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CG में रेप पीड़िता के लिए छुट्‌टी वाले दिन खुला हाईकोर्ट:22 हफ्ते का गर्भ गिराने मांगी अबॉर्शन की मंजूरी; कलेक्टर कल पेश करेंगे रिपोर्ट

By Dinesh chourasiya

शीतकालीन अवकाश में हाईकोर्ट ने स्पेशल बेंच गठित कर की सुनवाई। - Dainik Bhaskar

छत्तीसगढ़ में रेप पीड़िता प्रेग्नेंट युवती के लिए शीतकालीन अवकाश के दौरान हाईकोर्ट ने विशेष कोर्ट का गठन कर मंगलवार को मामले की सुनवाई की। रेप के बाद युवती प्रेग्नेंट हो गई है। वो 21-22 सप्ताह की गर्भवती है। इससे परेशान होकर उसने हाईकोर्ट की शरण ली है।

युवती ने इसके लिए डॉक्टरों से भी राय ली। लेकिन, उन्होंने मेडिको लीगल केस बताकर अबॉर्शन करने से इनकार कर दिया। अब जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बिलासपुर कलेक्टर को मेडिकल बोर्ड गठित कर विशेषज्ञ डॉक्टरों से उसका मेडिकल कराने और कल (गुरुवार) यानी 26 दिसंबर तक रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।

23 दिसंबर को युवती ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अबॉर्शन कराने की अनुमति मांगी है। हाईकोर्ट में युवती ने स्वयं गर्भपात के लिए सहमति दी है और चिकित्सीय गर्भपात की अनुमति के लिए शपथ-पत्र भी पेश किया है।

युवती के लिए छुट्‌टी के दिन हुई सुनवाई इस मामले में हाईकोर्ट ने गंभीरता दिखाई है। शीतकालीन अवकाश के दिन चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने विशेष कोर्ट का गठन कर जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल को केस की सुनवाई करने कहा। जस्टिस अग्रवाल ने मामले की सुनवाई के दौरान 7 जून 2024 को जारी अधिसूचना के अनुसार याचिकाकर्ता की मेडिकल जांच के लिए कलेक्टर को मेडिकल बोर्ड का गठन करने का आदेश दिया। मेडिकल बोर्ड को 26 दिसंबर तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है।

विशेषज्ञ डॉक्टर करेंगे जांच हाईकोर्ट ने युवती को मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया है। मेडिकल बोर्ड में एक स्त्री रोग विशेषज्ञ, एक बाल रोग विशेषज्ञ, एक रेडियोलाजिस्ट/सोनोलाजिस्ट और अन्य आवश्यक विशेषज्ञ शामिल होंगे। जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाएगा कि युवती का अबॉर्शन हो सकता है या नहीं।

राज्य सरकार को खर्च वहन करने के निर्देश जस्टिस अग्रवाल ने युवती की मेडिकल जांच पर होने वाला पूरा खर्च राज्य सरकार को वहन करने कहा है। हाईकोर्ट ने कलेक्टर को आदेश की प्रति तत्काल भेजने और मेडिकल बोर्ड गठित करने की प्रक्रिया जल्द सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

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