
CG में अनवर ढेबर के रिश्तेदार के घर ED की रेड:गरियाबंद में तड़के 10 गाड़ियों में पहुंचे अफसर; रायपुर में चावल कारोबारी के घर दबिश
By Dinesh chourasiya
गरियाबंद जिले के मैनपुर में ED ने कारोबारी इकबाल मेमन के घर छापा मारा है। टीम आज (बुधवार) सुबह 6 बजे 10 से ज्यादा गाड़ियों में कारोबारी के घर पहुंची। टीम घर में प्रॉपर्टी से जुड़े दस्तावेज खंगाल रही है। इकबाल मेमन छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले के आरोपी अनवर ढेबर का रिश्तेदार (मौसा) बताया जा रहा है। वहीं रायपुर के मौदहापारा में चावल कारोबारी रफीक मेमन के घर भी दबिश दी गई है।
गरियाबांद के जाड़ापदर में बनाए जा रहे राइस मिल को लेकर कुछ दिन पहले ग्रामीणों ने विरोध जताया था। ये मिल इकबाल के बेटे गुलाम द्वारा बनाई जा रही थी। विवाद बढ़ने के बाद ग्रामीणों ने ED के पास पहुंचकर एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। ग्रामीणों ने शराब सिंडिकेट के पैसे का इन्वेस्टमेंट करने आरोप लगाया है।








मैनपुर में 2 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति खरीदी
आवेदन में आरोप था कि बेरोजगार गुलाम मेमन ने पिछले एक डेढ़ साल में मैनपुर में 2 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति खरीदी है। शिकायत में गुलाम को शराब घोटाले के आरोपी अनवर ढेबर का मौसेरा भाई बताया गया था। इसी शिकायत की पुष्टि के बाद आज ED की टीम ने कार्रवाई शुरू की है।

लोग बोले- शराब सिंडिकेट के पैसे का इन्वेस्टमेंट




गरियाबंद में अनवर ढेबर के कारोबारी रिश्तेदार इकबाल मेमन पर यहां के लोगों ने शराब सिंडिकेट के पैसे का इन्वेस्टमेंट करने का आरोप लगाया है, इसी शिकायत के आधार पर ईडी की टीम ने दबिश दी है।
अब शराब घोटाले को समझिए
अनवर, त्रिपाठी और टुटेजा घोटाले के मास्टर माइंड
ED के मुताबिक अनवर ढेबर ने IAS रहे अनिल टुटेजा के साथ मिलकर शराब सिंडिकेट चलाकर 2 हजार करोड़ का घोटाला किया गया। दोनों ने मिलकर पूरे घोटाले की साजिश रची। अनिल टुटेजा के प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए अनवर आबकारी विभाग में अपने पसंदीदा अधिकारियों को नियुक्त करता था। इस तरह वह वास्तविक रूप से आबकारी विभाग का मंत्री बन गया था।
2019 से 2022 तक चला भ्रष्टाचार
ED की जांच में पता चला है कि, शराब घोटाले में भ्रष्टाचार 2019 से 2022 के बीच चला है, जिसमें कई तरीकों से भ्रष्टाचार किया गया था।
- पार्ट A – छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कार्पोरेशन लिमिटेड़ (शराब की खरीद और बिक्री के लिए राज्य का निकाय) की ओर से शराब की प्रत्येक पेटी के लिए डिस्टिलर्स से रिश्वत ली गई थी। इस पार्ट में CSMCL के MD अरुणपति त्रिपाठी को अपने पसंद के डिस्टिलर की शराब को परमिट करना था। जो रिश्वत-कमीशन कोअ लेकर सिंडिकेट का हिस्सा हो गए थे।
- पार्ट B – सरकारी शराब दुकान के जरिए बेहिसाब कच्ची और देशी अवैध शराब की बिक्री की गई। यह बिक्री नकली होलोग्राम से हुई। जिससे राज्य के खजाने में एक भी रुपए नहीं पहुंचा और बिक्री की सारी राशि सिंडिकेट ने जेब में डाल ली।
- पार्ट C- कार्टेल बनाने और बाजार में निश्चित हिस्सेदारी रखने की अनुमति देने के लिए डिस्टिलर्स से रिश्वत ली गई। और एफएल 10ए लाइसेंस धारक जो विदेशी शराब उपलब्ध कराते थे उनसे भी कमीशन लिया गया।
2100 करोड़ रुपए सिंडिकेट के पैसे में गए
ED ने बताया कि छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के कारण राज्य के खजाने को भारी नुकसान हुआ है। शराब सिंडिकेट के जेबों में 2100 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध आय भरी गई। एपी त्रिपाठी और अनवर ढेबर की गिरफ्तारी से पहले रिटायर्ड IAS अनिल टुटेजा, कारोबारी अरविंद सिंह और त्रिलोक सिंह ढिल्लो को भी ED ने गिरफ्तार किया था। ये सभी जेल में हैं।
गौरतलब है कि शराब घोटाले की चल रही जांच में ED ने पहले ही 18 चल और 161 अचल संपत्तियों को जब्त कर लिया है, जिनकी कीमत करीब 205 करोड़ 49 लाख रुपए है।




