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भारतमाला प्रोजेक्ट: 8 महीने बाद भी नहीं मानी गईं मांगें:सड़क निर्माण के खिलाफ दुर्ग जिले के चार गांवों के ग्रामीण फिर से आंदोलन पर

By Dinesh chourasiya

 दुर्ग जिले में भारतमाला सड़क परियोजना को लेकर एक बार फिर विरोध तेज हो गया है। सड़क निर्माण से प्रभावित चार गांवों के ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर 11 मार्च से काम रोको आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले भी आंदोलन किया गया था और प्रशासन ने छह महीने में समस्या सुलझाने का भरोसा दिया था, लेकिन करीब आठ महीने बाद भी कोई हल नहीं निकला।

धरना प्रदर्शन पर बैठे ग्रामीण।

ग्रामीणों के मुताबिक सड़क निर्माण का काम भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के तहत किया जा रहा है। इस परियोजना से घनौद, बिरेसर, चंगोरी और अंजोरा (ख) गांव के किसान और ग्रामीण प्रभावित हो रहे हैं। इन गांवों के लोगों का कहना है कि सड़क की मौजूदा डिजाइन से आने वाले समय में खेतों में पानी भरने और बाढ़ जैसी समस्या बढ़ सकती है।

आश्वासन के बाद भी नहीं हुई मांग पूरी आंदोलन को लीड करने वाले अनिल देवांगन का कहना है कि 17 जुलाई 2025 को भी इन्हीं मांगों को लेकर काम रोको आंदोलन किया गया था। उस समय प्रशासन के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर छह महीने के अंदर समाधान का भरोसा दिया था। इसके बाद ग्रामीणों ने आंदोलन रोक दिया था। अब जब तय समय से ज्यादा समय बीत गया और कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीणों ने फिर से आंदोलन का फैसला लिया है।

डिजाइन को लेकर भी आपत्ति ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के साथ बनने वाले पुल और अन्य ढांचे पर्याप्त नहीं हैं। उनका कहना है कि अगर डिजाइन में बदलाव नहीं किया गया तो बरसात के समय बाढ़ का पानी खेतों में भर सकता है। इससे हर साल बड़ी मात्रा में खेती को नुकसान होगा। किसानों का कहना है कि करीब 2500 हेक्टेयर से ज्यादा कृषि जमीन बाढ़ की चपेट में आ सकती है।

पुल की लंबाई बढ़ाने की मांग ग्रामीणों ने मांग की है कि शिवनाथ नदी और आसपास के नालों के पास बनने वाले पुल की लंबाई बढ़ाई जाए। उनका कहना है कि इस इलाके में करीब 600 मीटर तक का हिस्सा बाढ़ के पानी में डूबने वाला क्षेत्र है। इसलिए यहां कॉलम के सहारे लंबा पुल बनाकर सड़क बनाई जाए, ताकि पानी आसानी से निकल सके और खेतों में पानी न भरे। ग्रामीणों ने थनौद के पास बनने वाले अंडरपास को लेकर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इसकी ऊंचाई कम है और इससे ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और दूसरे बड़े कृषि वाहन आसानी से नहीं निकल पाएंगे। किसानों का कहना है कि इलाके में धान खरीदी केंद्र भी है, इसलिए बड़ी गाड़ियों का आना-जाना जरूरी है। ऐसे में अंडरपास की ऊंचाई बढ़ाने की जरूरत है।

ग्रामीणों के लिए अलग सर्विस रोड बनाने की मांग ग्रामीणों के अनुसार भारतमाला सड़क परियोजना के तहत थनौद इलाके में टोल प्लाजा बनने की भी योजना है। इसके लिए किसानों की जमीन पहले ही ली जा चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि टोल प्लाजा बनने के बाद स्थानीय लोगों के लिए अलग से सर्विस रोड बनाई जानी चाहिए ताकि उन्हें आने-जाने में परेशानी न हो। ग्रामीणों ने प्रशासन को आवेदन देकर साफ कहा है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं हुआ तो 11 मार्च से सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक निर्माण स्थल पर काम रोको आंदोलन किया जाएगा। यह आंदोलन अंजोरा-घनौद मार्ग पर राजा तालाब नर्सरी के पास करने की बात कही गई है।

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