छत्तीसगढ़

पिता की मजबूरी नहीं थे 8000 रूपए एंबुलेंस के लिए नहीं थे पैसे, बेटे का शव बैग में डालकर पिता को बस में 200 KM का करना पड़ा सफर

By Dinesh chourasiya

इस मामले को लेकर विधानसभा में विपक्ष के नेता (बीजेपी) सुवेंदु अधिकारी ने जहां तृणमूल कांग्रेस सरकार की ‘स्वास्थ्य साथी’ बीमा योजना पर सवाल उठाया वहीं तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी पर एक बच्चे की दुर्भाग्यपूर्ण मौत पर राजनीति करने का आरोप लगाया.

बच्चे के पिता आशीम देबशर्मा ने कहा, ‘‘ छह दिनों तक सिलीगुड़ी नॉर्थ बंगाल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पीटल में इलाज के बाद मेरे पांच महीने के बेटे की पिछली रात मौत हो गई. इलाज पर मैंने 16000 रुपये खर्च किए.” देबशर्मा ने कहा, ‘‘ मेरे बच्चे को कालियागंज तक ले जाने के लिए एंबुलेंस चालक ने 8000 रुपये मांगे, जो मेरे पास नहीं थे. ”

उसने दावा किया कि एम्बुलेंस नहीं मिलने पर उसने शव को एक बैग में डाल लिया और दार्जिलिंग के सिलीगुड़ी से करीब 200 किलोमीटर तक उत्तर दिनाजपुर के कालियागंज तक बस से सफर किया. उसने इस बात की किसी यात्री को भनक नहीं लगने दी क्योंकि उसे डर था कि यदि सहयात्रियों को पता चल गया तो उसे बस से उतार दिया जाएगा.

उसने कहा कि 102 योजना के तहत एक एंबुलेंस चालक ने उससे कहा कि यह सुविधा मरीजों के लिए है न कि शव को ले जाने के लिए.

मीडिया से बातचीत के इस व्यक्ति के वीडियो को ट्विटर पर डालते हुए अधिकारी ने लिखा, ‘‘ हम तकनीकी बातों में न जाएं लेकिन क्या स्वास्थ्य साथी यही हासिल करने के लिए है? यह दुर्भाग्य से ही सही, लेकिन ‘‘इगिये बांग्ला’ (उन्नत बंगाल) मॉडल की सच्ची तस्वीर है.” तृणमूल के राज्यसभा सदस्य शांतनु सेन ने बीजेपी पर एक बच्चे की मौत पर ‘राजनीति करने का’ आरोप लगाया.

Related Articles

Back to top button