भिलाई के खुर्सीपार में शराब दुकान खोलने का तीसरी जगह भी विरोध:हत्या से शुरू हुआ शराब दुकान का विरोध अब खेल मैदान तक पहुंचा, पार्षद के नेतृत्व में खिलाड़ी और महिलाओं ने खोला मोर्चा
By Dinesh chourasiya

भिलाई के खुर्सीपार क्षेत्र में शराब दुकान का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब यह विवाद तीसरी जगह तक पहुंच गया है। वार्ड 51 के राजेंद्र प्रसाद नगर में संचालित शराब दुकान को पहले हत्या की वारदात के बाद हटाया गया, फिर शिवाजी नगर में शिफ्ट करने की कोशिश की गई, और अब स्टेडियम परिसर में दुकान खोलने से पहले ही स्थानीय लोगों का आक्रोश फूट पड़ा है। रविवार से ही नागरिकों और पार्षदों ने खेल परिसर के सामने धरना शुरू कर दिया है।
खिलाड़ी यहां करते हैं प्रैक्टिस स्थानीय लोगों ने बताया कि खेल परिसर में शराब दुकान खोलना काफी गैरजिम्मेदारी वाला फैसला है। यहां बालक व बालिका दोनों ही खिलाड़ी प्रैक्टिस करते हैं। यहां पर शराब दुकान खोलने से यहां का वातावरण खराब हो जाएगा। महिलाओं और खिलाड़ियों की सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल खड़ा हो जाएगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि खेल परिसर में किसी भी कीमत पर शराब दुकान नहीं खोलने देंगे।







हत्या के बाद पहली जगह से हटाई गई थी दुकान राजेंद्र प्रसाद नगर स्थित शराब दुकान खुर्सीपार गेट के आगे फोरलेन के किनारे थी। स्थानीय लोगों का आरोप था कि दुकान के आसपास आए दिन नशे में झगड़े होते रहते थे। बीते 17 सितंबर को नशे में धुत एक युवक ने एस. कामेश राव की हत्या कर दी। घटना से पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैल गया। हत्या के बाद नागरिकों ने शराब दुकान को हटाने की मांग को लेकर हंगामा किया। बढ़ते दबाव के बाद प्रशासन ने दुकान को वहां से हटाने का निर्णय लिया।
शिवाजी नगर में खुलने से पहले हुआ 13 दिन आंदोलन पहली जगह से हटाने के बाद आबकारी विभाग ने दुकान को करीब एक किलोमीटर दूर शिवाजी नगर में खोलने की योजना बनाई। लेकिन 25 सितंबर को दुकान का शटर खुलने से पहले ही स्थानीय महिलाएं सुबह 9 बजे मौके पर पहुंच गईं और विरोध शुरू कर दिया। महिलाओं ने साफ कहा कि यहां शराब दुकान नहीं खुलने देंगे। यह आंदोलन लगातार 13 दिन तक चला। आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा और दुकान को वहां से भी नहीं खोला गया।

अब स्टेडियम बना नई जगह, लेकिन यहां भी विरोध शुरू प्रशासन ने तय किया था कि वार्ड क्रमांक 51 में ही तांदुला शाखा नहर के किनारे स्थित खुर्सीपार स्टेडियम परिसर की दो बड़ी दुकानों में विदेशी कंपोजिट शराब दुकान संचालित की जाएगी। लेकिन रविवार को जैसे ही इस फैसले की जानकारी स्थानीय लोगों को हुई, यहां भी विरोध शुरू हो गया। वार्ड-47 के पार्षद और जोन अध्यक्ष भूपेंद्र यादव के नेतृत्व में नागरिकों ने स्टेडियम के सामने धरना शुरू कर दिया। पार्षद यादव का कहना है कि यह स्टेडियम बच्चों और युवाओं के लिए खेल प्रशिक्षण का केंद्र है। यहां एकेडमी का संचालन होता है, और सीएसीएस द्वारा आयोजित स्पर्धा से कई बच्चों का चयन राज्य स्तर तक हुआ है। कुम्हारी से दुर्ग तक के बच्चे यहां खेलते हैं। महिलाएं अपने बच्चों को छोड़ने आती हैं। ऐसे में शराब दुकान खुलना सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक होगा।




लोग विरोध में अड़े, कहा- नहीं खुलने देंगे दुकान विरोध प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने कहा कि वे किसी भी सूरत में खेल परिसर के आसपास शराब दुकान नहीं खुलने देंगी। उनका कहना है कि बच्चों के भविष्य और सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। विरोध कर रही महिलाओं का कहना था कि अगर प्रशासन ने जबरदस्ती की तो हम और भी बड़े आंदोलन के लिए तैयार हैं। सोमवार को महिलाएं दुर्ग कलेक्टर से मिलने कार्यालय पहुंची, लेकिन मुलाकात न होने की वजह से वे खाली हाथ लौट आईं।

प्रशासन की बढ़ी मुश्किलें, नई जगह की तलाश बनी चुनौती तीन बार स्थान बदलने के बाद भी शराब दुकान का विरोध थम नहीं रहा है। आबकारी विभाग और प्रशासन अब तीसरी बार विरोध झेल रहा है। इस बार विरोध स्थल संवेदनशील है, क्योंकि यह खेल परिसर से जुड़ा हुआ है।
सूत्रों के मुताबिक, प्रशासन अब दुकान के लिए चौथी जगह तलाशने पर विचार कर सकता है, हालांकि आधिकारिक घोषणा अभी तक नहीं हुई है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि जिस तरह स्कूलों, अस्पतालों और धार्मिक स्थलों के आसपास शराब दुकान प्रतिबंधित होती है, उसी तरह खेल परिसरों को भी ‘नो-लिकर जोन’ घोषित किया जाए। उनका कहना है कि जहां बच्चे खेलते हैं, वहां शराब दुकान होना समाज के लिए गलत संदेश है।




