
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा-पीड़ित महिला शिकायत करने थाने क्यों जाए:देश में ऑनलाइन सिस्टम क्यों नहीं; केंद्र सरकार से 6 हफ्ते के अंदर जवाब मांगा
By Dinesh chourasiya
सुप्रीम कोर्ट ने देश में अपराध पीड़ित महिलाओं को शिकायत दर्ज करवाने में होने वाली परेशानी पर चिंता जताई है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एनके सिंह की बेंच ने केंद्र सरकार से पूछा, ‘आखिर पीड़ित महिला थाने क्यों जाए? महिलाओं की शिकायतें दर्ज करने के लिए देश में ऑनलाइन प्रणाली क्यों नहीं है?’
बेंच महिला सुरक्षा के लिए गाइडलाइंस बनाने की मांग से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में पब्लिक ट्रांसपोर्ट में महिलाओं से सामाजिक व्यवहार के नियम, फ्री ऑनलाइन वल्गर कंटेंट पर पाबंदी और दुष्कर्मियों के बधियाकरण की सजा तय करने की मांग की गई है।







कोर्ट ने केंद्र से 6 सप्ताह में हलफनामा मांगा है। वहीं, याचिकाकर्ता को निर्देश दिया है कि वह सभी राज्यों में महिलाओं खासतौर पर महिला वकीलों से इस मुद्दे पर सुझाव मांगे। समस्याओं का समाधान एकत्रित कर उन्हें कोर्ट में पेश करे।
कोर्ट रूम लाइव
- याचिकाकर्ता: उबर सर्विस भी महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं रही। बेंगलुरु में उबर ऑटो की घटना की पीड़िता के पति को शिकायत दर्ज कराने के लिए धक्के खाने पड़े।
- केंद्र सरकार: याचिका में रखी गई मांगें व्यापक प्रकृति की हैं। ये प्रैक्टिकल नहीं हैं।
- जस्टिस सूर्यकांत: बिल्कुल सही। मगर ये तकनीकी बातें याचिका के असली विचार पर बाधा नहीं बननी चाहिए।
- केंद्र सरकार: हमें जवाब दायर करने के लिए समय दिया जाए।
- याचिकाकर्ता: पीड़ितों को चक्कर काटने पड़ते हैं। कभी पुलिस दूसरे थाने का केस बताती है ताे कभी कुछ।
- जस्टिस सूर्यकांत: पीड़िता को शिकायत दर्ज कराने पुलिस के पास क्यों जाना चाहिए? देश में इसका ऑनलाइन सिस्टम क्यों नहीं है?
सेंट्रल एजेंसी हो, जहां महिलाएं ऑनलाइन शिकायत करें




सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि एक सेंट्रल एजेंसी होनी चाहिए, जहां महिलाएं ऑनलाइन शिकायतें भेज सकें। यह आप तय करें कि शिकायत पर कहां की पुलिस और कौनसा थाना कार्रवाई करेगा। थाने और जांच अधिकारी की सूचना आप पीड़िता को दे दें।
इससे 2 चीजें हमेशा के लिए हल हो जाएंगी। न तो पीड़िताएं थाने जाने को मजबूर होंगी और न ही थानों के क्षेत्र का विवाद होगा। याचिकाकर्ता चाहे तो देश की सभी हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाली महिला वकीलों की मदद लेकर इस पर सुझाव व विचार की एक रिपोर्ट कोर्ट को दे।
याचिका में ये मांगें भी शामिल
- ऑनलाइन पोर्नोग्राफी और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर अनफिल्टर्ड अश्लीलता पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की मांग की है, उनका दावा है कि पोर्नोग्राफिक कंटेंट तक आसान पहुंच का सीधा संबंध देश भर में यौन अपराधों के बढ़ने से है।
- वर्क प्लेस पर CCTV, रेप और सेक्शुअल हैरेसमेंट केस की फास्ट ट्रैक सुनवाई और महिलाओं के खिलाफ अपराधों के आरोपी सांसदों/विधायकों के चुनाव लड़ने पर तब तक रोक लगाने की मांग की है, जब तक कि उन्हें बरी नहीं कर दिया जाता।





