
नई दिल्ली -शैल कंपनियों पर मोदी सरकार बड़ा एक्शन लेने की तैयारी में है। एक्शन के तहत 40 हजार से ज्यादा इन मुखाैटा कंपनियों का पंजीकरण रद्द किया जाना है। कॉरपोरेट मंत्रालय ने जिन शैल कंपनियों के पंजीकरण को रद्द करने की योजना बनाई है उनमें से अधिकतर दिल्ली और हरियाणा की कंपनियां हैं। अगर इन कंपनियों पर ताला लगता है तो बड़ी टैक्स चोरी का भी खुलासा हाे सकता है। वैसे बताया जाता है कि ये वो कंपनियां हैं जिनका कारोबार 6 माह से डैड पड़ा है।
मामले से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इन मुखौटा कंपनियों के जरिये मनी लॉन्ड्रिंग जैसी आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने का अंदेशा है। दरअसल इस अपराध से जुड़े लोग मुखौटा कंपनियों में पैसा लगाकर उसे दूसरे देशों तक पहुंचाते हैं। इसमें काली कमाई का जमकर इस्तेमाल होता है।







महज कागजों पर चलने वाली कंपनियों को कैश ट्रांसफर करने का खेल दशकों से चला आ रहा है। कागजी यानी शेल कंपनियां उस रकम को उन्हीं कंपनियों में वापस निवेश कर देती हैं या उन्हें उधार दे देती हैं। इस तरह पहली कंपनी का काला धन वैध हो जाता है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट की एर रूलिंग के अनुसार, अगर टैक्स अधिकारी पर्याप्त जांच के साथ अपने दावे को मजबूत कर लें और शेयर कैपिटल के रूप में फंड पाने वाली कंपनी ऐसी डील को वैध साबित न कर सके तो उसे उस रकम पर टैक्स चुकाना होगा।






