Uncategorized

दिल्ली हाईकोर्ट जज के बंगले पर मिले 15 करोड़ कैश:सुप्रीम कोर्ट बोला- अफवाहें फैलाई गईं, ट्रांसफर का फैसला इससे अलग; रिपोर्ट मिलने पर अगला एक्शन होगा

By Dinesh chourasiya

जस्टिस यशवंत वर्मा को अक्टूबर 2021 में इलाहाबाद से दिल्ली हाईकोर्ट में भेजा गया था। - Dainik Bhaskar

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट जज यशवंत वर्मा के घर पर मिले 15 करोड़ कैश को लेकर कहा कि इस बारे में गलत सूचना और अफवाहें फैलाई जा रही हैं। जस्टिस वर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर करने का प्रस्ताव स्वतंत्र और इन हाउस जांच प्रक्रिया से अलग है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस आज CJI संजीव खन्ना को प्राइमरी रिपोर्ट सौंपेंगे। इसकी जांच के बाद आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।

दरअसल, होली की छुटि्टयों के दौरान जस्टिस वर्मा के सरकारी बंगले पर आग लग गई थी। उस वक्त वे घर पर नहीं थे। परिवार ने फायर ब्रिगेड को आग लगने की जानकारी दी। टीम जब आग बुझाने गई तब उन्हें कैश मिला।

इधर, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जस्टिस वर्मा के वापस इलाहाबाद ट्रांसफर का विरोध कर रहा है। एसोसिएशन का कहना है कि कॉलेजियम के फैसले से गंभीर सवाल उठ रहा है कि क्या हम कूड़ादान हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट जज के घर कैश मामले में अब तक क्या-क्या हुआ

  • कॉलेजियम ने इमरजेंसी मीटिंग की : मामले की जानकारी मिलते ही CJI जस्टिस संजीव खन्ना ने कॉलेजियम की इमरजेंसी मीटिंग बुलाई। सूत्रों के मुताबिक, तबादले से संबंधित प्रस्ताव को जानबूझकर अपलोड नहीं किया गया है। इन-हाउस जांच पर भी विचार किया जा रहा है।
  • महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने की चर्चा : कॉलेजियम के कुछ सदस्यों का सुझाव था कि जस्टिस वर्मा से इस्तीफा मांगा जाना चाहिए। अगर वे इनकार करते हैं, तो संसद में उन्हें हटाने के लिए महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। सूत्रों के मुताबिक ट्रांसफर की सिफारिश के साथ उनके खिलाफ जांच और महाभियोग चलाए जाने की चर्चा है।

राज्यसभा में उठा मामला

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने इस मुद्दे को सदन में उठाते हुए ज्यूडिशियल अकाउंटेबिलिटी पर चर्चा की मांग की। राज्यसभा के चेयरमैन और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने इस पर जवाब देते हुए कहा कि सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है और वह इस मुद्दे पर एक स्ट्रक्चर्ड डिस्कशन करवाएंगे।

जयराम रमेश ने कहा- आज सुबह हमने एक चौंकाने वाली खबर पढ़ी, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट के एक जज के घर से भारी मात्रा में नकदी बरामद होने की बात सामने आई है। रमेश ने यह भी याद दिलाया कि पहले 50 सांसदों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक जज के खिलाफ महाभियोग का नोटिस दिया था, लेकिन उस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने चेयरमैन से अनुरोध किया कि न्यायिक जवाबदेही बढ़ाने के लिए सरकार को दिशा-निर्देश दिए जाएं।

जगदीप धनखड़ बोले- प्रभावी सिस्टम की जरूरत

सिब्बल बोले- नियुक्ति प्रक्रिया और पारदर्शी बनानी होगी

सुप्रीम कोर्ट बार काउंसिल के अध्यक्ष कपिल सिब्बल ने कहा- मुझे मामले की बारीकियों की जानकारी नहीं है, लेकिन निश्चित रूप से न्यायपालिका के अंदर भ्रष्टाचार का मुद्दा बहुत गंभीर मुद्दा है।

उन्होंने कहा- मुझे लगता है कि अब वक्त आ गया है कि सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर विचार करना शुरू करे कि नियुक्ति प्रक्रिया कैसे होनी चाहिए। इसे और अधिक पारदर्शी होना चाहिए और ज्यादा सावधानी से किया जाना चाहिए।

Related Articles

Back to top button