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चक्रवाती तूफान ‘मोन्था अब कमजोर…डायवर्टडेट रूट पर ट्रेनें 29 घंटे लेट:केरल, ओडिशा, तेलंगाना, महाराष्ट्र जाने वाले यात्री परेशान, लो-प्रेशर सिस्टम से कुछ जिलों में आज बारिश होगी

By Dinesh chourasiya

छत्तीसगढ़ में आज मौसम सामान्य होने की संभावना है। चक्रवाती तूफान ‘मोन्था’ अब कमजोर होकर लो-प्रेशर सिस्टम में बदल गया है और पूर्वी विदर्भ और दक्षिण छत्तीसगढ़ की तरफ बढ़ रहा है। अगले 24 घंटों में यह सिस्टम और कमजोर होकर साधारण निम्न दबाव क्षेत्र बन जाएगा और उत्तर की ओर बढ़ेगा।

मौसम विशेषज्ञों की मानें तो तूफान जैसी स्थिति कहीं नहीं रहेगी, लेकिन इसके असर से कुछ जगहों पर गरज चमक के साथ तेज बारिश हो सकती है। बिजली गिर सकती है। हालांकि मौसम विभाग ने प्रदेश के किसी भी संभाग के लिए अलर्ट नहीं जारी किया है।

पिछले 24 घंटों में बड़े बचेली में सबसे ज्यादा 60 मिमी बारिश दर्ज हुई। वहीं, दुर्ग में अधिकतम तापमान 28.2°C और पेंड्रा में न्यूनतम तापमान 19.8°C रहा।

वहीं चक्रवाती तूफान मोन्था के असर से रेलवे यातायात भी प्रभावित हुआ है। कई ट्रेनों को उनके नियमित रूट की जगह डायवर्ट किया गया। डायवर्ट रूटों पर ट्रेनें 29 घंटे तक की देरी से चल रही हैं और यह देरी और बढ़ सकती है।

डायवर्ट किए गए रूटों में पहले से ही यात्री और मालगाड़ियों का दबाव होने के कारण सामान्य रूट की ट्रेनें भी प्रभावित हो रही हैं। इससे केरल, ओडिशा, तेलंगाना, महाराष्ट्र, दिल्ली जाने वाले यात्री परेशान हैं।

बस्तर में किसानों को बड़ा नुकसान

पिछले दिनों मोन्था के चलते हुई बारिश ने बस्तर में किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। कहीं खड़ी फसल झुक गई तो कहीं कट चुके धान की बोरियां और ढेर खेतों में भीगकर सड़ने लगे हैं।

कोंडागांव जिले के ग्राम आदनार में बारिश से ‘बड़को नाला पुलिया’ धंस गई। इससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया। यह पुलिया लिंगोंपथ-मर्दापाल-भाटपाल-नारायणपुर मार्ग को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़क पर स्थित है। यह सड़क प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत बनाई गई थी।

लगातार बारिश के कारण पुलिया का एक हिस्सा धंस गया और पानी का दबाव बढ़ने से उसका बाकी का हिस्सा भी टूट गया। गनीमत रही कि उस समय कोई वाहन पुल पार नहीं कर रहा था, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।

अक्टूबर में अब तक 59 फीसदी ज्यादा बारिश

छत्तीसगढ़ से मानसून 15 अक्टूबर तक लौट गया। मानसून सीजन 30 सितंबर को ही खत्म माना जाता है। इसलिए अक्टूबर में होने वाली बारिश को मौसम विभाग सालाना वर्षा के रूप में रिकॉर्ड करता है। इस साल अब तक 1 से 26 अक्टूबर तक 89.4 मिमी पानी गिर चुका है। 26 दिन की औसत वर्षा 56.2 मिमी है। यानी औसत से 59 फीसदी ज्यादा पानी अब तक गिर चुका है।

बारिश का फसलों पर पड़ेगा असर

अगले कुछ दिनों में होने वाली बारिश और तेज हवा का असर फसलों पर पड़ेगा। खेतों में खड़ी फसल तेज हवा और बारिश के कारण खराब हो सकती है। जिन किसानों की फसल की कटाई हो चुकी है और उन्हें सुरक्षित भंडारण नहीं किया होगा तो फसल के भी भीगने की आशंका है।

कृषि मौसम विभाग ने इस संबंध में किसानों को फसलों को बारिश से बचाने की सलाह दी।

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