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रायपुर में E-20 पेट्रोल डालने से इंजन खराब:कंज्यूमर कोर्ट ने मारुति सुजुकी को दोषी ठहराया, कहा- नई कार दो या 20.5 लाख पूरे लौटाओ

By Dinesh chourasiya

देशभर में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E20 यानी 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण) को लेकर काफी चर्चा हो रही है। इस बीच रायपुर में ई-20 ईंधन डालने से इंजन खराब हो गया है। जिसे लेकर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (कंज्यूमर कोर्ट) ने बड़ा फैसला सुनाया है।

कोर्ट ने E20 ईंधन के कारण कार में लगातार आई तकनीकी खराबी के मामले में मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड और उसके अधिकृत डीलर को जिम्मेदार ठहराया है। कोर्ट ने माना कि, गाड़ी का इंजन E20 फ्यूल के हिसाब से नहीं था, जबकि फिर भी कार कस्टमर को बेची गई।

आयोग ने कंपनी को 45 दिनों के भीतर ग्राहक को उसी मॉडल की नई E20 कार उपलब्ध कराने या फिर वाहन की पूरी कीमत 20.5 लाख रुपए लौटाने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा मानसिक प्रताड़ना, मुकदमे का खर्च और ब्याज भी देना होगा। इस तरह का यह देश का पहला केस है।

जानिए क्या है पूरा मामला ?

जानकारी के मुताबिक, किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रेमराज देबता ने 3 जून 2024 को मारुति की एसयूवी कार खरीदी थी। करीब 5 महीने बाद 11 नवंबर को पहली बार कार में तकनीकी खराबी आई। गाड़ी बार-बार बंद होने लगी। वर्कशॉप में कंपनी ने इसे मिलावटी पेट्रोल का मामला बताते हुए टंकी साफ कर वाहन वापस कर दिया।

पांच बार वर्कशॉप पहुंची कार, हर बार नई समस्या

पहली मरम्मत के बाद भी परेशानी खत्म नहीं हुई। दूसरी बार जांच में टंकी से सफेद जैली जैसा तरल पदार्थ निकला। कंपनी ने माना कि पहली बार टंकी पूरी तरह साफ नहीं हुई थी और केमिकलयुक्त ईंधन अंदर रह गया था। इसके बाद दोबारा सफाई की गई, लेकिन तीसरी बार फ्यूल टैंक, पाइपलाइन और फिल्टर में फिर सफेद परत और तरल पदार्थ मिला।

चौथी बार डैशबोर्ड पर इंजन मालफंक्शन की चेतावनी आई और ईवी मोड ने काम करना बंद कर दिया। पांचवीं बार इंजन पूरी तरह ठप हो गया और कार चलने लायक नहीं बची। इसके बाद मामला कंज्यूमर कोर्ट पहुंचा।

सरकारी लैब की रिपोर्ट बनी सबसे बड़ा सबूत और परिवादी के पक्ष में आया फैसला।
सरकारी लैब की रिपोर्ट बनी सबसे बड़ा सबूत और परिवादी के पक्ष में आया फैसला।

 

सरकारी लैब की रिपोर्ट बनी सबसे बड़ा सबूत

विवाद के दौरान पेट्रोल के नमूनों की जांच स्वतंत्र सरकारी मान्यता प्राप्त एसजीएस लैब में कराई गई। रिपोर्ट में ईंधन में इथेनॉल की मौजूदगी की पुष्टि हुई। जांच में पाया गया कि पेट्रोल के निचले हिस्से में सफेद परत के रूप में ईथेनॉल अलग होकर जमा था।

रिपोर्ट के अनुसार ईंधन E20 श्रेणी का था, लेकिन ईथेनॉल के अलग होने से उसकी प्रभावी मात्रा केवल 6 से 7 प्रतिशत रह गई थी। आयोग ने माना कि वाहन का इंजन E20 ईंधन के अनुरूप नहीं था, फिर भी उपभोक्ता को ऐसी कार बेची गई। इसे सेवा में कमी और उपभोक्ता के साथ अनुचित व्यापारिक व्यवहार माना गया।

उपभोक्ता फोरम ने आदेश जारी किया है।

नई कार नहीं दी तो पूरी राशि लौटानी होगी

आयोग ने आदेश दिया है कि यदि कंपनी 45 दिनों के भीतर नई E20 अनुकूल कार उपलब्ध नहीं कराती है, तो उसे वाहन की कीमत 20.5 लाख रुपए, आरटीओ पंजीकरण, बीमा और बाकी खर्चों सहित पूरी राशि लौटानी होगी।

इसके अलावा आदेश की तिथि से भुगतान तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज, मानसिक प्रताड़ना के लिए 1 लाख रुपए और वाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपए भी अदा करने होंगे।

अब पढ़िए एक्सपर्ट ने क्या कहा ?

ऑटो विशेषज्ञ के. महेश कुमार के अनुसार, इथेनॉल गन्ने से तैयार होता है। यदि उसमें नमी हो तो वह पेट्रोल में सामान रूप से नहीं घुल पाता, क्योंकि दोनों की डेंसिटी अलग होती है। इससे फ्यूल पंप और फ्यूल सिस्टम के बाकी हिस्सों पर असर पड़ सकता है। हालांकि हर मामले में केवल इथेनॉल को इंजन खराब होने की वजह मानना तकनीकी रूप से उचित नहीं होगा।

उनका कहना है कि भारत में अभी भी कई वाहन पूरी तरह E20 ईंधन के अनुरूप विकसित नहीं हुए हैं। जिस तरह से पेट्रोल में बदलाव हो रहा है, उस तरह से गाड़ियों को भी अपडेट करने की आवश्यकता है।

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