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भिलाई के ‘मैत्री बाग’ के निजीकरण का मामला:राज्य शासन को हैंडओवर कर सकता है BSP, विधायक रिकेश सेन ने दिया प्रस्ताव; जल्द होगा फैसला

By Dinesh chourasiya

 भिलाई इस्पात संयंत्र टाउनशिप स्थित मैत्री बाग के संचालन को लेकर आज एक बड़ा निर्णय लिया जा सकता है। मैत्री बाग को छत्तीसगढ़ सरकार को हैंडओवर किए जाने का प्रस्ताव वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन ने बीएसपी प्रबंधन को दिया है।

इस पर जल्द फैसला हो सकता है। वहीं बीएसपी प्रबंधन की इसमें सहमति की बात भी सामने आ रही है। आगे की प्रक्रिया राज्य सरकार के साथ समन्वय के बाद तय की जाएगी।

मैत्री बाग जू के संबंध में बीएसपी प्रबंधन से चर्चा करते हुए विधायक रिकेश सेन।

निजी एजेंसी को देने की चल रही प्रक्रिया

भिलाई के ऐतिहासिक मैत्री बाग जू के संचालन को निजी हाथों में देने की प्रक्रिया चल रही है। बीएसपी प्रबंधन ने इसके लिए रुचि की अभिव्यक्ति (EOI) जारी कर दी है। करीब 60 साल पुराने इस जू को पहली बार पूर्ण रूप से आउटसोर्स करने की तैयारी है। फैसले के पीछे मुख्य वजह हर साल होने वाला भारी खर्च और लगातार बढ़ता आर्थिक घाटा बताया जा रहा है।

मैत्री बाग राज्य शासन को सौंपने को लेकर हुई बैठक में बीएसपी की ओर से एक्टिंग जीएम टाउनशिप एबी श्रीनिवास, जीएम शिक्षा विभाग शिखा दुबे, जीएम डॉ. नवीन जैन और डीजीएम टाउनशिप आरके गर्ग सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

विधायक ने दिया बीएसपी प्रबंधन को प्रस्ताव

विधायक रिकेश सेन ने बताया कि उन्होंने बीएसपी मैनेजमेंट से मैत्री बाग का संचालन पर्यटन विभाग और वन विभाग के संयुक्त सहयोग से कराने का प्रस्ताव रखा है। उनके अनुसार, राज्य सरकार के अधीन आने के बाद मैत्री गार्डन का व्यापक विकास संभव होगा।

पर्यटन सुविधाओं में विस्तार, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण संरक्षण आधारित पहलें इसमें शामिल हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि मैत्री गार्डन राज्य सरकार के हवाले होने पर यहां कार्यरत कर्मचारियों की व्यवस्था आउटसोर्सिंग मॉडल के तहत की जा सकेगी। वहीं केंटीन और अन्य सहायक सेवाओं के संचालन में भी आसानी होगी।

19 सफेद बाघ को यहां हो चुका है जन्म

यहां अब तक 19 सफेद बाघों का जन्म हो चुका है, जिनमें से 13 को देश के अलग-अलग राज्यों राजकोट, कानपुर, बोकारो, इंदौर, मुकुंदपुर और रायपुर के जू में भेजा गया है।

वर्तमान में यहां 6 सफेद बाघ मौजूद हैं। देश में कुल लगभग 160 सफेद बाघों में से 19 अकेले मैत्री बाग की देन हैं, जिससे इसकी पहचान ‘वाइट टाइगर हब’ के रूप में बनी हुई है।

गार्डन के रूप में हुई थी शुरुआत

मैत्री बाग की शुरुआत 1965 में एक गार्डन के रूप में हुई थी। बच्चों के झूले और मनोरंजन सुविधाओं से शुरू हुआ यह परिसर 1972 में जू के रूप में विकसित हुआ। शुरुआती वर्षों में यहां केवल भालू और बंदर थे, जबकि 1976–78 के बीच शेर और बाघ भी यहां लाए गए। करीब 140 एकड़ में फैला यह परिसर आज पांच श्रेणियों के लगभग 400 वन्य प्राणियों का घर है।

सांभर, नीलगाय, हायना, लेपर्ड, लोमड़ी, लकड़बग्घा और घड़ियाल जैसी प्रजातियां यहां प्रमुख आकर्षण हैं। साथ ही बोटिंग, टॉय ट्रेन, म्यूजिकल फाउंटेन और गार्डन जैसी सुविधाएं इसे परिवारों के लिए पसंदीदा घूमने की जगह बनाती हैं।

हर साल ढाई करोड़ के घाटे का अनुमान

मैत्री बाग में हर साल करीब 12 लाख पर्यटक यहां पहुंचते हैं, लेकिन इसके बावजूद जू को भारी वित्तीय भार झेलना पड़ रहा है। बीएसपी प्रबंधन हर साल करीब 4 करोड़ रुपए खर्च करता है, जबकि 20 रुपए की टिकट दर से सालाना आय सिर्फ 1.5 करोड़ रुपए होती है। यानी लगभग ढाई करोड़ का घाटा हर वर्ष उठाना पड़ रहा है।

इसी कारण बीएसपी अब पूरे जू के संचालन को निजी एजेंसी के हवाले करने की तैयारी में है। फिलहाल बोटिंग, गार्डन और पार्किंग जैसी सुविधाएं ठेके पर चल रही हैं, लेकिन पहली बार पूरा जू आउटसोर्स होगा। निजी प्रबंधन से जहां आधुनिक सुविधाओं और तेजी से विकास की उम्मीद है, वहीं टिकट दर बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है।

बीएसपी के स्कूलों को बड़े शिक्षण ग्रुप को लीज पर देने की बात

वहीं भिलाई इस्पात संयंत्र की टाउनशिप स्थित स्कूलों को बड़े शिक्षण समूहों को लीज पर दिया जा सकता है। जो विद्यार्थी अभी इन स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं उनका बारहवीं कक्षा तक शिक्षण शुल्क वर्तमान दर पर ही लिया जाएगा। आगामी 30 वर्ष लीज पर बड़े एजुकेशनल ग्रुप को दिए जाने पर भी सहमति बनी है।

वहीं बीएसपी मैनेजमेंट और छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के बीच हुए एमओयू में कुछ नियम ऐसे हैं जिनको लेकर संयंत्र कर्मचारियों को नुकसान का अंदेशा है। कुछ नियमों को लेकर कर्मियों ने आपत्ति की है। विधायक रिकेश सेन ने इस संबंध में जल्द ही सीएसपीडीसीएल से चर्चा की बात कही है।

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