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CG में घर बैठे करा सकेंगे किरायेदारों का वेरिफिकेशन: छत्तीसगढ़ में ऐप की पायलट टेस्टिंग ; डिप्टी CM ने मकान मालिक को कॉल कर ली डिटेल

By Dinesh chourasiya

छत्तीसगढ़ में किरायेदार के पुलिस वैरिफिकेशन की प्रकिया आसान होगी। घर बैठे अब मकान मालिक अपने किराएदार की जानकारी संबंधित थाने तक पहुंचा पाएंगे। प्रदेश की सरकार ने वेरिफिकेशन प्रकिया आसान बनाने के लिए एक ऐप्लिकेशन तैयार किया है।

इस ऐप के जरिए किरायेदार ही नही बल्कि नौकर, ड्राइवर सहित दुकानों में काम करने वाले कर्मचारियों की पूरी जानकारी बगैर थाने जाए ऑनलाइन दे सकेंगे। ऐप की पायलट टेस्टिंग चल रही है। फिलहाल इसे लॉन्च होने में अभी वक्त है।

गृहमंत्री ने ली जानकारी

ऐप को लेकर गृहमंत्री विजय शर्मा ने सॉफ्टवेयर में मौजूद डेटा में से एक मोबाइल नंबर डायल कर एक मकान मालिक की ओर से दी गई जानकारी और ऐप्लिकेशन के बारे में बातचीत की। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया ‘X’ पर पोस्ट किया गया है।

उन्होंने बताया कि ऐप में केवल एक सुविधा नहीं बल्कि अनेकों सुविधाएं होंगी। जन सामान्य के लिए समर्पित इस ऐप की पायलट टेस्टिंग के लिए एक जिले में ट्रायल किया गया है।

लोग नही कराते थाने जाकर वैरिफिकेशन

ऐसा देखा गया है कि बहुत से मकान मालिक मकान किराये पर तो दे देते हैं, लेकिन उनकी जानकारी पुलिस को नहीं देते। मकान मालिक के पास भी खुद किरायेदार की पूरी जानकारी नहीं होती है। सिर्फ उनका नाम और पता जानते हैं। इसी का फायदा अपराधी तत्व उठाते हैं। बाहर से आकर शहर में छिपकर रहते हैं। उसके बाद यहां भी अपराध करते हैं।

ऐप से होगा फायदा

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सत्यापन की प्रकिया नि:शुल्क होती है। इसके बाद भी लोग थाने आकर किरायेदार का वैरिफिकेशन कराने में देरी करते है। ऐप्लीकेशन बनने से लोगो को आसानी होगी और इससे आपराधिक तत्वों पर भी नजर रखी जा सकेगी।

दो साल पहले मकान मालिक-किरायेदार के लिए बनाए गए थे नए नियम

छत्तीसगढ़ में किराएदार और मकान मालिकों को लेकर राज्य सरकार ने अक्टूबर 2022 में नए नियम लागू किए थे। इसके तहत छोटे शहरों, गांवों के मकान मालिक और किरायेदारों को अपने विवाद निपटाने के लिए नगर निगम तक नहीं जाना होगा। वे नगर पालिका या नगर पंचायतों में जाकर विवाद निपटा सकेंगे।

डिप्टी कलेक्टर को भाड़ा नियंत्रक अधिकारी और पीठासीन अधिकारी के रूप में विवादों का निपटारा करने की जिम्मेदारी दी गई थी। तब सामने आया था कि रायपुर में ही करीब 3 लाख मकानों में किरायेदार रह रहे हैं और पूरे प्रदेश में इनकी संख्या करीब 10 लाख है।

मकान मालिक और किरायेदारों के बीच विवाद के मुख्य बिंदू

  • मकान मालिक द्वारा एग्रीमेंट का उल्लंघन
  • किरायेदार द्वारा एग्रीमेंट का उल्लंघन
  • किरायेदार का मकान खाली नहीं करना
  • मकान मालिक द्वारा बिजली काट देने की शिकायत पर
  • मकान मालिक द्वारा बिजली का एक्टेंशन नहीं देने पर
  • मकान मालिक द्वारा पानी की सप्लाई रोक देने पर
  • किरायेदार के किराया नहीं देने पर

3 स्तर पर विवादों का निराकरण

  • निकायों में सुनवाई
  • ट्रिब्यूनल में सुनवाई
  • हाईकोर्ट में सुनवाई

ऐसे होगा विवाद का निपटारा

  • मकान मालिक और किरायेदार के बीच एग्रीमेंट नहीं है, तो पहले 6 माह का नोटिस मकान खाली कराने के लिए दिया जाता है। ऐसे में किराएदार का बेजा कब्जा माना जाता है।
  • एग्रीमेंट है तो भाड़ा नियंत्रक अधिकारी देखते हैं कि दोनों के बीच हुए समझौते का उल्लंघन तो नहीं हो रहा है।
  • रेंट एग्रीमेंट नहीं होने पर किराएदार लंबे समय से कब्जे का दावा करता है, तो फिर मामला सिविल में चला जाता है।
  • मकान मालिक और किराएदार के विवाद की स्थिति में 3 स्तर पर सुनवाई होती है। इसके बीच और कोई कोर्ट नहीं है।

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