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कवर्धा में आदिवासियों ने दुर्गा पंडाल उखाड़ा…पुलिस ने लाठीचार्ज किया:महिलाओं ने दीवार तोड़ी, SDOP का कॉलर पकड़ा, झूमाझटकी में गर्भवती महिला-आरक्षक का हाथ टूटा

By Dinesh chourasiya

छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले के ग्राम कामठी में आदिवासी समाज के नेता और हिंदू संगठन के सदस्य आमने सामने हो गए। नवदुर्गा की तैयारी कर रहे हिंदू संगठन ने कामठी गांव के दुर्गा मंदिर में पंडाल-झंडे लगाए थे।

आदिवासी समाज के युवक रविवार सुबह पहुंचे और मंदिर में लगा पंडाल-झंडा उखाड़कर फेंक दिया। मंदिर के गेट पर ताला लगा दिया। इसका हिंदू संगठन ने विरोध किया और उसके बाद बवाल हो गया।

मौके पर पहुंची पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा। सुरक्षा के मद्देनजर गांव में अभी भी फोर्स तैनात है

दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और माहौल बिगड़ा

कवर्धा जिले के ग्राम कामठी में मंदिर को लेकर सालों से चल रहा विवाद रविवार को नवरात्रि की तैयारियों के बीच हिंसक हो गया। सर्व समाज के लोग मंदिर परिसर में दुर्गा प्रतिमा स्थापना के लिए पंडाल लगा रहे थे।

तभी दूसरे पक्ष ने अचानक पंडाल उखाड़ दिया और मंदिर के मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया। इससे दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और माहौल बिगड़ गया।

गर्भवती महिला आरक्षक का हाथ टूटा

मौके पर पहुंचे तहसीलदार और पुलिस ने ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की, लेकिन स्थिति काबू से बाहर हो गई। आक्रोशित महिलाओं ने मंदिर की प्रीकास्ट बाउंड्रीवॉल तोड़ दी।

इसी दौरान हंगामे में किसी ने पंडरिया एसडीओपी भूपत सिंह धनेश्री का कॉलर पकड़ लिया। झूमाझटकी के बीच एक गर्भवती महिला आरक्षक का हाथ टूट गया। भीड़ को नियंत्रित करने पुलिस को लाठियां भांजनी पड़ी। इस लाठीचार्ज में 40 से ज्यादा लोग घायल हो गए।

SDOP का कॉलर पकड़ा

साथ ही मौके पर मौजूद एसडीओपी के साथ भी अभद्र व्यवहार किया गया। उनका कॉलर भी पकड़ा गया। पुलिस ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया। विवाद को देखते हुए कामठी में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। इसके अलावा, प्रशासन ने विवादित धार्मिक स्थल को शासकीय घोषित कर दिया है।

ग्रामीण और पुलिसकर्मियों के बीच झड़प।

जानिए क्या है पूरा मामला

दरअसल, कामठी गांव के बीचों-बीच एक प्राचीन मंदिर है, जिसमें कई देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से वहां नियमित रूप से पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं।

हालांकि, हाल के कुछ वर्षों से गोंडवाना समाज इस मंदिर पर अपना अधिकार जताने लगा है। उन्होंने मंदिर का नया नामकरण कर वहां सतरंगी झंडा भी स्थापित कर दिया है।

नवरात्रि पर एक बार फिर भड़का विवाद

मंदिर को लेकर पटेल समाज और गोंडवाना समाज के बीच पहले से ही तनातनी बनी हुई है। पिछले साल भी दुर्गा प्रतिमा स्थापना और नवरात्रि में पूजा-अर्चना को लेकर विवाद हुआ था, जिसे पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाइश देकर शांत करा दिया था।

हालांकि, दोनों समुदायों के बीच अंदरूनी नाराजगी बनी रही और समय-समय पर तनाव का माहौल बना रहा। शनिवार को एक बार फिर विवाद ने तूल पकड़ लिया। हालात तनावपूर्ण हो गए, जिससे मामला बड़े विवाद का रूप ले लिया।

पहले में भी हो चुका विवाद

गांव के पंच बृजलाल बघेल ने बताया कि यह विवाद नया नहीं है। छठ पूजा के दौरान भी इसी तरह मंदिर का ताला लगाकर माहौल बिगाड़ा गया था। ग्रामीणों की मांग है कि मंदिर परिसर को सुरक्षित करने के लिए स्थायी समाधान निकाला जाए।

पुलिस पहुंची तो भीड़ और ज्यादा उग्र हुई

रविवार सुबह करीब 10 बजे से विवाद शुरू हुआ था। जैसे ही पुलिस बल मौके पर पहुंचा, भीड़ और ज्यादा उग्र हो गई। महिलाओं के साथ-साथ युवाओं ने भी जमकर विरोध किया।

लाठीचार्ज के बाद घायलों को एम्बुलेंस से कुकदूर और पंडरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया। कुकदूर सीएचसी की प्रभारी डॉ. प्रसंग्नि साधू ने बताया कि यहां 30 से 35 घायलों का इलाज किया जा रहा है। इनमें से किसी को गंभीर चोट नहीं आई है। जबकि 10 से 12 घायलों को पंडरिया अस्पताल रेफर किया गया है।

अब पढ़े कलेक्टर गोपाल वर्मा ने क्या कहा

कामठी गांव में हुए विवाद पर कलेक्टर ने बताया, कि दुर्गा पंडाल को लेकर दो पक्षों में विवाद हुआ था। अभी स्थिति ठीक है। दोनों पक्षों से चर्चा की गई है, अभी चर्चाओं का दौर जारी है।

पिछले साल भी विवाद हुआ था, इसे देखकर पूर्व में चर्चा की गई थी। शासकीय जमीन पर विवाद हो रहा है, इसका स्थायी समाधान निकालने के लिए समिति बनाकर रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं।

अब पढ़े कवर्धा एसपी धर्मेंद्र सिंह छवाई ने क्या कहा

कामठी गांव में हुए विवाद को लेकर कवर्धा एसपी धर्मेंद्र सिंह ने बताया, कि धार्मिक मंदिर परिसर में दुर्गा पंडाल तोड़ने को लेकर विवाद हुआ था।

अभी स्थिति नियंत्रण में है। पूर्व में शांति समिति की बैठक हुई थी, जिसमें सभी ने संगठनों ने सहमति दी थी। दीवार तोड़ने की बात पर विवाद बढ़ा और धक्का मुक्की हुई है। ग्रामीण–पुलिस वाले घायल हुए हैं। पूर्व में जो परंपरा थी, उसी परंपरा के अनुसार मूर्ति रखने की व्यवस्था बनाई है।

………………………. एडिटर ……… Dinesh chourasiya 

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