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दिल्ली में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के 9 एजेंट गिरफ्तार:हथियार, हैंड ग्रेनेड और विस्फोटक बरामद; धार्मिक स्थलों, सुरक्षा बलों पर हमले की साजिश नाकाम

By Dinesh chourasiya

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने दिल्ली में बड़े आतंकी हमले की साजिश को नाकाम किया। पुलिस ने दाऊद इब्राहिम के नेटवर्क और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनके पास से हथियार, हैंड ग्रेनेड और विस्फोटक सामग्री बरामद हुई है।

जांच एजेंसियों के मुताबिक यह नेटवर्क लंबे समय से तैयार किया जा रहा था। इसका मकसद दिल्ली में मंत्रालयों, सुरक्षा बलों और प्रमुख धार्मिक स्थलों को निशाना बनाना था। शुरुआती जांच में आरोपियों के तार पाकिस्तान समर्थित हैंडलर्स और मुंबई अंडरवर्ल्ड से जुड़े मिले हैं।

सूत्रों के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों में कुछ नेपाल मूल के लोग भी शामिल हैं। इन लोगों को विशेष रूप से हमलों को अंजाम देने के लिए तैयार किया जा रहा था। एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि नेटवर्क का संचालन कौन कर रहा था और भारत में इसके स्थानीय सहयोगी कौन हैं।

फंडिंग और भर्ती नेटवर्क की जांच

दिल्ली पुलिस अब इस मॉड्यूल के फंडिंग स्रोतों, भर्ती प्रक्रिया और लॉजिस्टिक सपोर्ट सिस्टम की गहन जांच कर रही है। साथ ही उन स्थानीय मददगारों और विदेशी हैंडलर्स की भूमिका भी खंगाली जा रही है, जो कथित तौर पर इस साजिश में शामिल थे।

यूपी-पंजाब से 7 ISI एजेंट गिरफ्तार

मई: यूपी में ब्लास्ट की साजिश रच रहे 4 लड़के अरेस्ट, BJP दफ्तर निशाने पर था

उत्तर प्रदेश में एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने पाकिस्तानी आतंकी मॉड्यूल के 4 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है। ये भाजपा दफ्तरों, अस्पताल, स्कूल और अन्य कई संवेदनशील ठिकानों पर ब्लास्ट करने की साजिश रच रहे थे।

अप्रैल: पंजाब अमृतस​र में ISI समर्थित आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़, 3 गिरफ्तार

पंजाब पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने ISI के समर्थन से संचालित आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था। पुलिस ने 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। उनके पास से 2 हैंड ग्रेनेड और एक विदेशी ग्लॉक पिस्टल बरामद की गई थी।

आतंकी मॉड्यूल ऐसे काम करते हैं

  • स्थानीय युवाओं या आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की भर्ती।
  • फर्जी पहचान पत्र, सिम कार्ड और बैंक खातों का इस्तेमाल।
  • सीमा पार हैंडलर्स से एन्क्रिप्टेड ऐप्स और सोशल मीडिया के जरिए संपर्क।
  • हवाला नेटवर्क के जरिए फंडिंग।
  • किराये के मकानों और सेफ हाउस का उपयोग।
  • लक्ष्य की रेकी कर छोटे मॉड्यूल में ऑपरेशन को अंजाम देना।

जांच एजेंसियों के मुताबिक हाल के सालों में ऐसे नेटवर्क सीधे सीमा पार घुसपैठ के बजाय स्थानीय मॉड्यूल और डिजिटल कम्युनिकेशन पर ज्यादा निर्भर हुए हैं।

सुरक्षा एजेंसियां ऐसे नेटवर्क कैसे ट्रैक करती हैं

  • संदिग्ध फोन और इंटरनेट गतिविधियों की निगरानी।
  • हवाला और बैंकिंग लेनदेन की जांच।
  • गिरफ्तार आरोपियों से मिले डिजिटल डिवाइस का फॉरेंसिक विश्लेषण।

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