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दुर्ग के 45 गांवो में शादी-सगाई, छठी, मृत्यु भोज में डिस्पोजल का उपयोग बंद 45 गांवों का फैसला, प्लास्टिक मुक्त होना लक्ष्य; बर्तन बैंक से लिए जाएंगे सामान

By Dinesh chourasiya

दुर्ग जिले के 45 गांवों की ग्राम सभाओं ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब गांवों में शादी, सगाई, छठी, मृत्यु भोज और अन्य सामूहिक आयोजनों में डिस्पोजल थाली, कटोरी, गिलास और चम्मच का उपयोग पूरी तरह बंद होगा। इसके बजाय, गांव के बर्तन बैंक से बर्तनों का उपयोग किया जाएगा।

ग्राम सभा के इस फैसले से अधिकांश ग्रामीण सहमत हैं। यदि कोई परिस्थिति का हवाला देकर नियम तोड़ने की कोशिश करता है, तो पहले उसे समझाइश दी जाएगी। फिर भी नहीं मानने पर जुर्माना वसूला जाएगा।

डिस्पोजल की जगह गांव के बर्तन बैंक से बर्तनों का उपयोग किया जाएगा।

जिला प्रशासन का प्लास्टिक मुक्त अभियान जोरों पर

जिला प्रशासन का गांवों को प्लास्टिक मुक्त बनाने का अभियान तेजी पकड़ रहा है। जिले के 300 गांवों में से 45 में बर्तन बैंक स्थापित हो चुके हैं। जिला पंचायत के सीईओ बजरंग दुबे के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे जागरूकता अभियान का ही नतीजा है कि ग्रामीण अब डिस्पोजल सामग्री का उपयोग छोड़ रहे हैं।

इस अभियान में महिला स्व-सहायता समूहों की भूमिका अहम है, जो प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के बारे में ग्रामीणों को जागरूक कर रही हैं।

स्वच्छ भारत मिशन के तहत बर्तन बैंक की शुरुआत

सीईओ बजरंग दुबे ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत सामाजिक और पारिवारिक आयोजनों में डिस्पोजल सामग्री पर प्रतिबंध लगाने और हर गांव में बर्तन बैंक स्थापित करने का अभियान चल रहा है। अब तक 45 गांवों में बर्तन बैंक शुरू हो चुके हैं। दुर्ग, धमधा और पाटन जनपद पंचायतों में हर महीने 10 से 15 नए गांवों में बर्तन बैंक खोलने का लक्ष्य है।

उदाहरण के तौर पर, ग्राम पचपेड़ी में जागृति महिला स्व-सहायता समूह ने बर्तन बैंक शुरू किया है। समूह ने 7,000 रुपए में 100 थालियां और 50 गिलास खरीदकर शुरुआत की। समूह की अध्यक्ष मनीषा चंद्राकर, लक्ष्मी चंद्राकर और शांता चंद्राकर ने बताया कि गांव में सिल्वर पत्तल, डिस्पोजल गिलास, कटोरी और चम्मच का उपयोग काफी कम हो गया है।

इन गांवों में शुरू हो चुके हैं बर्तन बैंक

जनपद पंचायत दुर्ग के रिसामा, उमरपोटी, मंचादुर, गनियारी, मोहलाई, खुरसुल, डुमरडीह, पाउवारा, पुरई, बोरीगारका, सिलोदा (खपरी), खेदामारा, अरसनारा, भानपुरी, मालुद (बेलौदी), कोनारी, रसमड़ा, थनौद, खोपली, नगपुरा, चिखली, हनोदा, मतवारी, अंजोरा (ख), आलबरस, करगाडीह, निकुम, ढौर और पिसेगांव; जनपद पंचायत धमधा के तरकोरी, नवागांव (पु); और जनपद पंचायत पाटन के अरसनारा, आंधी, बेलौदी, बोरेन्दा, दरबारमोखली, ढौर, करसा, कौही, खर्रा, कुम्हली, पचपेड़ी, पतोरा, सेलूद और तर्रा में बर्तन बैंक स्थापित हो चुके हैं।

बेलौदी प्लास्टिक मुक्त मॉडल गांव की ओर अग्रसर

पाटन ब्लॉक के ग्राम बेलौदी के सरपंच हुकुमचंद निषाद अपने गांव को प्लास्टिक मुक्त बनाने में जुटे हैं। गांव में सिल्वर पत्तल, डिस्पोजल गिलास और कटोरी के उपयोग पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। आयोजनों में असुविधा न हो, इसलिए हुकुमचंद ने अपने निजी खर्चे से 100 थालियां और 100 गिलास खरीदकर बर्तन बैंक शुरू किया है।

इसका संचालन नव दुर्गा स्व-सहायता समूह की महिलाओं को सौंपा गया है। इसके अलावा, कचरे के समुचित निपटान के लिए गांव के 350 घरों में 25,000 रुपए की लागत से डस्टबिन बांटे गए हैं। साथ ही, 35,000 रुपए की लागत से बर्तन खरीदे गए। अब ग्रामीणों को सूखा और गीला कचरा अलग-अलग एकत्र करना होगा।

जागरूकता के बाद जुर्माने की तैयारी

सरपंच हुकुमचंद ने बताया कि अभी ग्रामीणों से सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग बंद करने का आग्रह किया जा रहा है। प्लास्टिक कचरे की सफाई और निपटान के बारे में समझाया जा रहा है। अगले छह महीनों तक जागरूकता अभियान चलेगा। इसके बाद भी नियम न मानने वालों पर ग्राम सभा में जुर्माने का प्रस्ताव लाया जाएगा। गांव में बदलाव दिख रहा है, और अब खुले में प्लास्टिक कचरा बिखरा नहीं दिखता।

कलेक्टर की पहल, मॉडल गांव का सपना

कलेक्टर अभिजीत सिंह की पहल और सीईओ बजरंग दुबे के मार्गदर्शन में बेलौदी को मॉडल गांव के रूप में विकसित किया जा रहा है। पहला लक्ष्य इसे प्लास्टिक मुक्त बनाना है। ग्रामीणों को सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक किया जा रहा है। यह अभियान जन आंदोलन का रूप ले रहा है, और ग्रामीणों का समर्थन इसे सफल बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है।

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