भिलाई में मरीज को सही समय पर डिस्चार्ज नहीं किया तो परिजनों ने अस्पताल में की तोडफोड़
By Dinesh chourasiya

भिलाई में संचालित आरोग्यम हॉस्पिटल में एक मरीज के परिजनों ने शनिवार दोपहर जमकर तोड़फोड़ और स्टॉफ के साथ मारपीट की। बेटे का आरोप है पिता को नागपुर ले जाना था, लेकिन आरोग्यम के डॉक्टर समय पर डिस्चार्ज नहीं कर रहे थे। इससे आक्रोशित होकर उन्होंने ऐसा किया है।
राकेश यादव ने बताया कि वो राजनांदगांव का निवासी है। उसने अपने पिता को किडनी की समस्या के चलते भर्ती कराया था। यहां पिछले 10 दिनों से इलाज चल रहा था। डॉक्टरों ने कहा कि उनका प्लेटलेट्स कम है। इलाज के दौरान वो समस्या खत्म हो गई।








इसके बाद डॉक्टर ने उनका ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के बाद डॉक्टर आरके साहू ने उन्हें बुलाया और कहा कि आपके पिता की बचने की उम्मीद काफी कम है। आप उन्हें यहां से डिस्चार्ज करवाकर कहीं दूसरी जगह ले जाओ। हमने नागपुर में डॉक्टर से बात की। उसने उनका इलाज करने की बात कही। डॉक्टर ने कहा कि आप शनिवार दोपहर तीन बजे तक मरीज को नागपुर लेकर आ जाओ।
डिस्चार्ज में लापरवाही बरतने का आरोप
डॉ. आरके साहू से कल रात में बात हुई कि आरोग्यम से सुबह मरीज को डिस्चार्ज कर देंगे, उसे नागपुर ले जाना है। इसके बाद भी हॉस्पिटल प्रबंधन सुबह 11 बजे तक यह कहता रहा कि डॉ. आरके साहू अभी आए नहीं हैं। इसके बाद वो दोपहर 12.30 बजे आए और डिस्चार्ज बना दिया।




यहां दोपहर के तीन बज गए हैं, लेकिन अभी तक बिलिंग वालों ने मरीज का डिस्चार्ज नहीं बनाया। वहां डॉक्टर का फोन पर फोन आ रहा है। वो 5 बजे हॉस्पिटल से निकल जाएगा। ऐसे में पिता को कैसे वहां ले जाकर समय पर दिखा पाऊंगा। इसी टेंशन में उसने अस्पताल में हंगामा किया है।
डॉक्टर और स्टॉफ नहीं करते सही से बात
पीड़ित ने बताया कि, अगर मरीज को लेकर किसी डॉक्टर या स्टॉफ से बात करें, तो कोई भी ढंग से बात नहीं करता है और ना ही सलाह देता है। बिल के लिए मेडिकल स्टोर से लेकर इलाज करने वाले तक कई चक्कर काट रहे हैं। लेकिन कोई ठीक से जवाब नहीं दे रहा है। तीन लाख रुपए बिल पटाने के बाद भी यह हाल है।

बिना एमएलसी रिपोर्ट कर रहे थे जहर सेवन मरीज का इलाज
आरोग्यम हॉस्पिटल के संचालक डॉ. नवीन राम दारुका और यूरोलॉजिस्ट डॉ. आरके साहू पर एक 13 साल की किशोरी का गलत इलाज करने का आरोप है। किशोरी जहर सेवन कर अस्पताल में एडमिट हुई थी, लेकिन 16 दिन इलाज के बाद भी उन्हें यह पता नहीं चला कि उसने जहर सेवन किया है।
इसकी वजह से वो उसका सही इलाज नहीं किए और वो मर गई। पुलिस में मरीज की सूचना ना देने और आयुष्मान से इलाज के बाद भी परिजन से रुपए लेने के आरोप में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग में शिकायत की। नर्सिंग होम एक्ट दुर्ग के अधिकारी डॉक्टर अनिल शुक्ला ने मामला संज्ञान में आने के बाद कार्रवाई करने की बात कही।
प्रबंधन ने नहीं रखा पक्ष, पुलिस में की शिकायत
इस बारे में जब डॉ. नवीन राम दारुका को फोन किया, तो हॉस्पिटल में होने के बाद भी उन्होंने कहा कि, वो राजनांदगांव चले गए हैं। साथ ही डॉ. आरके साहू भी हॉस्पिटल में मौजूद थे, लेकिन उन्होंने कहा कि वो रायपुर चले गए हैं। दोनों ही जिम्मेदार डॉक्टरों ने अपना पक्ष रखने से मना किया।
वहीं, अस्पताल के पीआरओ जसविंदर सिंह ने कहा कि तोड़फोड़ के मामले में उन्होंने पुलिस में शिकायत की है। मरीज के परिजन ने शराब के नशे में हंगामा और तोड़फोड़ किया है।




