात्रि 12 बजकर 7 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक।

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