रायगढ़ के तमनार में मिली अफीम की खेती:15 दिन में अफीम के खेती का चौथा मामला उजागर
By Dinesh chourasiya
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार में अफीम की अवैध खेती पकड़ी गई है। तमनार ब्लॉक के आमाघाट में करीब डेढ़ एकड़ में अफीमकी फसल लहलहा रही थी। 20 मार्च यानि आज मामले की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची।







जानकारी के अनुसार, झारखंड का रहने वाला मार्शल सांगां यह खेती कर कर रहा था। उसने आमाघाट के किसान से तरबूज, ककड़ी उगाने के लिए खेत लिया था। पुलिस ने उसे हिरासत में लिया है। खेत किसका है, किसके सरंक्षण में खेती हो रही थी, पुलिस इसकी जांच कर रही है।
बता दें कि पिछले 15 दिन प्रदेश में यह चौथा अफीम का खेत मिला है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक्स पर पोस्ट कर भाजपा सरकार पर अफीम की खेती को सरंक्षण देने का आरोप लगाया है।




15 दिन में चौथा मामला
बता दें कि प्रदेश में पिछले 15 दिनों में अफीम की खेती पकड़ाने का यह चौथा मामला है। इससे पहले 7 मार्च को दुर्ग में अफीम की खेती पकड़ाई थी। 10 मार्च को बलरामपुर के कुसमी में और 12 मार्च को बलरामपुर के कोरंधा में अफीम की खेती मिली थी।
पहला मामला- दुर्ग में BJP नेता कर रहा था अफीम की खेती
दुर्ग जिले के समोदा में भाजपा नेता विनायक ताम्रकर (पूर्व किसान मोर्चा अध्यक्ष दुर्ग) पिछले 5 साल से अफीम की अवैध खेती कर रहा था। ग्राम समोदा और झेनझरी के बीच स्थित फार्महाउस में करीब 5 एकड़ 62 डिसमिल क्षेत्र में उसने फसल लगवाई थी। 7 मार्च को यह अवैध खेती पकड़ी गई और उसके खेत से 7.88 करोड़ रुपए के अफीम के पौधे जब्त किए गए थे। भाजपा नेता समेत 3 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
दूसरा मामला – बलरामपुर के कुसमी में पकड़ाई अफीम
10 मार्च को बलरामपुर जिले के कुसमी में त्रिपुरी घोसराडांड़ में अवैध अफीम की 3.67 एकड़ में खेती पकड़ी गई थी। पुलिस ने 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया और करीब 4.75 करोड़ रुपये मूल्य की 4,344 किलोग्राम अफीम जब्त किया था। जबकि सरगना और भाजपा नेता की गिरफ्तारी अभी तक नहीं हुई है।
तीसरा मामला – बलरामपुर के कोरंधा में मिली अफीम की खेती
जिले में पहला मामला सामने आने के ठीक 2 दिन बाद 12 मार्च फिर एक अफीम का खेत पकड़ाया। जहां कोरंधा में 3 किसानों के करीब ढाई एकड़ जमीन पर अफीम लगी हुई थी। ग्रामीणों की सूचना के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम ने अफीम उखड़वा दिया था।
तुर्रापानी खजूरी पंचायत का हिस्सा है, लेकिन यह पहाड़ी क्षेत्र में बसा इलाका है। यह इलाका झारखंड सीमा से लगा हुआ है। यहां आम तौर पर लोगों का आना-जाना कम रहता है। यहां छिपकर अफीम की खेती की जा रही थी।




