
15 वर्षों से बदहाल है ग्राम मुल्ले का संपर्क मार्ग, सरकारें बदलीं पर नहीं बदली गांव की तस्वीर
मुख्य सड़क से महज 2 किलोमीटर का सफर बना मुसीबत, गड्ढों और गिट्टी से भरे रास्ते पर रोज जोखिम उठाने को मजबूर ग्रामीण, मोबाइल टावर नहीं होने से संचार व्यवस्था भी ठप
रितेश कुमार क्राइम रिपोर्टर (पत्रकार)
बालोद। 6 अगस्त 2026 विकास के दावों के बीच बालोद जिले के ग्राम मुल्ले के ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मुख्य सड़क से गांव तक जाने वाला लगभग 2 किलोमीटर लंबा संपर्क मार्ग पूरी तरह जर्जर हो चुका है। सड़क जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो गई है और कई हिस्सों में केवल गिट्टी बिखरी हुई है। ग्रामीणों का दावा है कि पिछले लगभग 15 वर्षों से इस सड़क की न तो ढंग से मरम्मत हुई है और न ही इसका नवीनीकरण कराया गया है।
बरसात के मौसम में सड़क की स्थिति और भी भयावह हो जाती है। गड्ढों में पानी भर जाने से दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार वाहन फिसलने और दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूली छात्र-छात्राएं प्रतिदिन इसी मार्ग से होकर पढ़ाई के लिए बाहर जाते हैं। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में काफी दिक्कत होती है, जबकि गर्भवती महिलाओं को उपचार या प्रसव के लिए अस्पताल ले जाना किसी चुनौती से कम नहीं होता।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में मोबाइल टावर भी नहीं है, जिससे अधिकांश समय नेटवर्क की समस्या बनी रहती है। आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस, स्वास्थ्य सेवाओं या प्रशासन से संपर्क करना भी मुश्किल हो जाता है। उनका कहना है कि सड़क और संचार जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में गांव का विकास प्रभावित हो रहा है।
ग्रामीणों का कहना है, “सरकारें बदलती रहीं, लेकिन हमारे गांव की तस्वीर नहीं बदली। चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन आज भी हमें 2 किलोमीटर का सफर गड्ढों और गिट्टी से भरी सड़क पर तय करना पड़ता है। पिछले करीब 15 वर्षों से यही स्थिति बनी हुई है।”
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि मुख्य सड़क से ग्राम मुल्ले तक के संपर्क मार्ग का शीघ्र निर्माण अथवा नवीनीकरण कराया जाए। साथ ही गांव में मोबाइल टावर स्थापित कर संचार व्यवस्था बेहतर बनाने की भी मांग की गई है, ताकि ग्रामीणों को सुरक्षित आवागमन और बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
(नोट: सड़क की स्थिति और 15 वर्षों से मरम्मत नहीं होने संबंधी बातें ग्रामीणों के दावों पर आधारित हैं। संबंधित विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।) :::








