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CG के इस अस्पताल की बड़ी लापरवाही जिनको दिखाई देता था उनका भी कर दिया मोतियाबिंद का ऑपरेशन डॉक्टर समेत 3 सस्पेंड

By Dinesh chourasiya

मेरी मां को गांव की मितानिन अपने साथ लेकर गई। हम घर वालों को कुछ नहीं बताया गया। आंखों की सर्जरी करवाकर मां को घर में छोड़ गए। दो दिन बाद मां की तबीयत बिगड़ गई। आंखों में इन्फेक्शन के कारण दिखाई देना बंद हो गया। कमाने वाला अपने परिवार में अकेला मैं ही हूं, त्योहार सिर पर है हम यहां पड़े हैं। ये बातें दंतेवाड़ा जिले के बींजाम गांव के अजय ने कही है।

दंतेवाड़ा की 59 साल की सुको बाई की आंखों का जबरन ऑपरेशन कर दिया गया। उनके बेटे अजय ने बताया कि सहमति छोड़िए ऑपरेशन की खबर तक नहीं दी गई। इन्फेक्शन के दर्द से मां की आंखें सूज गई हैं। अंबेडकर अस्पताल के नेत्र विभाग के आइसोलेटेड वार्ड में हैं। सुको बाई के अलावा ऐसे ही 12 मरीज यहां हैं। पढ़िए इस रिपोर्ट में बेबसी और सिस्टम की लापरवाही की कहानी…

घर से जबरन मितानिन लेकर गई

अजय ने बताया कि उसकी मां सुको बाई ने घर में कभी किसी को नहीं बताया कि उसे देखने में कोई परेशानी हो रही है। कभी-कभी आंख में कुछ चला जाता था और दर्द होता था, बस इतना ही, लेकिन घर में मेरे भाई और भाभी भी रहते हैं। गांव की मितानिन ने मेरी मां को अस्पताल ले जाकर बिना किसी को बताए उसका ऑपरेशन करवा दिया। अब हम परेशान हैं। कम से कम उसे हमें बताना तो चाहिए था।

सभी को आइसोलेटेड वार्ड में रखा गया है।

65 साल की हिरदई की आंखों का भी ऑपरेशन

वहीं दंतेवाड़ा जिले के बींजाम की रहने वाली 65 साल की हिरदई का भी मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया गया है। ऑपरेशन के बाद इनके आंखों में सूजन आ गई है। आंख से अब कुछ दिखाई नहीं दे रहा है। आनन-फानन में परिजन इन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जिसके बाद इन्हें रायपुर रेफर कर दिया गया है।

ऑपरेशन के पहले मुझे बताया नहीं गया था

हालांकि रायपुर रेफर करने से पहले हिरदई ने मिडिया से बातचीत की। उन्होंने कहा कि 18 अक्टूबर को मितानिन मुझे अस्पताल लेकर आई थी। यहां लाने से पहले मुझे बताया नहीं गया था कि आंखों का ऑपरेशन किया जाएगा। मेरे साथ मेरे परिवार के कोई भी सदस्य नहीं थे। जब अस्पताल लाया गया तो दोपहर के वक्त मुझे ऑपरेशन थियेटर में लेकर गए, जिसके बाद ऑपरेशन किया गया।

ऑपरेशन से पहले दिखाई देता था, लेकिन ऑपरेशन बाद में हो गया बंद

दूसरे दिन डिस्चार्ज कर घर भेज दिया गया था। जब घर गई तो आंखों में दर्द होना शुरू हुआ। कुछ दिन के बाद सूजन आ गई। आंख पूरी तरह से बंद हो गई और दिखना बंद हो गया, जिसके बाद बेटे ने अस्पताल के डॉक्टरों से संपर्क किया। फिर मुझे अस्पताल लाया गया है। हिरदई ने बताया कि ऑपरेशन से पहले उन्हें दिखाई देता था, लेकिन ऑपरेशन के बाद से उन्हें एक आंख से दिखना बंद हो गया है।

बेटा बोला- हमें नहीं दी जानकारी

हिरदई के बेटे पतिराम नाग ने कहा कि, ऑपरेशन से पहले मेरी मां बिल्कुल ठीक थी। ऑपरेशन के बाद अब इन्हें दिखाई नहीं दे रहा है। गांव की मितानिन इन्हें अस्पताल लेकर आईं थी, जिसकी जानकारी हमें भी नहीं थी। अब रायपुर के अस्पताल लेकर जा रहे हैं। डॉक्टरों से लापरवाही हुई है, जिसका खामियाजा अब हमें उठाना पड़ रहा है।

मितानिन बोलीं- डॉक्टर्स ने कहा था मरीजों को लेकर आओ

पीड़ित महिला और परिजनों से बातचीत करने के बाद हम बींजाम गांव पहुंचे। यहां हमें मितानिन राजो बाई मिली। राजो ने बातचीत में बताया कि हमें अस्पताल के डॉक्टरों ने कहा था कि जो भी मोतियाबिंद के मरीज हैं, उन्हें अस्पताल लेकर आओ। बस हमने निर्देशों का पालन किया।

