रायपुर में न्योता भोज बेटी के जन्मदिन पर कलेक्टर ने बच्चों को खिलाया खाना, SSP के साथ खुद भी किया भोजन
By Dinesh chourasiya

रायपुर कलेक्टर गौरव कुमार सिंह ने अपनी बेटी के जन्मदिन के मौके पर सरकारी स्कूल के बच्चों को न्योता भोज कराया। शुक्रवार को रायपुर के इंद्रप्रस्थ कॉलोनी स्थित शासकीय प्राथमिक शाला में इसका आयोजन किया गया था। यहां कलेक्टर ने बच्चों को खाना परोसा वहीं SSP संतोष सिंह के साथ खाने भी बैठे।
रायपुर जिले में ही अभी तक 40वां न्योता भोज हो चुका है। इंद्रप्रस्थ कॉलोनी डिपरापारा के बच्चों को मध्यान्ह भोजन के साथ पेस्ट्री, गुलाब जामुन भी परोसा गया। 17 फरवरी को न्योता भोज की शुरुआत हुई थी। इसके बाद से लगातार कई लोग और सामाजिक वर्ग इसका हिस्सा बन रहे हैं।








बच्चे हुए खुश
इस न्योता भोज खाने के दौरान बच्चे बेहद खुश दिखे। बच्चों को पुड़ी, सब्जी, दाल, चावल और खीर परोसी गई। इसके साथ ही सभी ने पेस्ट्री खाई। कलेक्टर ने बच्चों के पास जाकर उनकी पसंद के व्यंजन पूछते हुए खुद परोसा। भोजन ग्रहण करने से पहले बच्चों ने हाथ जोडकर मां अन्नपूर्णा को प्रणाम किया फिर बच्चों ग्रहण किया।
कलेक्टर ने की समाज को जुड़ने किया आग्रह




कलेक्टर डॉ सिंह ने कहा कि हमारा प्रदेश सुपोषित और विकसित हो इसके लिए प्रदेश के स्कूलों में मध्यान्ह भोजन के साथ न्योता भोज का आयोजन कर रहे हैं। मेरी बेटी के जन्मदिन पर हमारे द्वारा बच्चों के साथ आज हमने भी न्योता भोज किया है। उन्होंने कहा कि जब बच्चों के पास समाज के विभिन्न वर्गों के लोग आते हैं, तो बहुत ही खुशी होती है। उन्होंने शहर वासियों से आग्रह किया कि उनके जीवन में जब भी कोई महत्वपूर्ण तिथि अवसर हो तो उसे स्कूली बच्चों के साथ सेलीब्रेट करें।
17 फरवरी से हुई थी शुरुआत
कलेक्टर ने बताया कि, 17 फरवरी को हमने इसकी शुरुआत की थी और अभी तक ये 40वाँ न्योता भोज जिले में हो रहा है। पिछले 10 से 12 दिनों में हर दिन 2 से 3 न्योजा भोज के कार्यक्रम हुए और समाज के सभी वर्गों के लोग शामिल हो रहे हैं।
क्या है ‘न्योता भोज’?
प्रधानमंत्री पोषण शक्ति योजना के तहत प्रदेश के स्कूलों में खास मौकों पर दानदाता पौष्टिक आहार का दान कर सकते हैं, ताकी बच्चों को और ज्यादा आहार-पोषण मिल सके। ‘न्योता भोजन’ पूरी तरह से सामाजिक भागीदारी पर होगा। लोग चाहें तो अलग-अलग त्योहारों, एनिवर्सरी, जन्मदिन, राष्ट्रीय त्योहारों के मौकों पर स्कूल में भोजन दान कर सकते हैं। ये दान पूरी तरह से स्वैच्छिक होगा। समुदाय का कोई भी वर्ग इसमें अपना योगदान दे सकेगा।

ये आहार कर सकेंगे दान
दान की जाने वाली सामग्री में शाला के लिए पूरा भोजन, कक्षा विशेष के लिए पूरा भोजन, अतिरिक्त पोषण आहार हो सकता है। इसके अलावा पोषण आहार के लिए स्कूलों में सामग्री भी दे सकते हैं। जिसे वहां की रसोई में ही बनाकर बच्चों को परोसा जाएगा।
दान-दाताओं से मिलने वाली खाने-पीने की चीजें उस क्षेत्र की फूड हैबिट के अनुसार ही होनी चाहिए। पूरे भोजन में नियमित रूप से दिए जाने वाले भोजन की तरह बच्चों को दाल, सब्जी और चावल सभी दिया जाना है। फल, दूध, मिठाई, बिस्किट्स, हलवा, चिक्की, अंकुरित जैसी चीजें बच्चों को पूरक पोषण सामग्री के रूप में दी जा सकती हैं।
पौष्टिक और मौसमी फलों का भी दान किया जा सकेगा। स्कूलों में बच्चों से पूछकर भी खाने की ऐसी सूची तैयार की जानी चाहिए जो बच्चे ‘न्योता भोजन’ में खाना चाहते हों। इस सूची को दान-दाताओं को उपलब्ध कराया जाना चाहिए, जिससे वे बच्चों की पसंद की चीजें इस भोज के लिए ला सकें।




