BREAKING छत्तीसगढ़ विधानसभा में धर्म स्वतंत्रता बिल पास:सदन में BJP विधायकों ने लगाए जय श्री राम के नारे; अवैध धर्मांतरण पर आजीवन कारावास
By Dinesh chourasiya

छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज धर्म स्वतंत्रता विधेयक बिल पास हो गया है। इस विधेयक के पास होने के बाद अवैध सामूहिक धर्मांतरण कराने पर आजीवन कारावास की सजा होगी। इस बिल का मकसद बल, प्रलोभन, धोखाधड़ी या गलत जानकारी देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना है।







इस बिल के पास होते ही सदन में BJP विधायकों ने जय श्री राम के नारे लगाए। वहीं विपक्ष ने इस बिल का विरोध किया और वॉकआउट कर दिया था। विपक्ष का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के रिटायर्ड जजों के साथ-साथ सभी दलों के विधायकों की राय ली जानी चाहिए। सदन में यह बिल ध्वनि मत से पास हुआ।
विपक्ष ने किया धर्म स्वतंत्रता बिल का विरोध




धर्म स्वतंत्रता बिल पेश होते ही नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के कानून देश के कई राज्यों में पहले से हैं और मामला सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहा है, इसलिए इस बिल को जल्दबाजी में पास नहीं किया जाना चाहिए।
महंत ने मांग की कि बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए, ताकि इस पर विस्तार से चर्चा हो सके। उन्होंने कहा कि इसमें सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के रिटायर्ड जजों के साथ-साथ सभी दलों के विधायकों की राय ली जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा कोई फैसला नहीं होना चाहिए, जिससे समाज में विभाजन बढ़े। महंत ने संविधान और सहिष्णुता का हवाला देते हुए नेताओं और समाज सुधारकों के विचारों का जिक्र किया।
‘संविधान के तहत राज्य सरकार को कानून बनाने का अधिकार’
वहीं, भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कांग्रेस के आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार के समय भी ऐसा कानून लागू किया गया था, इसलिए इसे गलत बताना ठीक नहीं है।
उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया है, जिससे राज्य इस तरह का कानून नहीं बना सकते। उन्होंने कहा कि संविधान के तहत कानून बनाने का अधिकार राज्य सरकार को है और यह बिल पूरी तैयारी और चर्चा के बाद लाया गया है।
सदन की कार्यवाही चला रहे धर्मलाल कौशिक ने कांग्रेस की आपत्तियों को खारिज कर दिया और बिल पेश करने की अनुमति दे दी।
विजय शर्मा बोले- भाग रहा विपक्ष
इसके बाद कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया और पूरे दिन की कार्यवाही का बहिष्कार किया। इस पर विजय शर्मा ने कहा कि यह वॉकआउट नहीं बल्कि भागना है।
यह बिल पिछले हफ्ते ही राज्य कैबिनेट से मंजूर हुआ था। सरकार का कहना है कि इसमें 1968 के कानून को और मजबूत किया गया है और धर्मांतरण के नए तरीकों, जैसे डिजिटल और आर्थिक प्रलोभन, को भी शामिल किया गया है।
फिलहाल राज्य में ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1968’ लागू है, जिसे राज्य बनने के बाद मध्य प्रदेश से अपनाया गया था।




