
छत्तीसगढ़ के किताबों में बदलाव:चौथी और सातवीं के बच्चे नए सत्र में पढ़ेंगे योग, कला, व्यावसायिक शिक्षा; हर शनिवार को होगा बैगलेस-डे
By Dinesh chourasiya
शिक्षा सत्र 2026-27 में कक्षा चौथी और सातवीं के बच्चे योग, कला और व्यावसायिक पाठ्यक्रम पढ़ेंगे। नई शिक्षा नीति-2020 के तहत चौथी की 10 और सातवीं की 11 समेत कुल 21 किताबें बदली जाएंगी। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने इसे बनाया है।
पहली से आठवीं तक की गणित और विज्ञान की किताबें नहीं बदलेंगी, लेकिन अन्य विषयों की किताबें बदलेंगी। शिक्षा सत्र 2025-26 में पहली से तीसरी और छठवीं की किताबें बदली गई हैं। अब कक्षा चौथी, पांचवीं, सातवीं और आठवीं की बारी है।







इसकी जिम्मेदारी राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) को दी गई है। एनसीआरटी से प्रकाशित कक्षा चौथी और सातवीं (हिंदी और अंग्रेजी माध्यम) की हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, पर्यावरण, सामाजिक विज्ञान, व्यावसायिक, कला शिक्षा एवं योग शिक्षा की किताबों को एससीईआरटी ने राज्य के संदर्भ में तैयार कर लिया है। गणित और विज्ञान की किताबों को बिना किसी बदलाव के पूर्णत: स्वीकार किया जाएगा।
हर सप्ताह सहायक वाचन: कक्षा 3 से 8 तक के विद्यार्थियों को नए शिक्षा सत्र 2026-27 से अतिरिक्त विषय के रूप में सहायक वाचन पढ़ाया जाएगा। इसे बैगलेस डे यानी शनिवार को पढ़ाएंगे। इसमें राज्य के स्थानीय ज्ञान-विज्ञान, कला, साहित्य, लोक साहित्य, भाषिक-संस्कृति, संस्कृति, लोक परंपरा, जीवन-पद्धति, इतिहास, पुरातत्व, धर्म-दर्शन, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, इतिहास-पुरुषों आदि की जीवनी होगी। इसे स्थानीय शिक्षक पढ़ाएंगे और मूल्यांकन करेंगे।
वार्षिक परीक्षा में इससे सवाल नहीं पूछे जाएंगे। राज्य शिक्षा स्थायी समिति इनकी पांडुलिपियों का चयन करेगी। इसके अध्यक्ष के लिए केंद्रीय विवि के कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल को नामांकित किया गया है।




अभ्यास प्रश्न हिंदी के साथ हल्बी या गोंडी में भी होंगे
कक्षा पहली और दूसरी की हिंदी की किताब, जो पहले से चल रही है, उसके अभ्यास प्रश्न दो भाषाओं में होगें। हिंदी तो होगी ही, बस्तर, अंबिकापुर आदि क्षेत्रों के अनुसार हल्बी या गोंडी भाषी में भी होगी। छात्र-छात्राओं की सुविधा के लिए अभ्यास प्रश्नों को राज्य की 16 स्थानीय तथा 4 अंतर राज्यीय भाषाओं (मराठी, बंगला, तेलुगू और उड़िया) में तैयार किया जाएगा। यह व्यवस्था शिक्षा सत्र 16 जून 2026 से संबंधित जिलों के आवश्यक स्कूलों में लागू होगी।




