Uncategorized

CG में भारतमाला प्रोजेक्ट में  घोटाला का मामला अब11 जिलों में भ्रष्टाचार की जांच करेगी EOW:राजस्व विभाग सचिव ने सभी संभाग कमिश्नर को लिखा पत्र, 15 दिन में मांगी रिपोर्ट

By Dinesh chourasiya

भारत माला प्रोजेक्ट में जमीन अधिग्रहण और मुआवजे में हुए घोटाले की जांच अब प्रदेश के 11 जिलों में की जाएगी। रायपुर, धमतरी, कांकेर, कोंडागांव, कोरबा, रायगढ़, जशपुर, राजनांदगांव, दुर्ग, बिलासपुर और जांजगीर-चांपा जिले में भू-अर्जन की प्रक्रिया में अनियमितताएं पाए जाने के बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया है।

राजस्व आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव अविनाश चंपावत ने सभी संभाग आयुक्तों से 15 दिन के इसकी रिपोर्ट में मांगी थी। जिन जिलों से भारत माला प्रोजेक्ट होकर गुजर रहा है, उन सभी जिलों में मुआवजा और अधिग्रहण को लेकर EOW भी जांच कर रही है।

राजस्व आपदा प्रबंधन विभाग ने पत्र जारी किया है।

पहले जानिए क्या है पूरा मामला

रायपुर से विशाखापट्टनम तक करीब 463 किमी लंबी नई फोरलेन सड़क बनाई जा रही है। छत्तीसगढ़ में 124 किमी सड़क तीन कंपनियां बना रही हैं। यह सड़क नवा रायपुर से भी होकर गुजरेगी। इसलिए यहां सड़क के लिए किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया गया। जमीन अधिग्रहण के बाद मुआवजे का घोटाला किया गया।

छत्तीसगढ़ के अवर सचिव को 8 अगस्त 2022 को धमतरी निवासी शिकायतकर्ता कृष्ण कुमार साहू और हेमंत देवांगन ने शिकायत की थी कि भारत माला परियोजना के तहत रायपुर विशाखापट्नम इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए अधिग्रहित की गई जमीन का मुआवजा बांटने के नाम पर अधिकारियों ने पैसों का बंदरबांट किया।

उनकी जमीन का खसरा बदल दिया गया। पूर्व खसरे पर उस राशि का भुगतान दिख रहा है। एसडीएम, नायब तहसीलदार और पटवारी से इसकी शिकायत की है, लेकिन वो समाधान नहीं कर रहे हैं। इन अफसरों ने दस्तावेजों में हेर-फेर कर भू-माफियाओं की मदद से शासन के पैसों का दुरुपयोग किया है।

अधिग्रहण नियमों के अनुसार, गांवों में 500 वर्गमीटर से कम जमीन है तो उसका मुआवजा ज्यादा मिलता है। जमीन 500 वर्गमीटर से ज्यादा है तो पैसा कम मिलता है। उदाहरण के तौर पर एक एकड़ जमीन का मुआवजा 20 लाख होगा। इसे टुकडों में बांटकर 500 वर्गमीटर से कम कर दिया जाए तो मुआवजा 1 करोड़ हो जाएगा।

EOW ने मांगी जांच रिपोर्ट

रायपुर जिले में जांच के बाद प्रदेश के 11 जिलों में भू-अर्जन प्रक्रिया पर के दौरान अधिकारियों की तरफ से फर्जी नामांतरण, बंटवारा और अधिक मुआवजा बांटने में अनियमितताएं की बात सामने आई हैं। इस गड़बड़ी की गंभीरता को राजस्व विभाग ने जांच का दायरा बढ़ाया।

भारत माला प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार की जांच EOW को सौंपने 12 मार्च को केबिनेट की बैठक में फैसला लिया गया है। अब इस पूरे मामले में EOW के अधिकारी जांच में जुट गए है। वहीं, राजस्व विभाग से पूर्व में की गई जांच की रिपोर्ट मांगी है। इस मामले में EOW घोटाले में शामिल अधिकारियों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है।

सीबीआई से भी की गई शिकायत

स्वामी बिल्ड प्राइवेट लिमिटेड के संचालक नरेंद्र पारख ने बताया कि, अभनपुर के उरला गांव नहर के पास उनकी 88 डिसमिल जमीन है। इसमें 39 डिसमिल जमीन का अधिग्रहण एनएचएआई ने किया है। भुगतान पत्रक में 1.36 करोड़ का मुआवजा बना। लेकिन इनकी जमीन का मुआवजा किसी हृदय लाल गिलहरे के नाम पर कर दिया गया।

उसने बैंक से पूरा पैसा निकालकर खाता बंद कर दिया है। उन्होंने इसकी शिकायत सीबीआई में की गई है। अमित पाण्डेय ने बताया कि, उनके पास 1.80 लाख स्क्वायर फीट जमीन थी। उन्हें 29 करोड़ मुआवजा मिलना था, लेकिन 17 करोड़ ही मिले। बाकी 12 करोड़ कहां गए उन्हें पता नहीं।

ननकी राम कंवर ने पिछले साल पीएम मोदी को पत्र लिखकर शिकायत की थी।

पूर्व गृहमंत्री ने लिखी थी पीएम को चिट्‌ठी

मुआवजा घोटाले में रिव नाम के व्यक्ति की मुख्य भूमिका बताई जा रही है। इसकी शिकायत बीजेपी नेता ननकीराम कंवर ने पत्र लिखकर 28 नवंबर 2024 को पीएम मोदी से की थी।

चिट्‌ठी में मुआवजा घोटाले में शामिल अफसरों का नाम लिखा था और प्रोजेक्ट की जानकारी भू-माफियाओं को लीक करने की बात भी लिखी थी। इसमें जिन अफसरों का नाम लिखा हुआ था, उनमें से कई अफसर अभी भी जांच के दायरे के बाहर है।

Related Articles

Back to top button