
कृषि विज्ञान केन्द्र बालोद में एक दिवसीय जिला स्तरीय प्राकृतिक एवं जैविक कृषि कार्यशाला संपन्न
क्राइम रिपोर्टर रितेश कुमार की खबर








रितेश कुमार क्राइम रिपोर्टर (पत्रकार)
बालोद, 18 जून 2026
राष्ट्रीय स्तर पर संचालित “खेत बचाओ अभियान” अंतर्गत तथा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल के 12वें वर्ष के अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र बालोद में ’’प्राकृतिक एवं जैविक कृषि’’ विषय पर एक दिवसीय जिलास्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन तथा छत्तीसगढ़ महतारी एवं भगवान बलराम की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया गया। कार्यक्रम में कृषि विभाग के विभिन्न विभागों तथा कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा स्टॉल प्रदर्शनी लगाई गई। जिसमें किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों, प्राकृतिक एवं जैविक खेती से संबंधित विभिन्न अवयव, आधुनिक कृषि उपकरणों तथा विभिन्न योजनाओं की जानकारी प्रदान की गई।





कार्यक्रम के प्रारंभ में कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख डॉ. के. आर. साहू ने प्राकृतिक एवं जैविक कृषि तथा केंद्र में संचालित विभिन्न वैज्ञानिक गतिविधियों से अवगत कराया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित दुर्ग के अध्यक्ष श्री प्रीतपाल बेलचंदन, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती तारणी पुष्पेन्द्र चंद्राकर, उपाध्यक्ष श्री तोमन साहू, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक दुर्ग के उपाध्यक्ष श्री श्री नरेश यदु, कृषि स्थायी समिति के सभापति श्री तेजराम साहू, जनपद पंचायत बालोद की अध्यक्ष श्रीमती सरस्वती टेमरिया, जनपद पंचायत गुरूर के उपाध्यक्ष श्री दुर्गानंद साहू सहित पूर्व विधायक श्री विरेन्द्र साहू, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि श्री राकेश यादव, श्री चेमन देशमुख, श्री पवन साहू, श्री कृष्णकांत पवार, श्री सुरेन्द्र देशमुख, श्री पुष्पेन्द्र तिवारी, श्री प्रेम साहू, श्री कमलेश राजपूत, श्री दिनेश साहू, श्री पवन सोनबरसा एवं श्री आनंद प्रकाश मिरी आदि उपस्थित थे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित दुर्ग के अध्यक्ष श्री प्रीतपाल बेलचंदन ने प्राकृतिक खेती के महत्व को बताते हुए किसान भाईयों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। इस दौरान सभी अतिथियों ने प्राकृतिक एवं जैविक खेती करने हेतु प्रोत्साहित किया और उसके महत्व के संबंध में जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि प्राकृतिक एवं जैविक खेती से प्राप्त उत्पादों का बाजार मूल्य सामान्य उत्पादों की अपेक्षा दो से तीन गुना अधिक प्राप्त होता है। वक्ताओं ने कहा कि मिट्टी हमारी मां के समान है तथा यदि हम उसकी रक्षा और सम्मान करेंगे तो वह हमें उत्तम उत्पादन के रूप में फल अवश्य देगी। कार्यक्रम में प्रीतपाल बेलचंदन एवं श्री नरेश यदु ने बताया कि जिले की 144 समितियों से जुड़े एक लाख से अधिक किसानों के माध्यम से इस अभियान को सफल बनाया जा सकता है

तथा प्रत्येक समिति द्वारा 100-100 एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक एवं जैविक खेती का लक्ष्य निर्धारित किया जाना चाहिए। वरिष्ठ जनप्रतिनिधि श्री पवन साहू ने किसानों से कम से कम 50-50 डिसमिल क्षेत्र में प्राकृतिक खेती अपनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया। श्री चेमन देशमुख ने कहा कि वर्तमान समय में रासायनिक खेती से उत्पन्न कई उत्पाद स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिद्ध हो रहे हैं,
इसलिए कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव हेतु जैविक एवं प्राकृतिक खेती को अपनाना आवश्यक है।
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक श्री ए. आर. गौर ने प्राकृतिक खेती एवं जैविक खेती के मध्य अंतर स्पष्ट करते हुए प्राकृतिक खेती की अवधारणा और उसके लाभों पर विस्तार से प्रकाश डाला। इसके साथ ही प्राकृतिक खेती के मुख्य अवयव जैसे जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र, ब्रम्हास्त्र आदि बनाने तथा इनके उपयोग के संबंध में जानकारी दी। वैज्ञानिक डॉ. भिमेश्वरी साहू ने जैविक एवं प्राकृतिक खेती में बीजोपचार की वैज्ञानिक विधियों की जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की विभिन्न समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी विशेषज्ञों द्वारा किया गया।
उल्लेखनीय है कि कार्यक्रम कृषि विभाग एवं कृषि विज्ञान केन्द्र बालोद के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ, जिसमें जिले भर के 1009 से अधिक किसानों की सहभागिता रही। इस अवसर पर जैविक खेती करने वाले किसानों का पुष्प एवं पौधा भेंट कर सम्मान किया गया। साथ ही किसानों को अरहर बीज का वितरण किया गया तथा मत्स्य विभाग द्वारा विभिन्न आदान सामग्रियों का वितरण भी किया गया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर अतिथियों का मोमेंटो, शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मान किया गया।
कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन कृषि विभाग के उपसंचालक श्री आशीष चंद्राकर ने किया। कार्यक्रम का सफल संचालन कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. के. आर. साहू, वैज्ञानिक डॉ. बलदेव अग्रवाल, श्री ए. आर. गौर, श्री सचिन कुमार, श्री गीतेश सिन्हा, डॉ. भिमेश्वरी साहू, डॉ. दीपशिखा मनु चंद्राकर एवं श्री विनोद कुमार द्वारा किया गया।






