भिलाई के इस हत्याकांड में 6 आरोपियों को 10-10 साल की सजा, कोर्ट ने गैर इरादतन हत्या माना
By Dinesh chourasiya

दुर्ग के पंचम अपर सत्र न्यायाधीश दीपक कुमार कोशले की अदालत ने बहुचर्चित भिलाई हत्याकांड में फैसला सुनाया। अदालत ने सभी 6 आरोपियों को दोषी माना। कोर्ट ने मामले को धारा 302 के बजाय धारा 304 भाग-2 के तहत गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में रखा।







कोर्ट ने भूपेश देवदास, ब्रिजेश उर्फ बिजू, हरीश कुमार घृतलहरे, समीर खान उर्फ अमन, अजय उर्फ अज्जू भदौरिया, पंकज कुमार लाउत्ररे को 10-10 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 500-500 रुपए अर्थदंड लगाया गया है
दरअसल 20 सितंबर 2022 की रात करीब 11 बजे अब्दुल ग्यासू उर्फ बाबा कुरैशी अपने साथियों के साथ खाना खाने जा रहे थे। उसी कार में आरोपी भी मौजूद थे। भगत सिंह चौक, वैशाली नगर के पास कार खराब हो गई। आरोपियों ने गाड़ी धक्का लगाने के लिए कहा, मना करने पर विवाद शुरू हुआ।




विवाद ने लिया हिंसक रूप
देखते ही देखते झगड़ा बढ़ गया। आरोपियों ने ग्यासू पर हाथ-मुक्कों, ईंट, चाकू से हमला किया। हमले के बाद आरोपी गंभीर रूप से घायल ग्यासू को वहीं छोड़कर भाग निकले। परिजनों ने घायल को अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
पोस्टमार्टम में सामने आया कारण
रिपोर्ट में अत्यधिक रक्तस्राव, गंभीर चोटें, महत्वपूर्ण अंगों की क्षति को मौत का कारण बताया गया। कोर्ट ने इसे मानवकृत मृत्यु माना। अब्दुल रज्जा कुरैशी की शिकायत पर वैशाली नगर थाना में अपराध दर्ज हुआ। पुलिस ने साक्ष्य जुटाए, बयान दर्ज किए, आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया।
2022 से 2026 तक चला मामला
14 दिसंबर 2022 को मामला सत्र न्यायालय में पहुंचा। लंबी सुनवाई के बाद फैसला सुनाया गया। कोर्ट ने कहा कि मनुष्य झूठ बोल सकता है, परिस्थितियां नहीं। अदालत ने पाया कि मौत आरोपियों की मारपीट से हुई, लेकिन हत्या का स्पष्ट इरादा साबित नहीं हुआ। घटना अचानक आवेश में हुई, किसी योजना का प्रमाण नहीं मिला।
क्यों बदली गई धारा
हत्या साबित करने के लिए जरूरी तत्व इस मामले में नहीं मिले। आरोपियों को यह जानकारी थी कि हिंसा से मौत हो सकती है, इसी आधार पर धारा 304 भाग-2 लागू की गई। अभियोजन ने कड़ी सजा की मांग की। बचाव पक्ष ने युवावस्था और पहली गलती का हवाला दिया।
युवावस्था मिली, सजा भी तय हुई
अदालत ने आरोपियों की उम्र और पहली बार अपराध करने की बात को ध्यान में रखा, लेकिन अपराध की गंभीरता देखते हुए 10 साल की सजा उचित मानी। अर्थदंड जमा नहीं करने पर 6 महीने का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।




