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रिसाली निगम में बजट पेश नहीं; भाजपा का प्रदर्शन:महापौर पर लापरवाही का आरोप, भैंस के आगे बीन बजाकर किया विरोध

By Dinesh chourasiya

दुर्ग जिले के नगर निगम रिसाली में वर्ष 2026-27 का बजट समय पर पेश न होने पर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लगभग 19 पार्षदों और संगठन पदाधिकारियों ने निगम कार्यालय के मुख्य गेट पर धरना देकर शहर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।

इस विरोध प्रदर्शन को भाजपा पार्षदों ने अनोखे अंदाज में प्रस्तुत किया। उन्होंने दो भैंसों को महापौर शशि सिन्हा और सभापति केशव बंछोर का रूप देकर उनके सामने बीन बजाई। इसके माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि निगम प्रशासन जनता की समस्याओं के प्रति असंवेदनशील हो चुका है। प्रदर्शन के दौरान महापौर के खिलाफ नारे लगाए गए।

रिसाली निगम के नेता प्रतिपक्ष शैलेंद्र कुमार साहू ने आरोप लगाया कि बजट पेश न होना प्रशासनिक विफलता का बड़ा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि मार्च माह में बजट प्रक्रिया पूरी हो जानी चाहिए थी, लेकिन महापौर और सभापति की उदासीनता के कारण अब तक ऐसा नहीं हो पाया है।

साहू ने आगे कहा कि 40 वार्डों की जनता विकास कार्यों की उम्मीद लगाए बैठी है, लेकिन बिना बजट के कोई भी कार्य आगे नहीं बढ़ सकता। उन्होंने इस स्थिति को जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर सवाल उठाने वाला बताया।

बिना बजट 40 वार्डों के विकास कार्य रुके

विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि रिसाली क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। गर्मी की शुरुआत के साथ ही पानी की समस्या गहराने लगी है, और कई इलाकों में अभी तक स्ट्रीट लाइट नहीं लग पाई है।

शैलेंद्र साहू के अनुसार, पूरा नवरात्र बीत गया, लेकिन शहर में रोशनी की उचित व्यवस्था नहीं हो सकी। उन्होंने बताया कि श्रमिक बहुल बस्तियों में हालात और भी खराब हैं, जहां लोग पानी के लिए भटक रहे हैं।

कमीशनखोरी के आरोप और विकास कार्यों में बाधा

भाजपा पार्षदों ने महापौर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि निगम में विकास कार्यों को जानबूझकर रोका जा रहा है। पार्षद धर्मेंद्र भगत ने कहा कि पिछले चार साल तीन महीनों में शहर सरकार ने अपनी जिम्मेदारियों को नजरअंदाज किया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग 13.5 करोड़ रुपए के विकास कार्यों को तीन महीने से एमआईसी में लंबित रखा गया है। यहां तक कि छोटे-छोटे कार्यों के स्थल परिवर्तन भी महीनों तक अटके रहते हैं, जिससे विकास पूरी तरह प्रभावित हो रहा है।

राज्य सरकार से हस्तक्षेप की मांग

नेता प्रतिपक्ष ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही बजट पेश नहीं किया गया तो वे नगरीय प्रशासन मंत्री और कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग करेंगे। उनका कहना है कि निगम का शेष कार्यकाल भले ही कम बचा हो, लेकिन जनता की मूलभूत जरूरतों को पूरा करना प्राथमिकता होनी चाहिए।

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