CG हाईकोर्ट बोला- अनुकंपा नियुक्ति उपहार या विरासत की संपत्ति नहीं:कहा- बहू रखे सास का ख्याल, नहीं तो जाएगी नौकरी, पति के जगह मिली पुलिस की अनुकंपा नियुक्ति
By Dinesh chourasiya
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पारिवारिक दायित्व पर अहम फैसला सुनाया है। मामले में जस्टिस एके प्रसाद ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति कोई व्यक्तिगत उपहार या विरासत में मिली संपत्ति नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार को आर्थिक संकट से उबारने के लिए दी जाने वाली सहायता है।







इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने बहू को चेतावनी दी है कि अगर उसने अपनी आश्रित सास का भरण-पोषण नहीं किया तो उसकी नियुक्ति रद्द कर दी जाएगी। मामला अनुकंपा नियुक्ति और सास के भरण-पोषण जुड़ा है।

पति और बेटे की मौत से टूटा सहारा




दरअसल, अंबिकापुर की रहने वाली ज्ञांती तिवारी पति और बेटे की मौत के बाद दाने-दाने को मोहताज हो गई। पति घनश्याम तिवारी पुलिस विभाग में कॉन्स्टेबल थे। 2001 में उनकी मौत हो गई।
इसके बाद बेटे अविनाश तिवारी को अनुकंपा नियुक्ति मिली, जिससे मां को सहारा मिला। इस बीच अविनाश की शादी नेहा तिवारी से हुई और दिसंबर 2021 में अविनाश की भी मौत हो गई।
अनुकंपा नियुक्ति मिलते ही बहू का बदला व्यवहार
अविनाश की जगह उसकी पत्नी नेहा को अनुकंपा नियुक्ति मिली, लेकिन इसके बाद उसका सास के प्रति व्यवहार बदल गया। उसने सास के साथ दुर्व्यवहार करना शुरू कर दिया और उनका भरण-पोषण करने से भी इनकार कर दिया। इसके चलते अविनाश की मां तंगहाली में जीवन गुजारने को मजबूर हो गईं।
सास की सेवा करने की शर्त पर मिली अनुकंपा नियुक्ति
बहू के व्यवहार से परेशान होकर ज्ञांती तिवारी ने हाईकोर्ट की शरण ली। याचिका में उन्होंने बताया कि राज्य शासन ने बेटे की मौत के बाद बहू नेहा तिवारी को इस शर्त पर अनुकंपा नियुक्ति दी कि वह अपनी सास का पूरा ख्याल रखेगी।
याचिकाकर्ता महिला का आरोप है कि उसकी बहू उसके साथ गैर महिला की तरह बर्ताव करती है।
नियुक्ति रद्द करने और बेटी को नौकरी देने की मांग
याचिका में मांग की गई कि बहू नेहा तिवारी को 8 मार्च 2022 को जारी नियुक्ति आदेश को निरस्त किया जाए। हाईकोर्ट बहू की जगह उनकी अविवाहित बेटी प्रीति तिवारी को अनुकंपा नियुक्ति देने पर विचार करने के निर्देश जारी करे।
बताया कि बहू को इस शर्त और शपथ-पत्र के आधार पर नौकरी दी गई थी कि वह अपनी सास की पूरी देखभाल और भरण-पोषण करेगी, लेकिन नियुक्ति मिलते ही बहू ने उन्हें बेसहारा छोड़ दिया है।
हाईकोर्ट बोला- दायित्वों से मुंह नहीं मोड़ सकती बहू
इस मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि बहू ने नियुक्ति के समय शपथ-पत्र दिया था कि वह सास की देखभाल करेगी। कहा कि अनुकंपा नियुक्ति मृतक के पूरे परिवार को सुरक्षा देने के लिए है।
क्योंकि बहू ने अपने पति की जगह नौकरी पाई है, इसलिए उस पर वही कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी लागू होती है, जो उसके पति पर अपनी मां के प्रति थी। सरकार की नीति के अनुसार यदि कोई कर्मचारी अपने आश्रितों के भरण-पोषण के वादे से मुकरता है, तो उसकी सेवा समाप्त की जा सकती है।




