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दुर्ग पुलिस का साइबर रावण – इसका मुख्य उद्देश्य साइबर धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाओं पर रोकथाम लगाना और लोगों को सतर्क करना है।

By Dinesh chourasiya

 

छत्तीसगढ़ पुलिस के राज्यव्यापी साइबर जन जागरूकता पखवाड़ा अभियान के तहत, दुर्ग जिले में साइबर सुरक्षा और साइबर अपराध से बचाव के लिए निरंतर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। पुलिस महानिरीक्षक दुर्ग रेंज, श्री रामगोपाल गर्ग के मार्गदर्शन और पुलिस अधीक्षक दुर्ग, श्री जितेन्द्र शुक्ला के पर्यवेक्षण में यह अभियान चल रहा है। इसके अंतर्गत विभिन्न माध्यमों का उपयोग कर साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा रही है।

दुर्ग पुलिस द्वारा साइबर अपराध से बचाव के लिए ‘साइबर रावण’ तैयार किया गया है, जो यह संदेश देता है कि लोगों की अज्ञानता ही उसकी ताकत है। विजयदशमी पर रावण दहन के प्रतीक के माध्यम से समाज में मौजूद बुराइयों का नाश करने का संदेश दिया जाता है। इसी तर्ज पर ‘साइबर रावण’ यह बताता है कि साइबर अपराधों के पीछे लोगों की जागरूकता की कमी है। जागरूकता का संदेश देने के लिए ही दुर्ग पुलिस ने यह कदम उठाया है।

इस न्यू तरुण खेल एवं सांस्कृतिक समिति पदमनाभपुर के द्वारा मिनी स्टेडियम में बने ‘साइबर रावण’ के पुतले पर प्रमुख साइबर अपराधों के नाम जैसे – ओटीपी फ्रॉड, टेलीग्राम लाइक और शेयर फ्रॉड, इंश्योरेंस फ्रॉड, ओएलएक्स आर्मी फ्रॉड, सेक्सटॉर्शन, लोन ऐप फ्रॉड, और व्हाट्सऐप डीपी फ्रॉड लिखे गए हैं। इसके साथ ही यह संदेश भी दिया गया है, “साइबर जागरूकता ही एक उपाय है, जो इस साइबर रावण का अंत कर सकती है।” दुर्ग पुलिस ने जनता से ‘साइबर प्रहरी’ अभियान से जुड़ने और साइबर अपराधों के खिलाफ सतर्क रहने की अपील की है।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (दुर्ग), श

अभिषेक झा ने बताया कि साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूकता फैलाने के इस अनोखे प्रयास के तहत ‘साइबर रावण’ तैयार किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य साइबर धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाओं पर रोकथाम लगाना और लोगों को सतर्क करना है।

हर साल हजारों लोग साइबर अपराधियों का शिकार होते हैं, जिससे उन्हें लाखों-करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। इस ‘साइबर रावण’ के माध्यम से दुर्ग पुलिस की यह पहल साइबर अपराध के खिलाफ जनजागरूकता को बढ़ावा देगी और साइबर अपराधों में कमी लाने में मदद करेगी।

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