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रायपुर जिला उपभोक्ता आयोग का फैसला:एसबीआई लॉकर से जेवर चोरी, बैंक को 22.36 लाख मुआवजा देने का आदेश

By Dinesh chourasiya

एसबीआई लॉकर से जेवर चोरी के मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने बैंक की सुरक्षा में चूक मानी है। आयोग ने पीड़ित दंपती को जेवरों की कीमत 21,71,328 रुपए, मानसिक-शारीरिक क्षति के 50 हजार और वाद खर्च के 15 हजार रुपए देने का आदेश दिया। अतिरिक्त पीठ के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू और सदस्य डॉ. आनंद वर्गीस ने 2 नवंबर 2026 को फैसला सुनाया।

सड्डू के शिवाजी पार्क निवासी अंजू और सुनील मिश्रा की शिकायत आंशिक रूप से स्वीकार हुई। दंपती ने जेवरों की सूची, खरीदी के 62 बिल और आभूषण पहने तीन तस्वीरें पेश की थीं। आयोग ने चोरी के समय का मूल्य उचित माना। मुआवजा नहीं देना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना गया।

यह है पूरा मामला : दंपती ने 27 अप्रैल 2013 को बैंक से संयुक्त रूप से लॉकर नंबर 8 लिया था। इसके लिए सालाना 764 रुपए किराया तय था। फैसले के अनुसार, 24 और 25 नवंबर 2017 की दरमियानी रात चोरों ने बैंक में घुसकर गैस कटर से लॉकर काटे थे। दंपती के लॉकर में रखे सोने-चांदी के आभूषण और जमीन के मूल दस्तावेज भी चोरी हो गए। 27 नवंबर को सुबह शाखा खुलने पर घटना का पता चला। सीसीटीवी के कनेक्शन भी काट दिए गए थे।

शाखा दूसरी जगह स्थानांतरित, लेकिन सूचना ही नहीं दी

आयोग ने पाया कि बैंक की शाखा लॉकर सहित दूसरी जगह पर स्थानांतरित की गई थी, लेकिन दंपती को फोन, संदेश या पंजीकृत पत्र से इसकी सूचना नहीं दी गई। सुरक्षा व्यवस्था की जांच में आयोग ने माना कि अवकाश के दौरान बैंक ने सुरक्षा के पर्याप्त उपाय नहीं किए। अवकाश के दौरान पुलिस से सुरक्षा उपलब्ध कराने के संबंध में भी कार्रवाई नहीं की गई थी।

शर्तों का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते

बैंक ने लॉकर समझौते का हवाला देकर सामान की सुरक्षा और नुकसान की जिम्मेदारी लेने से इनकार किया। आयोग ने दलील खारिज करते हुए कहा कि समझौते में चोरों द्वारा लॉकर तोड़कर चोरी का उल्लेख नहीं है। बैंक केवल करार की शर्तों के आधार पर जिम्मेदारी से नहीं बच सकता50

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