
14 मई को एक ओर जहां पूरी दुनिया मदर्स डे मना रही थी, वहीं भिलाई की एक गर्भवती महिला दर्द से कराहते हुए लाल बहादुर शास्त्री से जिला अस्पताल दुर्ग से चंदूलाल चंद्राकार तक भटकती रही मगर नहीं मिला इलाज कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद जिला अस्पताल में कराया गया सुरक्षित प्रसव
By Dinesh chourasiya
14 मई को एक ओर जहां पूरी दुनिया मदर्स डे मना रही थी, वहीं भिलाई की एक गर्भवती महिला दर्द से कराहते हुए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटक रही थी। माधुरी नाम की इस महिला को प्रसव का दर्द हो रहा था। पहले वह सुपेला शास्त्री अस्पताल पहुंची, जहां से उसे जिला अस्पताल भेज दिया गया। जिला अस्पताल से संडे को डॉक्टर नहीं आने की बात कहते हुए उसे लौटा दिया गया।
बाद में जब वह चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज पहुंची, तो वहां भी उसका इलाज नहीं किया गया। पति का आरोप है कि वह उसकी पत्नी को लेकर इलाज के लिए पूरे दिन इधर से उधर भटकता रहा। बाद में कलेक्टर पुष्पेंद्र मीणा के हस्तक्षेप के बाद जिला अस्पताल में सुरक्षित प्रसव कराया गया।







बेहतर लेबर रूम व बेस्ट सीजेरियन ओटी के लिए “लक्ष्य” प्रमाण-पत्र हासिल करने वाले जिला अस्पताल में संडे को यह हाल है। शनिवार यानी 13 मई की रात करीब 11 बजे जिला अस्पताल पहुंची खुर्सीपार निवासी गर्भवती माधुरी को सुपेला अस्पताल से रेफर होने के बाद भी लौटा दिया। अगले दिन रविवार को सुबह 11 बजे माधुरी सीएम मेडिकल कॉलेज पहुंची। जहां से जिला अस्पताल भेजा गया। वहां शाम 7 बजे माधुरी ने बेटी को जन्म दिया।
सब अस्पतालों का एक ही जवाब था- डॉक्टर नहीं है
शनिवार- 09:35 बजे- शास्त्री अस्पताल, सुपेला- स्टॉफ ने कहा रात में डॉक्टर नहीं रहते। शनिवार- 11:47 बजे- जिला अस्पताल, दुर्ग- स्टॉफ ने कहा संडे को डॉक्टर नहीं मिलेंगे। रविवार- 12:15 बजे- सीएम मेडिकल कॉलेज, कचांदुर- स्टॉफ ने कहा बेहोशी के डॉक्टर नहीं। रविवार- 05:30 बजे- जिला अस्पताल, दुर्ग- स्टॉफ ने कहा वेट करिए, सीजर के लिए लेंगे।




हर 1000 पर 43 बच्चों की डेथ, फिर भी लापरवाही
दुर्ग जिले में शून्य से लेकर पांच वर्ष तक के हर 1000 बच्चों में 43 बच्चों की डेथ होने के बाद भी लापरवाही कायम हैं। चाइल्ड डेथ का यह आंकड़ा देश के आंकड़े 27 प्रति 1000 से 16 ज्यादा होने के बाद भी सुधार नहीं है। मदर्स डेथ के मामले में भी दुर्ग के आंकड़े दूसरों से ज्यादा हैं। जच्चा-बच्चा की सेहत संबंधी सभी आंकड़े भयावह हैं, फिर भी हालत जस की तस है।
“जिला अस्पताल ही नहीं जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में 24 घंटे सातों दिन डॉक्टरों की उपस्थिति रहती है। किस कर्मचारी ने कहा कि संडे को डॉक्टर नहीं मिलते हैं। ऐसी गलत जानकारी देने वाले कर्मचारी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। नियमित रूप से अस्पतालों में जांच भी की जाती है। जानकारी ली जाएगी।”
डॉ. जेपी मेश्राम, सीएमएचओ दुर्ग







