CG में बच्चे को लगाया एक्सपायरी इंजेक्शन, सिद्धार्थ हॉस्पिटल की फार्मेसी सील:जांच में मिले थे एक्सपार्ड इंजेक्शन वायल, कलेक्टर बोले- रिपोर्ट मिलने के बाद होगी कार्यवाही
By Dinesh chourasiya
अंबिकापुर के सिद्धार्थ हॉस्पिटल में एडमिट बच्चे को एक्सपायरी इंजेक्शन लगाने के मामले में प्रशासन ने फार्मेसी को 15 दिनों के लिए सील कर दिया है। बच्चे के पिता ने कलेक्टर से इसकी शिकायत कर जांच की मांग की थी। जांच के दौरान अस्पताल के फार्मेसी में उसी बैच के 3 एक्सपायरी इंजेक्शन वायल मिले, जिसे बच्चे को लगाया गया था।







जानकारी के मुताबिक, सरगुजा जिले के नगर पंचायत लखनपुर निवासी शम्स खान ने सिद्धार्थ हॉस्पिटल में एडमिट बेटे उमैर खान (3.6 साल) को एक्सपायर्ड इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाया था। शिकायत के अनुसार, 6 सितंबर 2026 को उमैर खान को सिद्धार्थ हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था।
डॉक्टर वैभव जायसवाल के लिखे पर्ची के आधार पर बच्चे को Amikacin 250mg इंजेक्शन लगाया गया। अगले दिन 7 सितंबर 2026 को इंजेक्शन की शीशी की जांच करने पर बैच नंबर L-24E-5B, निर्माण तारीख 05-2024 और एक्सपायरी तिथि 04-2026 लिखा मिला।





एक्सपायरी इंजेक्शन मिलने पर कार्रवाई
कलेक्टर अजीत वसंत ने शिकायत मिलने पर तत्काल एक्शन लेते हुए सरगुजा सीएमएचओ डॉ. पीएस मार्को को शिकायत की जांच कराने के निर्देश दिए। सीएमएचओ के निर्देश पर नर्सिंग होम एक्ट के नोडल आफिसर डॉ पीके सिन्हा, ड्रग इंस्पेक्टर अनिल पैकरा की टीम हॉस्पिटल में पहुंची।

टीम ने फार्मेसी में दवाओं की जांच की तो फार्मेसी में उसी बैच के तीन एक्सपायर्ड इंजेक्शन के वायल मिले, जिसे बच्चे को लगाया गया था। इंजेक्शन का बैच नंबर भी समान पाया गया।
मामले में कार्रवाई करते हुए ड्रग इंस्पेक्टर अनिल पैकरा ने हॉस्पिटल की फार्मेसी को सील कर दिया है। फार्मेसी संचालक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। जवाब मिलने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
लापरवाही के कारण लगा एक्सपायर्ड इंजेक्शन
बच्चे को एक्सपायर्ड इंजेक्शन लगने के मामले में कई स्तर पर लापरवाही हुई। डॉक्टर ने इंजेक्शन के लिए लिखा तो शम्स खान ने फार्मेसी से दवाएं खरीदीं। फार्मासिस्ट ने या तो जानबूझकर या लापरवाही में एक्सपायर्ड इंजेक्शन का वायल दे दिया।
बच्चे के पिता ने भी इंजेक्शन की एक्सपायरी डेट चेक नहीं की। इंजेक्शन लगाने वाले डॉक्टर या नर्स ने इंजेक्शन लगाने के पहले दवा की एक्सपायरी डेट चेक नहीं की। माना जा रहा है कि यह चूक कम से कम तीन स्तर पर पकड़ी जा सकती थी, लेकिन पकड़ी नहीं जा सकी और बच्चे को एक्सपार्ड इंजेक्शन लग गया।