उन्होंने कहा कि मरीजों ने हमसे खुद कहा था कि हमारा ऑपरेशन करवा दो आंखों में परेशानी है, जिसके बाद ही उन्हें लेकर गए थे। हालांकि उनके परिजन अगले दिन उनके पास अस्पताल पहुंचे थे। मितानिन ने कहा कि वह बींजाम के स्कूल पारा के कुल 5 मरीजों को लेकर गई थी, जिसमें से एक की आंखों में तकलीफ बढ़ गई है। बाकी ठीक हैं।

सिर्फ बींजाम से ही 13 मरीज गए थे अस्पताल

दंतेवाड़ा जिला अस्पताल में कुल 39 मरीजों का ऑपरेशन हुआ इनमें 12 मरीज सिर्फ बींजाम के ही हैं। वहीं ऑपरेशन के 2 दिन बाद 2 मरीजों की स्थिति बिगड़ी थी, जिन्हें सबसे पहले अस्पताल लेकर गए थे। वहीं सोमवार को एक और महिला को दिखना कम हुआ था, जिसके बाद आनन-फानन में उन्हें भी लेकर गए। वहीं इस गांव के अब तक 3 मरीज रायपुर रेफर किए जा चुके हैं।

कुछ की स्थिति ठीक

बींजाम गांव में ही हम एक और पेशेंट पांडे बाई के घर गए। हालांकि, उनकी स्थिति ठीक थी। पांडे बाई ने बताया कि उनका भी मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ है। ऑपरेशन के बाद से उन्हें अब तक कोई तकलीफ नहीं है। उनके साथ जो लोग गए थे उन्हें ज्यादा परेशानी हुई है।

39 मरीजों का हुआ था ऑपरेशन

दंतेवाड़ा जिला अस्पताल में कुल 39 लोगों का मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया गया। अब 14 लोगों की आंखों में दिक्कत आ गई है। ऑपरेशन के बाद अब किसी को एक आंख से पूरी तरह दिखना बंद हो गया है तो किसी को धुंधला दिख रहा है। इनमें से 10 लोगों को पहले ही राजधानी रायपुर रेफर कर दिया गया था। अब अन्य 4 मरीजों को रायपुर रेफर किया गया है।

जिला अस्पताल की OT को सैनेटाइज किया गया

ऑपरेशन के बाद अब जिला अस्पताल की OT को सैनेटाइज किया गया है। साथ ही OT को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। इस OT में पहले 18 और फिर 22 अक्टूबर को ऑपरेशन किया गया है। वहीं ऑपरेशन और मैनेजमेंट में लापरवाही के बाद शासन-प्रशासन ने एक्शन लिया।

माइक्रोबायोलॉजिस्ट की सेवा समाप्त

पहले सर्जरी करने वाली डॉ गीता नेताम, OT इंचार्ज ममता वैध और ऑपरेशन में सहयोगी दीप्ति टोप्पो को निलंबित कर दिया गया था, जिसके बाद सोमवार को जूनियर साइंटिस्ट अभिषेक मंडल और माइक्रोबायोलॉजिस्ट उमाकांत तिवारी की सेवा समाप्त कर दी गई है। जिला अस्पताल के CS आर एल गंगेश ने कहा कि अब तक 14 मरीजों को दिक्कत हुई है। हम और जांच कर रहे हैं।

विपक्ष के डॉ. राकेश गुप्ता क्या बोले

डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि इस मामले में डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ को सस्पेंड करना ठीक नहीं है। पहले जांच की अनुमति दी जानी चाहिए थी। ऐसी घटनाओं का कारण साफ-सफाई और दवाइयां हैं। मरीजों की हालत देखने के बाद डॉ. गुप्ता ने कहा कि ऐसे मामलों में 50 फीसदी तक रोशनी वापस नहीं आती।

अस्पताल के अधीक्षक बोले, कब देख पाएंगे नहीं बता सकते

अंबेडकर अस्पताल के अधीक्षक डॉ संतोष सोनकर ने कहा कि 12 मरीजों को आइसोलेटेड वार्ड में रखा गया है। वो कब देख पाएंगे ये कह पाना मुमकिन नहीं है। क्योंकि इसमें अभी एक दो सप्ताह का समय लग सकता है। सभी की आंखों से इंफेक्शन हटाने की सर्जरी की गई है। मरीज की स्थिति स्टेबल है।

मरीजों से मिलने पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल।

डॉक्टर समेत 3 सस्पेंड

दंतेवाड़ा से मरीजों के रेफर होने के बाद रविवार को स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी अस्पताल पहुंचे और मरीजों का हाल-चाल जाना। इसके बाद सर्जरी करने वाली डॉ गीता नेताम, ममता वेदे स्टाफ नर्स और दीप्ति टोप्पो नेत्र सहायक अधिकारी को सस्पेंड किया गया है।

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