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सुप्रीम कोर्ट बोला-EVM से डेटा डिलीट नहीं करे चुनाव आयोग:कहा- हारा उम्मीदवार स्पष्टीकरण चाहे तो इंजीनियर को बताना होगा छेड़छाड़ नहीं हुई

By Dinesh chourasiya

सुप्रीम कोर्ट में एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की तरफ से लगाई गई याचिका पर सुनवाई हुई। - Dainik Bhaskar

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) के वेरिफिकेशन के लिए पॉलिसी बनाने की मांग वाली एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की याचिका पर सुनवाई हुई।

ADR ने याचिका में कहा कि EVM के वेरिफिकेशन के लिए चुनाव आयोग की तरफ से बनाए गए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (SOP) सुप्रीम कोर्ट के अप्रैल 2024 में दिए गए फैसले से मेल नहीं खाते हैं।

CJI संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने तक EVM में कोई डेटा रिलोड न करें, न कोई डेटा डिलीट करें।

CJI ने कहा, ‘यह कोई विरोध की स्थिति नहीं है। अगर हारने वाले उम्मीदवार को कोई स्पष्टीकरण चाहिए, तो इंजीनियर यह स्पष्ट कर सकता है कि कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है।’

सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्शन कमीशन से यह भी कहा कि वेरिफिकेशन का कॉस्ट 40 हजार रुपए बहुत ज्यादा है। कोर्ट ने इस कॉस्ट को कम करने का आदेश भी दिया।

इलेक्शन कमीशन को अब सुप्रीम कोर्ट में EVM की मेमोरी और माइक्रो कंट्रोलर डिलीट करने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी देनी होगी। अगली सुनवाई 3 मार्च से शुरू होने वाले हफ्ते में होगी।

CJI बोले- हमारे फैसले का यह मतलब नहीं था कि आप डेटा डिलीट करें

CJI खन्ना ने चुनाव आयोग के वकील एडवोकेट मनिंदर सिंह से कहा कि अप्रैल 2024 में ADR vs इलेक्शन कमीशन केस में दिए गए फैसले का ये मतलब नहीं था कि EVM से चुनाव का डेटा डिलीट किया जाए, या रीलोड किया जाए। उस फैसले का मकसद यह था कि चुनाव होने के बाद EVM मैन्युफैक्चरिंग कंपनी का कोई इंजीनियर मशीन को वेरिफाई और चेक कर सके।

26 अप्रैल 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को 3 निर्देश दिए थे

1. सिंबल लोडिंग प्रक्रिया के पूरा होने के बाद इस यूनिट को सील कर दिया जाए। सील की गई यूनिट को 45 दिन के लिए स्ट्रॉन्ग रूम में स्टोर किया जाए।

2. इलेक्ट्रॉनिक मशीन से पेपर स्लिप की गिनती के सुझाव का परीक्षण कीजिए।

3. यह भी देखिए कि क्या चुनाव निशान के अलावा हर पार्टी के लिए बारकोड भी हो सकता है।

फैसले के बाद राजनीतिक पार्टियां और कैंडिडेट्स के लिए EVM की जांच करवाने का एक रास्ता खुला। इसे नीचे दिए पॉइंट्स से समझिए।

  • दूसरे या तीसरे नंबर पर आने वाले किसी कैंडिडेट को शक है तो वह रिजल्ट घोषित होने के 7 दिन के भीतर शिकायत कर सकता है।
  • शिकायत के बाद EVM बनाने वाली कंपनी के इंजीनियर्स इसकी जांच करेंगे।
  • किसी भी लोकसभा क्षेत्र में शामिल विधानसभा क्षेत्रवार की टोटल EVM’s में से 5% मशीनों की जांच हो सकेगी। इन 5% EVM’s को शिकायत करने वाला प्रत्याशी या उसका प्रतिनिधि चुनेगा।
  • इस जांच का खर्च कैंडिडेट को ही उठाना होगा। चुनाव आयोग ने बताया- जांच की समय सीमा और खर्च को लेकर जल्द ही जानकारी शेयर की जाएगी।
  • जांच के बाद अगर ये साबित होता है कि EVM से छेड़छाड़ की गई है तो शिकायत करने वाले कैंडिडेट को जांच का पूरा खर्च लौटा दिया जाएगा।

हरियाणा के कांग्रेस नेताओं नेताओं की याचिका कोर्ट ने खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के पूर्व मंत्री और करण सिंह दलाल और 5 बार के विधायक लखन कुमार सिंगला की इसी मामले से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई करने से इनकार कर दिया। दोनों ने हरियाणा विधानसभा चुनावों में इस्तेमाल हुई EVM के वेरिफिकेशन की मांग की थी। कोर्ट ने दोनों की पिछली याचिका भी खारिज कर दी थी और उन्हें नई याचिका दाखिल करने की अनुमति नहीं दी गई थी।

मामले में पिछली सुनवाई में क्या हुआ, पढ़ें…

13 दिसंबर 2024: सुनवाई में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने अपीलकर्ताओं से कहा कि याचिका यहां क्यों लाए हो, इसे पुरानी बेंच के पास भेजना चाहिए।

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