भिलाई में नई सूची जारी करने वाले भाजपा मंडल अध्यक्ष पहुंचे बीजेपी कार्यालय:बंद कमरे में हुई महामंत्री और मंडल अध्यक्षों की बैठक, आलाकमान के पाले में फैसला
By Dinesh chourasiya

भिलाई में भारतीय जनता पार्टी के अंदर चल रही गुटबाजी अब खुले टकराव के रूप में सामने आ गई है। ताजा घटनाक्रम में आज बड़ा राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला, जब 10 मंडलों के भाजपा अध्यक्ष अपने-अपने नव नियुक्त पदाधिकारियों के साथ भाजपा कार्यालय भिलाई पहुंच गए।







दरअसल, भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष सौरभ जायसवाल द्वारा 19 अप्रैल को 13 मंडलों के अध्यक्ष और महामंत्री की सूची जारी की गई थी। इस सूची को 20 अप्रैल को 13 में से 10 मंडल अध्यक्षों ने खारिज कर दिया था और अपनी अलग सूची जारी कर दी थी। इसके बाद से संगठन के भीतर खींचतान लगातार बढ़ती जा रही थी।
पदाधिकारी को लेकर पहुंचे कार्यालय




आज वही 10 मंडल अध्यक्ष, जिन्होंने समानांतर सूची जारी की थी, अपने-अपने मंडलों के भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष और महामंत्रियों को लेकर भाजपा कार्यालय भिलाई पहुंचे। सभी अपने-अपने पदाधिकारियों को जिला अध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन से मिलवाने पहुंचे थे, लेकिन जिला अध्यक्ष की तबीयत खराब होने की वजह से वो कार्यालय में नहीं पहुंचे। ऐसे में सभी मंडल अध्यक्षों ने बीजेपी के दोनों महामंत्री से मुलाकात कर सारी बातें बताई।
भाजयुमो जिला अध्यक्ष नहीं थे मौजूद खास बात यह रही कि जिला अध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन के साथ भाजयुमो जिला अध्यक्ष सौरभ जायसवाल भी यहां पर मौजूद नहीं थे। ये वही नेता हैं जिन्होंने दो दिन पहले अपनी पसंद के पदाधिकारियों की सूची जारी की थी, जिसे लेकर मंडल में असंतोष और बगावत की स्थिति बनी थी। मडंल अध्यक्षों ने बीजेपी महामंत्री को बताया कि जो सूची जिला अध्यक्ष और भाजयुमो जिला अध्यक्ष द्वारा जारी की गई है, उसमें किसी की सहमति नहीं है, यहां तक की उस सूची में बालात्कर जैसे गंभीर मामले के अपराधी भी शामिल है।
बंद कमरे में बैठक
भाजपा कार्यालय पहुंचने के बाद सभी 10 मंडलों के अध्यक्षों ने अपने पदाधिकारियों के साथ बंद कमरे में बैठक शुरू कर दी। इस बैठक में मंडल अध्यक्षों के साथ महामंत्री और अन्य पदाधिकारी भी मौजूद हैं। बैठक में आगे की रणनीति और नियुक्तियों को लेकर अंतिम निर्णय को लेकर आलाकमान से चर्चा की गई है। आलाकमान और शीर्ष नेतृत्व के नेताओं से चर्चा के बाद आगे इन दोनों ही सूची पर फैसला लिया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक मंडल अध्यक्षों ने बैठक में बताया है कि सूची जारी होने से पहले जिन नामों पर सहमति बनी थी, उन नामों को बाद में हटाकर अपने चहेतों के नाम से सूची जारी कर दी गई है। इसको लेकर जिला प्रभारी की भी सहमति नहीं ली गई थी।
पहले से ही था विवाद
गौरतलब है कि पहले जारी सूची को लेकर जिला प्रभारी रामजी भारती ने भी असहमति जताई थी। उनका कहना था कि सूची जारी करने से पहले उनसे चर्चा नहीं की गई। इसी के बाद मंडल अध्यक्षों ने अपनी अलग सूची जारी कर दी थी।
संगठन पर असर
एक ही मंडल में दो-दो अध्यक्ष और महामंत्री बनने की स्थिति ने कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है। जमीनी स्तर पर कामकाज प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है।
आगे क्या होगा?
आज की बैठक के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है, लेकिन फिलहाल भिलाई भाजपा दो गुटों में बंटी नजर आ रही है। पार्टी की ओर से अब प्रदेश संगठन को सारी चीजें से अवगत करवा दिया गया है। आने वाले दिनों में ही शीर्ष नेतृत्व ही इस पर फैसला करेगी। अब नजर प्रदेश नेतृत्व पर टिकी है कि वे इस बढ़ते विवाद को कैसे सुलझाते हैं और संगठन में एकजुटता कैसे कायम करते हैं।





